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NASA ने किसको दी बड़ी चुनौती, पूरी करने पर मिलेंगे करोड़ों…

Human Waste in Space: नासा के अपोलो मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा छोड़े गए अपशिष्ट(Human Waste)के 96 बैग छोड़े जाने के 50 से भी अधिक वर्षों बाद नासा उन सामानों को ठिकाने लगाने के नए उपायों के बारे में खोज रही है. इसके लिए एजेंसी ने लूना रिसाइकल चैलेंज शुरु किया है. इस चैलेंज में उन्हें 25 करोड़ा का पुरस्कार दिया जाएगा जो ऐसी तकनीक बना सकें जिससे अंतरिक्ष में उपस्थित कचरा जैसे मल, मूत्र या उल्टी को ऊर्जा या खाद जैसी चीजों में बदला जा सके.

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चंद्रमा पर कचरा
1979 से 1972 के दौरान अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों ने कुल 6 बार चंद्रमा पर सफल लैंडिंग की. इस मिशन के दौरान वह धरती पर लौटते समय चट्टानों के नमूने लाए थे. लेकिन इस मॉड्यूल में स्थान कम होने के कारण एस्ट्रोनॉट्स ने ऐसी चीजें जो महत्वपूर्ण नहीं थी, चंद्रमा की सतह पर ही छोड़ दिया और जाने से पहले कचरे को बैग में रखा और वहीं फेंक दिया. अभी भी चंद्रमा पर Human Waste से भरे 96 बैग पड़े हुए हैं. पहले इसे अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा फेंके गए बेकार सामानों में गिना जाता था. लेकिन अब इन्हें संसाधन के प्रबंधन के लिए चुनौती और अवसर दोनों बताया जा रहा है.

नासा का अर्टेमिस मिशन
नासा का आने वाले मिशन चंद्रमा पर इंसानों की स्थीय मौजूदगी बनाने के लक्ष्य को पूरा करने की ओर कदम बढ़ा रहा है इसलिए लंबे समय तक चलने वाले Waste Management को पहली अहमियत दी गई है. अंतरिक्ष के सभी लंबे मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है कि संसाधनों को संभाल कर रखा जाए जिससे इसका दोबारा इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि कचरे को धरती पर लेकर लौटना संभव नहीं हो सकता इसलिए NASA इस पर बल दे रहा कि इस स्पेस में ही कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है.

नासा का बयान
जैसा कि हम आने वाले भविष्य में अंतरिक्ष के मिशनों की तरफ देखते हैं तो हमें यह तय करना होगा कि अंतरिक्ष में जमा कचरे को कैसे कम किया जा सकता है. साथ ही अंतरिक्ष के वातावरण में कचरे को कैसे संग्रहित कर दोबारा यूज किया जा सकता है जिससे कम से कम या फिर जरा भी कचरे को धरती पर भेजने की आवश्यकता ना पड़े.

लूना रिसाइकल चैलेंज
लूना रिसाइकल चैलेंज नासा की एक बड़ी पहल का हिस्सा है जिसका लक्ष्य अंतरिक्ष में खोजबीन करते रहने के लिए नए-नए उपायों को खोजना है. यह एक खुली चुनौती है जिसे वैज्ञानिक, इंजीनियर और पूरे विश्व नए विचार रखने वाले लोगों ने शुरु किया है. इसमें ऐसी चुनौतियों को बनाने के लिए बोला गया है जो अपोलो मिशन के पुराने कचरे को संभाल सके और भविष्य के मिशनों के लिए पैदा होने वाले कचरे का निपटारा हो सके.

चुनौती के प्राथमिक लक्ष्य

  • कचरे को पानी, पोषक तत्व, मिट्टी या ऊर्जा को बेहतर बनाने वाली चीजों जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों में बदलना.
  • बंद जगहों में कचरे से जुड़े पर्यावरण और जैविक खतरों को कम करना जिससे भविष्य के मिशन में सरलता हो सके.
  • इसके अतिरिक्त ऐसे सिस्टम बनाना जो कम एनर्जी इस्तेमाल करें, छोटी हो और चंद्रमा को जीरो ग्रैविटी वाले माहौल में काम कर सके.
  • खुद से चलने में सक्षम अंतरिक्ष आवास के लिए लूप प्रणाली बनाना जहां चीजों को रिसाइकल करके दोबारे बनाया जा सके.

मिलेगा 25 करोड़ का इनाम
हालांकि 31 मार्च 2025 को आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख थी. अब दिए गए इस चैलेंज का जजों द्वादा मूल्यांकन जारी है. इसके लिए जजों के एक पैनल का गठन किया गया है जो पूरे विश्व से आए आवेदनों की जांच कर रहा है जिससे सबसे बेहतरीन आइडिया या तकनीक को चुना जा सके. सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीम को NASA करीब 25 करोड़ रूपए देगा और भविष्य में चंद्रमा मिशन के लिए उनके साथ योगदान करने या उनकी तकनीक का इस्तेमाल करने की भी आसार होगी.

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