अंतर्राष्ट्रीय
ईरान इस रणनीति द्वारा जीतेगा Israel से जंग
आपको सलमान खान की सुपरहिट फिल्म वांटेड की कहानी याद है. जब राधे बनकर अंडरवर्ल्ड डॉन गनी भाई की गैंग में सलमान एंट्री लेते हैं और देखते हैं देखते हैं मुंबई में गैंग की कमान भी संभाल लेते हैं. गनी भाई के लिए राधे काम करता है और उसके दुश्मनों को ठिकाने लगाता है. मुंबई में गैंगवार जोड़ों पर होती है. लेकिन फिल्म के क्लाइमेक्स में पता चलता है कि गनी भाई जिस राधे को अपने गैंग का खास मेंबर समझ रहे हैं होते हैं वह एक पुलिस ऑफिसर निकलता है. मुंबई से एक एक कर अपराधियों को साफ कर रहा होता है. गाजा के बाद अब इजरायल के फुल ऑन टारगेट पर लेबनान है. 2006 के बाद से पहली बार इजरायल की तरफ से लेबनान में ग्राउंड ऑपरेशन प्रारम्भ कर दिया गया है. इजरायली सेना ने लिमिटेड ऑपरेशन के अनुसार लेबनान में एंट्री कर ली है. वहीं सेफ बंकर में पिछले डेढ़ दशक से रहने वाले नसरल्लाह के ठिकाने तक जब इजरायल पहुंच गया तो अब हर कोई दंग परेशान नजर आ रहा है. ईरान को लग रहा है कि हिजबुल्लाह में मोसाद के कई एजेंट हैं. वहीं ईरान में भी कई वरिष्ठ सरकारी पदों पर मोसाद के एजेंट होने की बात सामने आ रही है. इसके बाद से ही पूरा ईरान खौफ में है. नसरल्लाह की मृत्यु के बाद से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अब किसी पर विश्वास नहीं कर रहे हैं.

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हिजबुल्लाह चीफ को कैसे मारा गया
लेबनानी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह की 27 सितंबर को इजरायली हवाई हमलों में मृत्यु हो गई. 29 सितंबर को उनका मृतशरीर बरामद हुआ. इस हमले को इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने स्वीकृति दे दी थी जब वह न्यूयॉर्क में संयुक्त देश की बैठक में भाग ले रहे थे. खूंखार आतंकी का मृतशरीर बेरूत में उसके बंकर से बरामद किया गया, जो इजरायली हवाई हमलों में नष्ट हो गया था. हिजबुल्लाह के बयान में नसरल्लाह की मृत्यु की पुष्टि की गई है, जिसमें यह नहीं कहा गया है कि उसे वास्तव में कैसे मारा गया. कहा जा रहा है कि नसरल्लाह और हिज़्बुल्लाह के अन्य नेता एक भूमिगत बंकर में एक बैठक कर रहे थे, ठीक उसी समय इसराइल ने धावा कर दिया. हसन नसरल्लाह की मृत्यु ने ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद द्वारा लगाए गए आरोपों पर बहस फिर से प्रारम्भ कर दी है कि इजरायल के मोसाद ने ईरानी खुफिया तंत्र में घुसपैठ की थी. 2021 में सीएनएन तुर्क के साथ एक इंटरव्यू में अहमदीनेजाद ने दावा किया कि इजरायली जासूसी प्रयासों को विफल करने के लिए स्थापित एक प्रमुख ईरानी खुफिया इकाई का प्रमुख वास्तव में एक इजरायली एजेंट था. यदि ये खुलासे सच पाए गए, तो ईरान की खुफिया कमजोरियों और उसकी सुरक्षा सेवाओं की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न उठेंगे.
ईरानी गोपनीय सर्विस का चीफ मोसाद एजेंट निकला
अहमदीनेजाद ने 2013 तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया. इंटरव्यू के दौरान, उन्होंने इल्जाम लगाया कि यह साफ हो गया कि मोसाद के संचालन का मुकाबला करने वाली खुफिया इकाई का प्रभारी आदमी स्वयं इज़राइल का एक ऑपरेटिव था. उन्होंने आगे बोला कि यूनिट के प्रमुख के अलावा, डिवीजन के 20 अन्य खुफिया संचालक इजरायली एजेंसी मोसाद के एजेंट पाए गए. उन्होंने दावा किया कि घुसपैठ के स्तर ने विदेशी एजेंसियों के लिए ईरान के भीतर अभियान चलाना संभव बना दिया है, जिसमें 2018 में ईरानी परमाणु दस्तावेजों की चोरी और प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों की मर्डर भी शामिल है. 2018 में इजरायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुलासा किया कि बड़ी संख्या में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के डॉक्यूमेंट्स इजरायली एजेंटों द्वारा हासिल किए गए थे. उन्होंने एक हाई-प्रोफाइल भाषण के दौरान दस्तावेज़ प्रदर्शित किए और इल्जाम लगाया कि उन्होंने ईरान के गुप्त परमाणु हथियार कार्यक्रम का प्रदर्शन किया. बाद में, तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी द्वारा आरोपों की पुष्टि की गई, जिसने सत्यापित किया कि दस्तावेज़ तेहरान में एक ऑपरेशन के दौरान बरामद किए गए थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोसाद के एजेंट तेहरान के एक गोदाम में घुस गए और छह घंटे के ऑपरेशन में तिजोरियां तोड़कर 100,000 से अधिक वर्गीकृत कागजात ले गए.
इज़राइल के क्षेत्रीय अभियान ईरान से आगे तक फैले हुए हैं
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोसाद की घुसपैठ ने न सिर्फ़ ईरान की आंतरिक कमजोरियों को उजागर किया है, बल्कि लेबनान में उसके प्रॉक्सी नेटवर्क की कमजोरियों को भी उजागर किया है. क्षेत्र में मोसाद के असर को हिजबुल्लाह के विरुद्ध लक्षित अभियानों और हसन नसरल्लाह सहित उसके प्रमुख लोगों की मर्डर के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है, जो हाल ही में एक हवाई हमले में मारा गया था. नसरल्लाह की मृत्यु के लिए चलाए गए ऑपरेशन ने मोसाद की इज़राइल की सीमाओं से परे काम करने की क्षमताओं को उजागर किया. यह साफ है कि मोसाद की पूरे क्षेत्र में, विशेष रूप से ईरान और लेबनान में जरूरी पहुंच है.
संकट में ईरानी खुफिया
इज़राइल ने ईरान के अंदर हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन करना जारी रखा है, ईरान के भीतर उसकी खुफिया सेवाओं की क्षमता के बारे में बहस को अहमदीनेजाद के खुलासे के साथ नयी गति मिली है. ईरान में अब इजरायली एजेंटी की जांच प्रारम्भ हो गई है. ईरान को लेबनान की यात्रा करने वाले रिवोल्यूशनरी गार्ड के कुछ ऑफिसरों पर संदेह है. इनमें से एक अधिकारी ने नसरल्लाह के ठिकाने के बारे में पूछा था. ईरान ने कुछ अन्य संदिग्धों के साथ इस अधिकारी को अरैस्ट कर लिया है. हालांकि उसका पूरा परिवार ईरान से भागने में सफल रहा.