टीटीपी के आतंकी अब पाकिस्तानी फौज पर ही नासूर बनकर टूटे
पड़ोसी राष्ट्र पाक ने आतंक की फैक्ट्री चलाने और उससे हिंदुस्तान को हानि पहुंचाने के गलत इरादे से तहरीक-ए-तालिबान पाक (TTP) के आतंकवादियों को न केवल पाला पोसा बल्कि उसे टेरर फंडिंग भी मौजूद कराई लेकिन अब वही गलती उस पर भारी पड़ रही है। टीटीपी के आतंकवादी अब पाकिस्तानी फौज पर ही नासूर बनकर टूट पड़े हैं। पाक में अफगानिस्तान की सीमा से सटे कबायली इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान पाक के आतंकवादियों ने फिर से गदर मचाना प्रारम्भ कर दिया है। इसके साथ ही टीटीपी आतंकवादी अब पेशावर, लाहौर के साथ-साथ राजधानी इस्लामाबाद जैसे प्रमुख शहरों को भी निशाना बना रहे हैं। इससे पाक के सुरक्षा बलों के लिए खतरा और चुनौती बड़ी हो गई है। महीने भर में टीटीपी के आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 106 जवानों को ढेर कर दिया है।
तहरीक-ए-तालिबान पाक (टीटीपी) आतंकी समूह और पाक के पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान के नेतृत्व में एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल के बीच अफगानिस्तान में तालिबान शासन की सुविधा के अनुसार काबुल में आयोजित वार्ता की विफलता के बाद से इस प्रतिबंधित संगठन ने पाक सेना को निशाना बनाना प्रारम्भ किया है और अब तक कई खतरनाक हमले किए हैं। इनमें आत्मघाती विस्फोटों से लेकर, आईईडी विस्फोट, सुरक्षा प्रतिष्ठानों, सेना काफिलों और चौकियों पर लक्षित हमले और सुरक्षा कर्मियों की टारगेट किलिंग शामिल है।
एक ताजा रिपोर्ट से पता चला है कि पाक में टीटीपी और अन्य आतंकवादी समूहों द्वारा 200 से अधिक आतंकवादी हमले किए गए हैं। एक थिंक टैंक ने एक रिपोर्ट में कहा, “पाकिस्तान में अगस्त में आतंकी हमलों में भारी वृद्धि देखी गई, राष्ट्र भर में 99 घटनाएं दर्ज की गईं, जुलाई की तुलना में आतंकी हमलों में 83 फीसदी की वृद्धि हुई, जिसके दौरान आतंकियों ने 54 हमले किए हैं।” ताजा हमलों से पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल मुनीर की नींद हराम हो गई है।
यह पाक के लिए सबसे बुरा दौर है।
जब से अफगानिस्तान में तालिबान का शासन हुआ है, तब पाक की सेना के बुरे दिन प्रारम्भ हो गए हैं। टीटीपी अब रोज पाक सेना को ललकार रहा है। इसका असर यह हुआ कि पाक गवर्नमेंट ने पिछले दिनों 11 लाख अफगानी शरणार्थियों को वापस भेजने का निर्णय किया है। जनरल मुनीर इस बात से भी भतभीत हैं कि जिन आतंकवादियों को पाक ने ट्रेंड किया था, वे अब उन्हीं के लिए भस्मासुर बन रहे हैं।
टीटीपी के दावों के अनुसार उसने केवल सितंबर में ही पाकिस्तानी सेना के 106 जवानों को मार डाला है। इसके अतिरिक्त अब तक भिन्न-भिन्न हमलों में 185 पाकिस्तानी जवान मारे गए हैं और 43 पुलिसकर्मी भी ढेर हुए हैं। टीटीपी के दावों में बोला गया है कि खुफिया एजेंसी के 18 अधिकारी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के 46 ऑफिसरों पर हमले हुए हैं। टीटीपी ने पाकिस्तानी सेना पर रॉकेट लॉन्चर से लेकर गोला-बारूद से भी धावा कहा है।
रक्षा जानकार बताते हैं कि टीटीपी पाक को एक शरिया नेशन बनाना चाहता है। यही पाकिस्तानी फौज और आईएसआई के लिए सबसे बड़ा सरदर्द बन गया है। सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अब पाक गवर्नमेंट भारतीय फौज की तरह ही बालाकोट हड़ताल जैसे हमलों को अंजाम देकर पाक अफगानिस्तान सीमा पर आतंकवादियों के ठिकानों को नेस्तानाबूद करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

