बिना आँकड़े देखे ही बयानबाजी कर देते हैं ट्रंप के मंत्री, जानें क्या है मामला…
अमेरिका ने हिंदुस्तान पर टैरिफ लगाते समय बार-बार एक ही बात का हवाला दिया कि हम रूस से ऑयल खरीदते हैं और उसे पैसे देते हैं। इन पैसों का प्रयोग रूस ने यूक्रेन के विरुद्ध लड़ाई में किया। ट्रंप के कुछ बड़बोले मंत्री तो इसे प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की लड़ाई बता रहे हैं, लेकिन इस तरह के खोखले बयान देने से पहले उन्हें आंकड़ों पर नजर दौड़ानी चाहिए। यदि ट्रंप और उनके मंत्रियों की नाराजगी इसी बात से है कि हिंदुस्तान ने रूस से ऑयल खरीदा तो जरा चीन और यूरोप के आंकड़े भी जरूर देखने चाहिए। इन आंकड़ों को देखने भर से ही पता चल जाता है कि अमेरिका की बातों में कोई दम नहीं है और केवल खोखले दावे करके हिंदुस्तान पर दबाव बनाने की प्रयास की जा रही है।

कई ग्लोबल फर्म ने इस बात के भी आंकड़े जारी कर दिए हैं कि आखिर रूसी ऑयल खरीदकर हिंदुस्तान को कितने पैसों की बचत हुई। पिछले दिनों ट्रंप ने बोला था कि हिंदुस्तान सस्ता ऑयल खरीदकर यूरोप सहित दूसरे राष्ट्रों को महंगी मूल्य पर बेचता है, लेकिन मुनाफे के आंकड़ों ने इन दावों की भी पोल खोल दी। ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों ने कहा है कि हिंदुस्तान को हर वर्ष डिस्काउंट दर पर रूस से ईंधन खरीदने पर महज 2.5 अरब $ (करीब 22 हजार करोड़ रुपये) की बचत हुई है। जाहिर है कि इस सौदे से हिंदुस्तान ने बहुत ज्यादा नहीं कमाया है, जैसा कि पहले दावा किया जा रहा था। ट्रंप और उनके अन्य मंत्रियों के दूसरे दावे भी इसी तरह खोखले निकल रहे।
रूस ने क्यों बेचा सस्ता तेल
यूक्रेन से युद्ध प्रारम्भ होने के बाद अमेरिका और नाटो ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए। तब रूस ने अपने ईंधन को डिस्काउंट दर पर बेचना प्रारम्भ कर दिया। दुनिया के सबसे बड़े ऑयल खरीदार भारत, चीन और यूरोप ने रूसी ऑयल खरीदा। इन तीनों ने रूस से कितना ऑयल खरीदा, इसका आंकड़ा फरवरी, 2022 से मार्च, 2025 यानी 3 वर्ष का देखें तो पता चलता है कि किसने सबसे ज्यादा खरीदारी।
भारत ने रूस से कितना ऑयल खरीदा
भारत के आंकड़े देखें तो यह जरूर सामने आता है कि 2022 के बाद से हमने रूस से ऑयल खरीद 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत से भी ज्यादा कर दिया। इस दौरान हिंदुस्तान ने 112.5 अरब यूरो (करीब 10 लाख करोड़ रुपये) का ऑयल रूस से खरीदा है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के अनुसार, ऑयल के अतिरिक्त हिंदुस्तान ने कोयला और गैस भी रूस से खरीदा और कुल खरीदारी करीब 206 अरब यूरो की रही। पिछले वित्तवर्ष में हिंदुस्तान ने 8.74 टन रूसी ऑयल खरीदा जो करीब 4.3 लाख करोड़ रुपये का पड़ा।
चीन ने रूस को कितने पैसे दिए
साल 2022 से 25 तक चीन ने कुल करीब 170 अरब यूरो (करीब 15 लाख करोड़ रुपये) का रूसी ऑयल खरीदा। सीआरईए की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने ऑयल के अतिरिक्त कोयला और गैस भी खरीदा और कुल धनराशि 235 अरब यूरो पहुंच गई। चीन का आयात रूस से तीन वर्षों में 50 प्रतिशत तक बढ़ गया। इस दौरान चीन की प्रतिदिन खरीद 24 लाख बैरल रोजाना तक पहुंच गई। जून, 2025 में चीन ने रूस से 47 प्रतिशत कच्चा ऑयल खरीदा, जो हिंदुस्तान से अधिक था।
यूरोप ने कितने पैसे का ईंधन खरीदा
वैसे तो यूरोप के हर राष्ट्र का अलग आंकड़ा नहीं है, लेकिन यूरोपीय संघ की कुल खरीद देखें तो वर्ष 2022 से 25 तक रूस से 314 अरब यूरो यानी करीब 27.63 लाख करोड़ रुपये का ईंधन खरीदा। यूरोपीय संघ ने यूक्रेन युद्ध के बाद भले ही अपनी निर्भरता रूस पर कम की है, लेकिन आज भी वह बड़ी मात्रा में ईंधन रूस से ही खरीद रहा है। विदेश मंत्री जयशंकर ने भी बोला था कि यूरोपीय संघ रूसी ऑयल और गैस का सबसे बड़ा खरीदार है। बावजूद इसके अमेरिका ने केवल हिंदुस्तान पर ही इल्जाम लगाते हुए टैरिफ ठोका है।

