अंतर्राष्ट्रीय

सीजफायर के बाद हुई गोलीबारी, इजरायल ने दिया चौंकाने वाला बयान, जानें क्या है समझौते का उल्लंघन…

Israel Hamas Ceasefire: इजरायल और हमास ने बंधकों तथा कैदियों को रिहा कर गाजा युद्धविराम समझौते के पहले चरण को आगे बढ़ाया है. इससे आशा जगी है कि अमेरिका की मध्यस्थता से हुआ यह समझौता 2 वर्ष से जारी उस युद्ध को स्थायी रूप से खत्म कर सकेगा जिसने गाजा को मलबे के ढेर में परिवर्तित कर दिया है. लेकिन, इस बीच इजरायल की सेना ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर अहम जानकारी साझा की है.

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इजरायली सेना ने क्या कहा?

इजरायल की सेना ने कहा, ”आज सुबह, कई संदिग्धों को पीली रेखा पार करते हुए उत्तरी गाजा में आईडीएफ सैनिकों की ओर बढ़ते देखा गया, जो समझौते का साफ उल्लंघन है. उन्हें दूर करने के कई प्रयासों के बाद भी, संदिग्धों ने उनकी बात नहीं मानी, जिसके बाद सैनिकों ने खतरे को दूर करने के लिए गोलीबारी प्रारम्भ कर दी. आईडीएफ के ठिकानों में आतंकियों के घुसपैठ की खबरें गलत हैं. आईडीएफ गाजा निवासियों से निर्देशों का पालन करने और आईडीएफ सैनिकों से दूरी बनाए रखने का आग्रह करता है.

अब भी अनसुलझे हैं कई सवाल

भले ही इजरायल और हमास के बीच शांति समझौता हो चुका है लेकिन इस बीच गौर करने वाली बात यह भी है कि हमास के निरस्त्रीकरण, गाजा के शासन और फिलिस्तीन को देश के रूप में मान्यता देने जैसे जटिल मामले अब भी अनसुलझे हैं, जिससे यह साफ होता है कि यह समझौता फिलहाल सिर्फ़ युद्ध को रोकने का अस्थायी तरीका है.

दयनीय है गाजा का हाल

गाजा में रिहा कैदियों की वापसी पर खुशी दिखी, लेकिन वहां की स्थिति अब भी दयनीय है. शहर मलबे में बदल चुका है, अर्थव्यवस्था बर्बाद है और पुनर्निर्माण में सालों लग सकते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते का उत्सव मनाने के लिए पश्चिम एशिया की यात्रा की है. इजरायली संसद में अपने संबोधन में उन्होंने बोला कि अब समय है कि इस युद्ध की जीत को शांति और समृद्धि में बदला जाए.

ऐसे प्रारम्भ हुई थी जंग

युद्ध की आरंभ सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से हुई थी, जिसमें 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था. इजरायल की जवाबी कार्रवाई में 67,000 से अधिक लोग मारे गए है, जिनमें नागरिक भी शामिल हैं. बंधकों की रिहाई पर पूरे इजरायल में उत्सव मनाया गया वहीं, लगभग 1,900 फिलिस्तीनी कैदियों को भी छोड़ा गया है, जिनमें 250 उम्रकैद की सजा काट रहे थे.

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