अमेरिकी कोर्ट ने भारतीय छात्र को निर्वासित नहीं करने का दिया आदेश
US news in hindi : अमेरिका की एक संघीय न्यायालय ने आव्रजन ऑफिसरों को हिरासत में लिए गए उस भारतीय विद्यार्थी को निर्वासित नहीं करने का आदेश दिया है जिस पर हमास का एक्टिव प्रचार करने का इल्जाम है.

वर्जीनिया के अलेक्जेंड्रिया में अमेरिकी जिला न्यायाधीश पैट्रिशिया टोलिवर जाइल्स ने आदेश दिया कि बदर खान सूरी को तब तक अमेरिका से नहीं निकाला जाएगा जब तक कि न्यायालय इसके उल्टा आदेश जारी न कर दे. सूरी के वकील ने पहले दाखिल एक अदालती डॉक्यूमेंट्स में लिखा था कि सूरी को सोशल मीडिया पर किए गए उसके पोस्ट और उसकी पत्नी की फिलिस्तीनी पहचान के कारण निशाना बनाया गया.
हिरासत में लिया गया भारतीय बदर खान सूरी वाशिंगटन स्थित ‘जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी’ के ‘एडमंड ए वाल्श विद्यालय ऑफ फॉरेन सर्विस’ में ‘अलवलीद बिन तलाल सेंटर फॉर मुस्लिम-क्रिस्चियन अंडरस्टैंडिंग’ में शोधार्थी है.
आंतरिक सुरक्षा विभाग के एक वरिष्ठ प्रवक्ता के अनुसार, सूरी जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी का विदेशी विद्यार्थी है जो हमास का एक्टिव रूप से प्रचार कर रहा था और सोशल मीडिया पर यहूदी विरोधी भावना को बढ़ावा दे रहा था. सूरी के उस ज्ञात या संदिग्ध आतंकी से घनिष्ठ संबंध हैं, जो हमास का वरिष्ठ सलाहकार है. विदेश मंत्री ने 15 मार्च, 2025 को एक फैसला जारी किया कि सूरी की अमेरिका में गतिविधियों और उपस्थिति के कारण उसे निर्वासित किया जा सकता है.
सूरी के वकील हसन अहमद ने 18 मार्च को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी. याचिका के अनुसार, आंतरिक सुरक्षा विभाग ने 17 मार्च को सूरी को अरैस्ट किया था. सूरी के वकील ने तर्क दिया कि संघीय ऑफिसरों ने इस बात का कोई सबूत नहीं दिया है कि उसने कोई क्राइम किया है और उसे हिरासत में लेना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उचित प्रक्रिया का पालन किए जाने के उसके अधिकारों का उल्लंघन है. सूरी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उसके पास अमेरिका में रहने के लिए अधिकृत वीजा है और उसकी पत्नी एक अमेरिकी नागरिक है.

