इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, युद्ध उन्होंने की शुरू और खत्म करेंगे हम
जैसे 32 दांतो के बीच जीभ रहती है वैसे ही अरब देशों के बीच इजरायल है। वह दुनिया का एक अकेला ऐसा राष्ट्र है जो बहुत ही छोटा होने और इतने आक्रामक पड़ोसियों से घिरा होने के बावजूद अपनी शर्तों पर जी रहा है। प्रगति कर रहा है और रक्षा क्षेत्र में अमेरिका की बराबरी कर रहा है। इजरायल का जब भी जिक्र होता है तो सिक्स डे वॉर की भी बात जरूर होती है। जब एक जंग में इजरायल ने अरब राष्ट्रों को बुरी तरह हराया था। ये अरब राष्ट्र इजिप्ट, सीरिया, जॉर्डन, इराक, सऊदी अरब और कुवैत थे। 50 वर्ष बाद एक बार फिर इजराइल पर अचानक बहुत बड़ा धावा हुआ है। इजरायल और हमास के बीच युद्ध बड़ा होता जा रहा है। अब तक दोनों पक्षों के 3 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इजरायल ने हमास को मिटाने का घोषणा किया है और हमास कई दशक से इजरायल के बारे में यहीं ख़्वाहिश रखता है। कठिन ये है कि दोनों राष्ट्रों के बीच हो रही जंग को लेकर दुनिया के भिन्न-भिन्न राष्ट्रों की राय जुटा है। अमेरिका, भारत, ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन जैसे राष्ट्र इजरायल के समर्थन में हैं तो इस्लामिक राष्ट्र हमास के कदम को ठीक बता रहे हैं। वहीं कुछ राष्ट्र ऐसे भी हैं जो पूरी तरह तटस्थ होकर युद्ध विराम की अपील कर रहे हैं। 
इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने बोला है कि युद्ध उन्होंने प्रारम्भ की है समाप्त हम करेंगे। जानकार इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध को तीसरे विश्व युद्ध की आहट मान रहे हैं। खास बात ये है कि इन दो युद्धों को लेकर दुनिया के राष्ट्र दो हिस्सों में बंट गए हैं। जिस तरह यूक्रेन युद्ध के दौरान पश्चिमी राष्ट्र कीव समर्थन कर रहे थे। क्यूबा, चीन, अर्मेनिया, कजाकिस्तान, कीर्गिस्तान और बेलारूस जैसे राष्ट्र रूस के समर्थन में थे। यही हाल अब हमास और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध में बन रहे हैं। जहां मिडिल ईस्ट के ज्यादातर खाड़ी राष्ट्र फिलिस्तीन का समर्थन कर रहे हैं। जबकि ज्यादातर पश्चिमी राष्ट्र इजरायल के साथ खड़े हैं।
कौन सा राष्ट्र किसके साथ
इजरायल को मिला ब्रिटेन समेत इन राष्ट्रों का साथ
इजरायल और हमास में ज्यादातर शक्तिशाली राष्ट्र इजरायल के साथ हैं। अमेरिका ने तो खुलकर इजरायल का समर्थन किया है।अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यहां तक कह दिया है कि अन्य राष्ट्र इस संघर्ष से दूर रहे। ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक ने इस्राइल में जारी संघर्ष पर चर्चा के लिए अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं से बात की है। सुनक ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज और इटली की पीएम जियोर्जिया मेलोनी के साथ अपने संयुक्त बयान में इस्राइल के लिए ‘दृढ़ता और एकजुटता’ के साथ समर्थन जाहिर किया। उन्होंने आतंकी हरकतों के लिए हमास की का कोई औचित्य नहीं है और इसकी हर तरह से आलोचना की जानी चाहिए। बयान में बोला गया कि हमारे राष्ट्र इस तरह के अत्याचारों के विरुद्ध अपनी और अपने लोगों की रक्षा करने के प्रयासों में इस्राइल का समर्थन करेंगे। हम इस बात पर भी बल देते हैं कि इस्राइल के प्रति शत्रुता का रेट रखने वाले किसी भी संगठन के लिए यह समय इन हमलों का फायदा उठाने का नहीं है। इन पांच नेताओं ने बोला कि वे फलस्तीनी लोगों की वैध आकांक्षाओं को मान्यता देते हैं। इस्राइल और फलस्तीनियों के लिए इन्साफ और स्वतंत्रता के समान तरीकों का समर्थन करते हैं। लेकिन हमास फलस्तीनी लोगों की इन आकांक्षाओं का अगुवाई नहीं करता है।
फिलिस्तीन के समर्थन में पाक समेत सारे मुसलमान देश
