अंतर्राष्ट्रीय

इस्लामी कट्टरपंथियों के मामले पर ISKCON ने जारी किया यह बयान

ढाका: बांग्लादेश में हिन्दुओं, विशेष रूप से ISKCON अनुयायियों, के विरुद्ध बढ़ते हमले और अत्याचारों ने चिंता बढ़ा दी है. हाल की घटनाओं के बाद ISKCON कोलकाता ने अपने अनुयायियों को राय दी है कि वे बांग्लादेश में अपनी धार्मिक पहचान को छिपाकर रखें. अनुयायियों को तिलक न लगाने, भगवा वस्त्र न पहनने, तुलसी मला न पहनने और पूजा-पाठ छुपकर करने की राय दी गई है.

 

67230b7ab3769 case of treason filed against iskcon leader chinmoy das in bangladesh 314540967 16x9 1

WhatsApp Group Join Now

ISKCON कोलकाता के प्रवक्ता राधारमण दास ने बोला कि बांग्लादेश में हालात बहुत गंभीर हो चुके हैं. हिन्दू साधुओं और अनुयायियों को धमकियाँ मिल रही हैं, और धार्मिक पहचान सार्वजनिक होने पर उनके साथ अत्याचार का खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने अनुयायियों से स्वयं को साधुओं जैसा दिखने से बचने और अपनी सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाने की अपील की है. इस बीच, इस्लामी कट्टरपंथियों ने ISKCON साधु चिन्मय कृष्ण दास के वकील रामेन रॉय पर जानलेवा धावा किया. रामेन रॉय गंभीर रूप से घायल हैं और ICU में भर्ती हैं. चिन्मय कृष्ण दास, जिन्हें देशद्रोह के इल्जाम में अरैस्ट किया गया था, पर गवर्नमेंट की कठोरता और उनके वकील पर हमला, दोनों ने बांग्लादेश में हिन्दुओं के हालात को उजागर किया है.

ये प्रश्न उठता है कि जब पूरे विश्व में यह दावा किया जाता है कि मुसलमान समुदाय शांतिप्रिय है और सभी धर्मों के साथ सौहार्द बनाए रखता है, तो ISKCON को अपने अनुयायियों को धार्मिक पहचान छिपाने की राय क्यों देनी पड़ी? हिन्दू बहुल हिंदुस्तान में किसी मुसलमान आदमी को अपनी दाढ़ी या टोपी छुपाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, तो फिर इस्लामी बहुल राष्ट्र में हिन्दुओं को अपनी धार्मिक पहचान छिपाने के लिए विवश क्यों किया जा रहा है? अगर हिंदुस्तान में भी इस्लामी जनसंख्या बढ़ी तो क्या यहाँ के अन्य समुदायों को भी इसी तरह डर-डर कर रहना पड़ेगा ? क्योंकि, बांग्लादेश में लोग किसी दूसरे ग्रह से नहीं आए हैं, हिंदुस्तान से ही गए हैं, उनकी विचारधारा वही है, जो यहाँ के लोगों की है.

इस स्थिति से यह प्रश्न और भी प्रासंगिक हो जाता है कि इस्लामी राष्ट्रों में हिन्दुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को अपने धर्म का पालन करने में क्यों मुश्किल होती है ? क्या यह कट्टरपंथी इस्लामी मानसिकता का नतीजा है, जो अन्य धर्मों के प्रति नफरत दिखाती है? क्यों इस्लामी राष्ट्र अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों की गारंटी देने में असफल हो रहे हैं? इन मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहस होना महत्वपूर्ण है, ताकि धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की जा सके.

 

Back to top button