पाकिस्तानी सेना भी बलूच विद्रोहियों के हमले रोकने में दिखा नाकाम

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में हाल के दिनों में विद्रोही संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के हमले बढ़ गए हैं. बीएलए अब पाक गवर्नमेंट को खुली चुनौती पेश कर रही है. पाकिस्तानी सेना भी बलूच उपद्रवियों के हमले रोकने में असफल दिख रही है. बलूचिस्तान की गवर्नमेंट ने राज्य में बिगड़ती कानून प्रबंध के बीच कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर रात में यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है. आयुक्तों ने अधिसूचना जारी कर प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया. यह प्रतिबंध क्वेटा-ताफ्तान रोड, लोरलाई-डेरा गाजी खान रोड, सिबी रोड, कोस्टल हाईवे और झोब-डेरा इस्माइल खान रोड सहित कई हाईवे पर लागू है.
बलूचिस्तान का इतिहास सांस्कृतिक समृद्धि और सियासी अशांति के जटिल ताने-बाने से चिह्नित है. दशकों से, प्रांत सियासी स्वायत्तता, संसाधन आवंटन और सामाजिक-आर्थिक हाशिए पर शिकायतों से प्रेरित अलगाववादी आंदोलनों से जूझ रहा है. इन विद्रोहों में सबसे आगे रहने वाले बीएलए का अपने अलगाववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सुरक्षा बलों, बुनियादी ढांचे और नागरिकों को निशाना बनाने का कुख्यात इतिहास रहा है. बेगुनाह नागरिकों को ले जाने वाली ट्रेन जाफर एक्सप्रेस पर धावा उनकी रणनीति में एक परेशान करने वाली वृद्धि को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य भय पैदा करना और राष्ट्रीय एकता को बाधित करना है.
ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों में पाक के सुरक्षा बलों को बड़ी फजीहत का सामना करना पड़ा, जब बलूचों ने उन्हें शर्मशार करने वाली चुनौती दी. 339 यात्रियों को सफलतापूर्वक बचाया गया, लेकिन कई लोगों की जान भी गवानी पड़ी. इसमें ज्यादतर पाकिस्तानी सेना और पुलिस के जवान शामिल थे.