मुस्लिम राष्ट्र ईरान, कतर, कुवैत, लेबनान, यमन, इराक और सीरिया पूरी तरह से फिलिस्तीन के साथ हैं। पिछले दिनों इजरायल से संबंध सुधारने की दिशा में काम कर रहे सऊदी अरब ने भी इजरायल को चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने हमास के हमले को फिलिस्तीनियों का सेल्फ डिफेंस एक्ट कहा था। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बोला था कि ये ऑपरेशन सत्ता हथियाने वाले शासन के चरमपंथियों के प्रति फिलिस्तीनियों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी। उन्होंने बाकी मुसलमान राष्ट्रों से अल अक्सा मस्जिद और फिलिस्तीनियों के अधिकारों का समर्थन करने का आह्वान किया। इराक के पीएम मोहम्मद शिया अल सूडानी ने एक बयान में बोला कि फिलिस्तीनी लोगों द्वारा किया गया ये ऑपरेशन कई वर्षों से व्यवस्थित उत्पीड़न का स्वाभाविक रिज़ल्ट है। कतर के विदेश मंत्रालय ने बोला कि फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के उल्लंघन के चलते इस हमले के लिए उत्तरदायी है। सीरिया ने भी सरकारी समाचार मीडिया के माध्यम से हमास के इजरायल पर हमले के लिए समर्थन दिखाते हुए बयान जारी किए। सऊदी अरब ने इस हमले के लिए इजरायल को उत्तरदायी ठहराया। उकसावे और फिलिस्तिनयों को अधिकारों से वंचित रखने के चलते ये धावा हुआ।
चीन-रूस और किम जोंग क्या बोलना है
खास बात ये हैं कि यूक्रेन के साथ युद्ध कर रहे रूस ने स्वयं को तटस्थ रखा है। रूस का मानना है कि अमेरिका और पश्चिमी राष्ट्र इजरायल को भी यूक्रेन की तरह फंसा रहे हैं। समाचार सामने आई है कि फिलीस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास मॉस्को जा सकता है। वहां अब्बास रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर सकते हैं। इस सूची में चीन और तुर्किए भी है। जिन्होंने युद्ध के हालात पर चिंता जाहिर करते हुए युद्ध विराम की बात कही है। चीन ने फिलिस्तीन और इजरायल से तुरंत युद्ध समाप्त करने की अपील की है। बीजिंग की ओर से बोला गया कि दोनों राष्ट्रों को धैर्य बरतते हुए हालात को और बिगड़ने से रोकना चाहिए। इसके साथ ही चीन ने नागरिकों की रक्षा के लिए शांति बहाल करने के लिए बोला है। उत्तर कोरियाई राज्य मीडिया ने पहली बार इज़राइल और इस्लामी समूह हमास के बीच सेना झड़पों पर बल देते हुए गाजा में रक्तपात के लिए इज़राइल को गुनेहगार ठहराया। सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के मुखपत्र रोडोंग सिनमुन ने विदेशी मीडिया का हवाला देते हुए संघर्ष और हताहतों पर एक संक्षिप्त लेख प्रकाशित किया। अखबार ने बोला कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का दावा है कि यह संघर्ष फिलिस्तीनी लोगों के विरुद्ध इजरायल के लगातार आपराधिक कृत्यों का रिज़ल्ट था, और मूल रास्ता एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य का निर्माण करना है।
भारत की होगी अहम भूमिका
भारत के पीएम मोदी ने संकट की इस घड़ी में इजरायल के साथ खड़े होने की बात कही है। फिलस्तीनी राजदूत अदनान अबु अलहैजा ने बोला कि हिंदुस्तान अपने बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कद और पश्चिम एशिया के सभी प्रमुख पक्षों पर असर से इस्राइल-हमास संघर्ष से पैदा संकट को कम करने में अहम किरदार निभाने के लिहाज से अच्छी स्थिति में है। अलहैजा ने विशेष रूप से बोला कि हिंदुस्तान इस्राइल और फलस्तीन दोनों का एक ‘मित्र’ है। वह तनाव कम करने की दिशा में काम करने और फलस्तीन मामले के निवारण में सहयोग देने में ‘सक्षम’ है। अलहैजा ने बोला कि हिंदुस्तान यूरोपीय देशों, अमेरिका, पश्चिम एशिया के राष्ट्रों से संपर्क कर सकता है। शांति की दिशा में काम करने के लिए इस्राइल पर ‘दबाव’ बना सकता है, जिससे वह (इस्राइल) अब तक इनकार करता रहा है। उन्होंने बोला कि हिंदुस्तान प्रारम्भ से जानता है कि फलस्तीनी मामला क्या है? महात्मा गांधी के समय से। इसलिए, वे उस किरदार को निभाने के लिए योग्य हैं, खासकर क्योकि हिंदुस्तान दोनों का मित्र है।’

