UN में तुर्की की टूटी चुप्पी, एर्दोगन ने कश्मीर पर उगला जहर, भारत को भी लपेटा
India-Pakistan Conflict: पाकिस्तान के मित्र राष्ट्र तुर्किए ने संयुक्त देश महासभा (UNGA) में एक बार फिर कश्मीर राग अलापा है। राष्ट्रपति रेसेप तैयाप एर्दोगन ने बोला कि वह भारत-पाकिस्तान युद्धविराम से खुश हैं। मंगलवार 23 सितंबर 2025 को उन्होंने संयुक्त देश महासभा के 80वें सत्र के लिए इकट्ठा हुए सभी विश्व नेताओं के साथ अपने संबोधन में भारत-पाकिस्तान से कश्मीर टकराव को सुलझाने के लिए कहा।

एर्दोगन की कश्मीर पर टिप्पणी
एर्दोगन ने कहा,’ हम कुछ महीने पहले अप्रैल में पाक और हिंदुस्तान के बीच भड़के तनाव और उसके बाद दोनों राष्ट्रों के बीच हुए सैन्य संघर्ष के बाद हुए युद्धविराम से खुश हैं। कश्मीर के मामले को संयुक्त देश के प्रस्तावों के आधार पर वार्ता के जरिए हल किया जाना चाहिए। यही कश्मीर में हमारे बहनों और भाइयों के सर्वोत्तम भलाई में है। हम ऐसी आशा करते हैं।‘
ऐसा पहली बार नहीं है जब एर्दोगन ने संयुक्त देश के मंच पर कश्मीर मामला उठाया है। उनका यह बयान पिछले वर्ष संयुक्त देश महासभा में इस मुद्दे पर खामोशी के एक वर्ष बाद आया है। पिछले वर्ष BRICS में शामिल होने की ख़्वाहिश से तुर्किए ने कश्मीर मामले पर कुछ नहीं कहा क्योंकि हिंदुस्तान BRICS का अभिन्न अंग है और मजबूत पार्टनर राष्ट्र है।
मतलब निकलते ही खोला मुंह में लगा ताला
तुर्की ने अपना मतलब निकलते ही वापस पुराना रुख अपनाना प्रारम्भ कर दिया है। तुर्की के राष्ट्रपति ने इस वर्ष की आरंभ में अपनी पाक यात्रा के दौरान वार्ता और संयुक्त देश प्रस्ताव के माध्यम से कश्मीर टकराव को सुलझाने का आह्वान किया था। उस दौरान एर्दोगन ने बोला था,’ कश्मीर मामले का निवारण संयुक्त देश प्रस्ताव के मुताबिक वार्ता और कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। हमारा राज्य और हमारा देश पहले की तरह आज भी हमारे कश्मीरी भाइयों के साथ एकजुटता में खड़ा है।‘
भारत ने जताई आपत्ति
भारत ने तुर्की की इस टिप्पणी पर विरोध जताई है। इसको लेकर विदेश मंत्रालय की ओर से एक ऑफीशियल बयान जारी किया गया है और एर्दोगन की टिप्पणी को खारिज किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,’ जम्मू और कश्मीर हिंदुस्तान का अभिन्न अंग है। किसी अन्य राष्ट्र को इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। किसी अन्य राष्ट्र के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने के बदले यह उचित होता कि हिंदुस्तान के विरुद्ध सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल करने की पाक की नीति, जो जम्मू और कश्मीर के लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है पर प्रश्न उठाया जाता।‘

