क्यों कनाडा और भारत का तनाव ले रहा अमेरिका की परीक्षा…
कनाडा और हिंदुस्तान में खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की मर्डर को लेकर पैदा हुए तनाव का असर कई राष्ट्रों पर दिख रहा है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे राष्ट्रों ने इस मसले पर चिंता जाहिर की है, जहां सिखों की बड़ी जनसंख्या रहती है। इस बीच हिंदुस्तान को लेकर नरम रुख अपनाने के आरोपों का उत्तर देते हुए अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने बोला कि हम दिल्ली के संपर्क में हैं। उन्होंने बोला कि किसी भी राष्ट्र को इस तरह के मामलों में विशेष छूट नहीं है। अमेरिका अपने मूल सिद्धांतों पर ही अडिग है।

यही नहीं जेक सुलिवन ने इस दौरान हिंदुस्तान की तुलना रूस और चीन से किए जाने पर विरोध भी जताई। उन्होंने बोला कि हिंदुस्तान रूस की तरह नहीं है और वह चीन जैसा भी नहीं है। वाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए सुलिवन ने बोला कि कनाडा के आरोपों को लेकर अमेरिका गंभीर है। हम जांच का समर्थन करते हैं और मानते हैं कि दोषियों को सजा दी जानी चाहिए। क्या हिंदुस्तान से इस मुद्दे पर बाइडेन ने पीएम नरेंद्र मोदी से बात की थी? इस पर सुलिवन ने बोला कि ऐसा नहीं हुआ है। हां, दोनों राष्ट्रों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता जरूर हुई है।
उन्होंने कहा, ‘यह हमारे लिए चिंता की बात है। यह ऐसी चीज है, जिसे हमें गंभीरता से लेना चाहिए। यह ऐसा है, जिस पर काम करने की आवश्यकता है और हम आगे बढ़ेंगे। इस तरह के मामलों में किसी भी राष्ट्र को स्पेशल छूट नहीं मिल सकती। हम अपने सिद्धांतों के साथ हैं। इस मुद्दे में हम कनाडा से बात करेंगे, जिसने अपनी कानूनी कार्रवाई प्रारम्भ की है और कूटनीतिक प्रक्रिया भी चल रही है।’ रूस की तरह हिंदुस्तान को लेकर रुख न रखने पर भी अमेरिकी अधिकारी ने बोला कि रूस से तुलना करना गलत है। दोनों राष्ट्रों में काफी अंतर है। यहां तक कि चीन और हिंदुस्तान के मुद्दे भी एक नजर से नहीं देखे जा सकते।
क्यों कनाडा और हिंदुस्तान का तनाव ले रहा अमेरिका की परीक्षा
जानकारों का बोलना है कि हिंदुस्तान और कनाडा में पैदा हुए तनाव अमेरिका के लिए भी परीक्षा की घड़ी है। इसकी वजह यह है कि एक तरफ हिंदुस्तान की सहायता से एशिया में वह चीन को काउंटर करना चाहता है तो वहीं रूस और यूक्रेन के मसले पर भी हिंदुस्तान का समर्थन अहम है। ऐसे में यदि कनाडा के मसले पर वह हिंदुस्तान के विरुद्ध तो फिर कठिन होगी। यही वजह है कि अमेरिका इस मुद्दे में सतर्कता के साथ काम कर रहा है। अब तक उसने टकराव से बचने जैसी बातें ही कही हैं, लेकिन किसी एक राष्ट्र का खुलकर पक्ष लेने से बचा है।

