हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने का सपना देख रहे विदेशी छात्रों को ट्रंप प्रशासन ने दिया बड़ा झटका
Harvard University : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की विदेशी विद्यार्थियों को दाखिला देने की अर्हता रद्द कर दी है. ट्रंप प्रशासन का यह निर्णय हार्वर्ड विश्वविद्यालय के साथ ही उन विदेशी विद्यार्थियों के लिए भी बड़ा झटका है जो इस प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में पढ़ने का सपना देख रहे थे.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने आंतरिक सुरक्षा विभाग (डीएचएस) की सचिव क्रिस्टी नोएम द्वारा हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को भेजे गए पत्र के हवाले से यह समाचार दी है. न्यूयॉर्क टाइम्स की समाचार में बोला गया है कि यह घटनाक्रम, यूनिवर्सिटी पर राष्ट्रपति के एजेंडे के अनुरूप चलने के लिए दबाव डालने के प्रशासन के प्रयासों के अनुसार उठाया गया एक बड़ा कदम है.
नोएम ने पत्र में लिखा कि मैं आपको यह सूचित करने के लिए लिख रही हूं कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी और शैक्षणिक आदान-प्रदान के प्रवेश कार्यक्रम का प्रमाणन तुरन्त असर से रद्द कर दिया गया है.
ट्रंप प्रशासन का इल्जाम है कि हार्वर्ड में यहूदी विरोधी भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर काम किया जा रहा है. गवर्नमेंट का बोलना है कि विदेशी विद्यार्थियों को दाखिला देना एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं.
हार्वर्ड में अब विदेशी विद्यार्थियों को नहीं मिलेगा दाखिला, ट्रंप प्रशासन ने लगाई रोकसरकार का इल्जाम है कि हार्वर्ड में यहूदी विरोधी भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है. गवर्नमेंट का बोलना है कि विदेशी विद्यार्थियों को दाखिला देना एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं. हार्वर्ड को दी जाने वाली सरकारी फंडिंग में भी कटौती की गई है.
हार्वर्ड की स्थापना 1636 में हुई थी और यह दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक है. यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, हर वर्ष औसतन 500-800 भारतीय विद्यार्थी हार्वर्ड में शोध करते हैं.

