इन कारनामों को अंजाम दे चुके हैं यूनुस के करीबी महफूज आलम…
Who is Mehfooz Alam: बांग्लादेश में लंबे समय से रिजर्वेशन में परिवर्तन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने आखिरकार 5 अगस्त को पीएम शेख हसीना की गवर्नमेंट को उखाड़ फेंक दिया। यहां तक कि शेख हसीना को राष्ट्र छोड़कर भागना पड़ा और हिंदुस्तान में शरण लेनी पड़ी।

इसके बाद बांग्लादेश में अंतरिम गवर्नमेंट बनी और नोबेल पुरुस्कार विजेता यूनुस को गवर्नमेंट मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया। हाल ही में यूनुस ने एक बड़ा दावा करते हुए एक और नाम खबरों में उछाल दिया है। इस नाम को लेकर यूनुस ने दावा किया है कि इसी ने शेख हसीना की गवर्नमेंट को हटाना में अहम भूमिका अदा किया था। इतना सुनने के बाद भारतीय गवर्नमेंट ने भी कठोर शब्दों में फटकार लगाई है।
मंगलवार को न्यूयॉर्क में एक प्रोग्राम के दौरान यूनुस ने अपने विशेष सहायक महफूज आलम को छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के पीछे एक अहम आदमी के रूप में पेश किया, जिसने शेख हसीना की अवामी लीग गवर्नमेंट को उखाड़ फेंकने की प्रयास की। यह कार्यक्रम क्लिंटन ग्लोबल इनिशिएटिव के दौरान हुआ, जो संयुक्त देश महासभा के 79वें सत्र के साथ आयोजित किया गया था।मोहम्मद यूनुस ने महफूज की तरफ इशारा करते हुए बोला था,’पूरी क्रांति के पीछे का दिमाग ये (महफूज आलम) है।‘
कौन है महफूज आलम?
उन्होंने आगे काह कि ये लगातार इनकार करता है और कहता है कि मैंने नहीं बल्कि काफी और लोगों ने किया है। लेकिन इस पूरी चीज के पीछे इन्हीं का दिमाग है। यूनुस ने महफूज की प्रतिबद्धता और हौसला की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने बोला कि उनके शब्द पूरे विश्व के युवाओं को प्रेरित कर सकते हैं। उन्होंने दर्शकों को इन युवा नेताओं को बेहतर बांग्लादेश के निर्माण में समर्थन देने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही उनसे उनकी लगातार सफलता की कामना करने की अपील की। तो चलिए जानते हैं कि आखिर ये महफूज आलम है कौन?
भारतीय राज्यों को कहा बांग्लादेश का हिस्सा
महफूज आलम बांग्लादेश की अंतरिम गवर्नमेंट के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के सलाहकार हैं। हाल ही में उनसे एक विवादित फेसबुक पोस्ट किया, जिसमें हिंदुस्तान के पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा राज्यों को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाया गया था। इस पोस्ट में उन्होंने ‘नए भूगोल और व्यवस्था’ की आवश्यकता पर बल देते हुए दावा किया कि पूर्वोत्तर हिंदुस्तान और बांग्लादेश की संस्कृतियों को ‘हिंदू उग्रवादियों’ और उच्च जाति के हिंदुओं के ‘बंगाल विरोधी रवैये’ के ज़रिए दबाया गया है।
1975 और 2024 दोहराने की बात
महफूज आगे कहता है कि हिंदुस्तान ने एक नियंत्रण और यहूदी बस्ती कार्यक्रम अपनाया है। हिंदुस्तान से सच्ची आजादी यकीनी बनाने के लिए हमें 1975 और 2024 दोहराना होगा। 1975 यानी शेख मुजीबुर्रहमान की मर्डर वाला घटनी और 2024 यानी शेख हसीना का तख्तापलट वाली घटना दोहरानी की बात कही जा रही है। आलम ने बोला कि दोनों घटनाओं के बीच 50 वर्ष का अंतर है, लेकिन कुछ भी नहीं बदला। हम भूगोल और प्रबंध में फंस गए हैं। हमें अब एक नए भूगोल और प्रबंध की आवश्यकता होगी।
भारत ने कहा- सोच समझकर बयान दें
इस संबंध में भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कठोर अंदाज में ऐतराज जाहिर किया। रणधीर जायसवाल ने कहा,’जिस पोस्ट का जिक्र किया जा रहा है उसे कथित तौर पर हटा दिया गया। साथ ही हमने इस मामले पर बांग्लादेश के सामने कड़ा विरोध दर्ज करा दिया है।‘ जायसवाल ने कहा,’हम सभी संबंधित पक्षों को याद दिलाना चाहेंगे कि वे अपनी सार्वजनिक टिप्पणियों के प्रति सचेत रहें।‘ जायसवाल ने कहा,’भारत ने बांग्लादेश के लोगों और अंतरिम गवर्नमेंट के साथ संबंधों को बढ़ावा देने में बार-बार रुचि दिखाई है, इस तरह की टिप्पणियां सार्वजनिक अभिव्यक्ति में जिम्मेदारी की जरूरत को रेखांकित करती हैं।‘

