संप्रभुता के सम्मान पर आधारित रिश्ते: मुइज़ू
भारत विरोधी रुख अपनाकर मालदीव का राष्ट्रपति चुनाव जीतने वाले मोहम्मद मुइज़ू ने एक बार फिर अपने इरादे जाहिर किए हैं। बुधवार को मालदीव में हिंदुस्तान के उच्चायुक्त की बैठक के दौरान सेवानिवृत्त राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ू ने बोला कि मालदीव ने निर्णय किया है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा। मुझे आशा है कि हिंदुस्तान इस निर्णय का सम्मान करेगा।
दरअसल, चुनाव जीतने के एक दिन बाद उन्होंने घोषणा की कि विदेशी सैनिकों को मालदीव छोड़ देना चाहिए। मुइज़ू का सीधा इशारा इंडियन आर्मी की ओर था। मालदीव 75 भारतीय सेना ऑफिसरों की मेजबानी करता है जो भारतीय विमानों का संचालन और रखरखाव करते हैं।
मालदीव में भारतीय उच्चायुक्त ने मुइज़ू से मुलाकात की
मालदीव में हिंदुस्तान के उच्चायुक्त मुनु मुहावर ने बुधवार को मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डाक्टर से मुलाकात की। मोहम्मद मुइज़ू से मुलाक़ात हुई। मुलाकात के बाद मुहावर ने बोला कि उन्होंने मालदीव के राष्ट्रपति मुइज़ू से मुलाकात की और पीएम मोदी की ओर से उन्हें शुभकामना दी। मुनु मुहावर मालदीव के राष्ट्रपति से मिलने वाले तीसरे उच्चायुक्त हैं। उनसे पहले ब्रिटिश उच्चायुक्त करेन रोहस्लर और चीनी राजदूत वांग लिक्सिन आए थे।
बैठक के दौरान मालदीव के राष्ट्रपति मुइजु ने कहा, ‘मुझे आशा है कि हम संप्रभुता के सम्मान के सिद्धांतों के आधार पर मालदीव-भारत संबंधों को बहाल करके दोनों राष्ट्रों के बीच संबंधों को नयी ऊंचाई पर ले जाने में सफल होंगे।’ मालदीव ने निर्णय किया है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा और हमें आशा है कि हिंदुस्तान इस निर्णय का सम्मान करेगा। इसके अतिरिक्त मालदीव के निवर्तमान राष्ट्रपति मुइज़ू ने मोहम्मद सोहेल गवर्नमेंट द्वारा हिंदुस्तान से लिए गए कर्ज के पुनर्गठन की भी आशा जताई है।
भारतीय उच्चायुक्त मुहावरे ने भारत-मालदीव संबंधों को बढ़ाने और मालदीव के विकास के लिए हिंदुस्तान की प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। 2018 में मालदीव में मोहम्मद सोलिह की गवर्नमेंट बनने के बाद से हिंदुस्तान ने ‘नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी’ के अनुसार कई परियोजनाओं के लिए मालदीव को बड़ी सहायता प्रदान की है।
मुइज्जू ने चीन का पक्ष लिया
मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे को हिंदुस्तान के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है। मालदीव के नए राष्ट्रपति मुइझू ने पिछले वर्ष चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के ऑफिसरों के साथ बैठक में बोला था कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में लौटती है, तो यह दोनों राष्ट्रों (चीन-मालदीव) के बीच मजबूत संबंधों में एक और अध्याय जोड़ेगी।
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को मोहम्मद मुइज़ू के सियासी गुरु के रूप में देखा जाता है। अब्दुल्ला यामीन के कार्यकाल के दौरान मालदीव ने निर्माण परियोजनाओं के लिए हिंदुस्तान के निवेदन को अस्वीकार करते हुए चीन से भारी उधार लिया।

