जाने हैं क्या है हमास और कब हुई इसकी स्थापना…
Israel Hamas War: हमास सात अक्टूबर से सुर्खियों में है, जब उसकी मिलिट्री विंग कासम ब्रिगेड ने इजरायल के विरुद्ध धावा बोल दिया था। उसने इजरायल के 1400 से अधिक लोगों को मृत्यु के घाट उतार दिया, जबकि 200 लोगों को बंधक बना लिया। इसके बाद इजरायल ने हमास को समाप्त करने की प्रतिज्ञा ली है। इजरायली हमलों में अब तक 6500 से अधिक फिलिस्तीनियों की मृत्यु हो चुकी है जोकि गाजा पट्टी के विभिन्न इलाकों में रह रहे हैं। इजरायल और हमास जंग अभी जल्द थमती हुई भी नहीं दिख रही है। 2005 में अपने सैनिकों के वहां से हटने के बाद से इजरायल ने गाजा पर छह बड़े हमले किए हैं। 2012 में, उसने हवाई हमलों में कासम ब्रिगेड के प्रमुख अहमद जाबरी को मार डाला था। अब हमास की कासम ब्रिगेड इजरायल को लगातार टेंशन दे रही है और गाजा से ही पलटवार कर रही है। इसके लड़ाके काफी खूंखार माने जाते हैं।

पहले जानते हैं क्या है हमास और कब हुई इसकी स्थापना?
‘अल जजीरा’ की रिपोर्ट के अनुसार, हमास की स्थापना शेख अहमद यासीन और उनके सहयोगी अब्दुल अजीज अल-रंतीसी ने 1987 में मिस्र के मुसलमान ब्रदरहुड की एक शाखा के रूप में की थी। यह एसोसिएशन 2017 तक चला जब हमास ने मुसलमान ब्रदरहुड के साथ अपने संबंधों को खत्म करने का संकेत दिया। हमास – हरकत अल-मुकावामा अल-इस्लामिया का शॉर्ट फॉर्म है, जिसका मतलब होता है- उत्साह। यह इजरायली कब्जे के विरुद्ध पहले इंतिफादा के दौरान उभरा, जिसके दौरान हजारों फिलिस्तीनी इजरायली भूमि अधिग्रहण के विरुद्ध शांतिपूर्वक विरोध करने के लिए सामने आए।
इसके बाद फिलिस्तीनियों ने पत्थरों का इस्तेमाल करना प्रारम्भ कर दिया, और कुछ समूहों ने छोटे हथियारों का सहारा लिया। हमास ने फिलिस्तीन को आजाद कराने के लिए सशस्त्र प्रतिरोध का समर्थन किया और 1993 के ओस्लो समझौते का विरोध करते हुए बोला कि इजरायल ने 1967 में कब्जा किए गए क्षेत्रों पर गैरकानूनी बस्तियों का विस्तार करने के लिए समझौते का इस्तेमाल किया। इसके बाद 2006 में, ग्रुप ने गाजा में चुनाव में हिस्सा लेने का निर्णय भी किया। हमास संस्थापक यासीन के साथ घनिष्ठ संबंध रखने वाला इस्माइल हनियेह आज हमास की सियासी विंग का नेतृत्व करता है।
अब जानिए कासम ब्रिगेड क्या है?
हमास ने 1980 और 1990 के दशक में इजरायल के विरुद्ध अपने लड़ाकों द्वारा की जा रही सेना कार्रवाइयों को केंद्रीकृत और व्यवस्थित करने के लिए 1992 में अपनी आर्मी यूनिट की स्थापना की। समूह की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह नाम एक सीरियाई सेनानी, एजेदीन अल-कासम से प्रेरित है, जिसने फिलिस्तीन से निष्कासित होने के बाद ब्रिटिश कब्जे के विरुद्ध संघर्ष किया था। मोहम्मद डेफ सेना कमांडर है, जिसकी सहायता उसका डिप्टी मारवान इस्सा करता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इजरायल के विरुद्ध कासम ब्रिगेड की कार्रवाइयों ने हमास को फिलिस्तीनियों के बड़े वर्ग के बीच लोकप्रियता हासिल करने में सहायता की है। वहीं, सीआईए वर्ल्ड फैक्टबुक के अनुसार, कासम ब्रिगेड में 20,000 से 25,000 सदस्य हैं।
इजरायली हमलों में ब्रिगेड ने हजारों लड़ाकों को खो दिया है और इजरायली हवाई हमलों में इसके संसाधन खत्म हो गए हैं। 2005 में गाजा से इजरायल की वापसी ने हमास को अपनी सेना शाखा के पुनर्निर्माण का अवसर प्रदान किया। हमास की कासम ब्रिगेड को माना जाता है कि ईरान की ओर से सहायता मिलती है और वही उसे हथियार समेत अनेक महत्वपूर्ण चीजें उपलब्ध करवाता है। सीआईए फैक्टबुक के अनुसार, बोला जाता है कि ब्रिगेड ने स्मग्लिंग के माध्यम से अपने हथियार हासिल किए, कथित तौर पर ईरान से कुछ सेना सहायता प्राप्त की और क्षेत्रीय स्तर पर कुछ हथियार बनाए। कासम ब्रिगेड ज्यादातर रॉकेट हमलों पर भरोसा करती है और हाल ही में हथियारों की सूची में कुछ ड्रोन भी शामिल किए हैं।

