ट्रंप की सरकार में भारत की होगी मौज, रिश्ते भी होंगे बेहतर
US-India Realeion: डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे हैं। उनकी वापसी से पूरी दुनिया में हड़कंप मच हुआ है। यूरोप, कनाडा, और चीन जैसे राष्ट्र ट्रंप की नीतियों को लेकर असमंजस में हैं, जबकि हिंदुस्तान में तो चुनाव के परिणाम के पहले और बाद में भी खुशियां मनाई जा रही थी। ट्रंप के शपथ लेने के बाद ही वास्तविक रूप अमेरिका का दिखेगा, अभी तक जो हालात हैं, उस आधार पर हर कोई मान रहा है कि हिंदुस्तान के संबंध अमेरिका से खूब बेहतर होंगे

विशेषज्ञ का क्या है कहना?
इस मुद्दे पर अमेरिका में जाने माने भारतवंशी जानकार ने बोला है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के भीतर अपेक्षाकृत रूप से हिंदुस्तान की स्थिति काफी अच्छी है। उन्होंने बोला कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति हिंदुस्तान को परेशानी के रूप में नहीं देखते हैं, लेकिन शुल्क और वैध आव्रजन के मामले पर बाधाएं आ सकती हैं। ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) अमेरिका’ के कार्यकारी निदेशक ध्रुव जयशंकर ने ट्रंप (78) के राष्ट्रपति पद के लिए शपथ ग्रहण से कुछ दिन पहले दिए गए एक साक्षात्कार में , ‘‘मैं हमेशा कहता हूं कि हिंदुस्तान ट्रंप प्रशासन के अनुसार अपेक्षाकृत काफी बेहतर स्थिति में है।’’ जयशंकर की पुस्तक ‘‘विश्व शास्त्र’’ हाल में बाजार में आई है। उन्होंने कहा, ‘‘ट्रंप की मांगें क्या हैं: उनका बोलना है कि अमेरिकी सहयोगी निःशुल्क में बहुत कुछ पा रहे हैं, जबकि उन्हें और अधिक करना चाहिए। उन्हें विदेशी सहायता पसंद नहीं है। इसलिए, कई मुद्दों पर हिंदुस्तान वास्तव में सीधे सीधे प्रभावित नहीं होने जा रहा है क्योंकि वह हिंदुस्तान को एक परेशानी के रूप में नहीं देखते हैं।’’
दो मामलों में हो सकती है परेशानी, पहला व्यापार
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि दो मामले हैं, जहां कुछ रुकावटें आएंगी। एक, कुछ व्यापार मुद्दों पर, जहां हिंदुस्तान अमेरिका के साथ काफी बड़ा व्यापार अधिशेष प्राप्त करता है। ट्रंप से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि हिंदुस्तान अनियंत्रित व्यापार प्रथाओं में शामिल है, जबकि हिंदुस्तान का बोलना है कि ऐसा नहीं है और वह इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि हिंदुस्तान वास्तव में दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए शुद्ध आयातक है। यह एक उपभोक्ता-आधारित अर्थव्यवस्था है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, मुझे लगता है कि पहले कुछ महीनों में वार्ता कठिन होगी, लेकिन आशा है कि जल्द यह एक अच्छी स्थिति में पहुंच जाएगी।छह महीने या एक वर्ष के भीतर, हम किसी तरह का व्यापक समझौता कर लेंगे, जहां दोनों पक्ष आर्थिक जुड़ाव की शर्तों को समझेंगे।’’
दूसरा अप्रवास
जयशंकर ने कहा, ‘‘दूसरा मामला अप्रवास का है, जो कठिन हो सकता है। जाहिर है कि यह बिना डॉक्यूमेंट्स वाले प्रवासियों के मुद्दे में बहुत साफ है, लेकिन मुझे लगता है कि वैध प्रवास का प्रश्न भी अमेरिका में पहले से ही एक मामला बन चुका है। ये दो ऐसे क्षेत्र हैं जिन पर मेरी नजर रहेगी। इसलिए यह ऐसा रिश्ता नहीं है जिसमें कुछ अड़चनें नहीं हों। लेकिन मुझे लगता कि यह रिश्ता सकारात्मक दिशा में बना रहेगा।’’
चीन की निकल सकती है हेकड़ी?
चीन पर एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बोला कि यह (चीन) ट्रंप प्रशासन की सबसे बड़ी अनिश्चितताओं में से एक है। उन्होंने कहा, ‘‘कम से कम अब तक घोषित नियुक्तियों के आधार पर, सबसे प्रमुख दृष्टिकोण यह है कि चीन को अमेरिका के एक व्यवस्थित प्रतियोगी के रूप में देखा जाता है।’’ उन्होंने बोला कि कुछ ऐसे भी लोग हैं जो मानते हैं कि चीन एक प्रतिस्पर्धी बना हुआ है। उनका बोलना है कि अमेरिका को वास्तव में अन्य क्षेत्रों, यूरोप और पश्चिम एशिया में अपनी मौजूदगी या तो समाप्त कर लेनी चाहिए या फिर कम लेनी चाहिए।

