Prabhasakshi Exclusive: इजराइल को पश्चिमी देशों से मिलने लगा है सहयोग
प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस हफ्ते हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि इजराइल ने बोला है कि हमास की कैद में कई बंधक मारे जा चुके हैं। क्या इससे यह संघर्ष नयी दिशा लेगा? हमने जानना चाहा कि अब इजराइल ने हमास का संघर्षविराम प्रस्ताव भी अस्वीकार कर दिया है इससे क्या संदेश मिलता है? इसके उत्तर में उन्होंने बोला कि इजराइल ने संघर्षविराम का प्रस्ताव इसलिए अस्वीकार कर दिया है क्योंकि पीएम बेंजामिन नेतन्याहू इस लड़ाई में निर्णायक जीत हासिल करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। उन्होंने बोला कि इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा हमास की संघर्षविराम शर्तों को अस्वीकार करने और दक्षिणी गाजा शहर में हमले बढ़ाने का संकल्प व्यक्त करने के बाद गाजा पट्टी के राफा में इजरायली हवाई हमलों में 13 लोग मारे गए। उन्होंने बोला कि बहुत से लोग राफा में भाग कर आये हैं इसलिए संभव है कि यहां आतंकियों की संभावित मौजूदगी को देखते हुए इजराइल आने वाले दिनों में अपने हमले और तेज करे।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने बोला कि खास बात यह है कि बीच में इजराइल को पश्चिमी राष्ट्रों से जो योगदान नहीं मिल रहा था वह अब मिलने लगा है। उन्होंने बोला कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने गाजा में इजरायल की सेना कार्रवाई की सराहना की है। हालांकि उन्होंने यह भी बोला है कि अमेरिका युद्ध में संघर्षविराम के लिये इजराइल तथा हमास पर लगातार दबाव डालने का काम कर रहा है। उन्होंने बोला कि बाइडन इस क्षेत्र के हालात पर लगातार निगाह रखे हुए हैं और इजराइल के समर्थन में अन्य राष्ट्रों को भी इकट्ठा करने के लिए अपने विदेश मंत्री को लगातार विभिन्न राष्ट्रों के दौरों पर भेज रहे हैं। उन्होंने बोला कि बाइडन ने साफ कह दिया है कि मेरा मानना है कि गाजा पट्टी में हो रही कार्रवाई चरम पर है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने बोला कि इस समय हालात यह हैं कि गाजा पट्टी की आधी से अधिक जनसंख्या राफा में आ गई है जो मिस्र से लगता एक शहर है जिसकी ज्यादातर सीमा प्रतिबंधित है और मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए मुख्य प्रवेश बिंदु है। उन्होंने बोला कि मिस्र ने चेतावनी दी है कि यहां कोई भी जमीनी कार्रवाई या सीमा पार बड़े पैमाने पर विस्थापन की घटना इजरायल के साथ उसकी 40 वर्ष पुरानी शांति संधि को कमजोर कर देगी। उन्होंने बोला कि ऐसा लगता है कि इजराइल को किसी संधि की चिंता नहीं है क्योंकि उसे बदला लेना है। उन्होंने बोला कि जबसे यह समाचार आई है कि हमास की कैद में जो इजराइली हैं उनमें से कई और को मार दिया गया है तबसे घरेलू स्तर पर भी इजराइल की गवर्नमेंट पर और तीव्र कार्रवाई करने का दबाव पड़ रहा है। उन्होंने बोला कि यदि अब तक के हालात पर गौर करें तो इजराइल की चार महीने से जारी हवाई और जमीनी हमलों में 27,000 से अधिक फलस्तीनी लोग मारे गए हैं। उन्होंने बोला कि इजराइल के हमलों ने अधिकतर लोगों को उनके घरों को छोड़ने के लिए विवश कर दिया और एक चौथाई जनसंख्या को भुखमरी की ओर धकेल दिया है।

