अंतर्राष्ट्रीय

Sheikh Hasina को फांसी देने पर क्यों आतुर थे यूनुस…

पाक और अमेरिका की लेफ्ट लॉबी के चक्कर में बांग्लादेश बुरी तरह से फंस चुका है. दूसरी तरफ शेख हसीना हिंदुस्तान में बैठकर दहाड़ मार रही हैं. अब अमेरिका ने यूक्रेन की तरह बांग्लादेश में भी पाला बदल लिया है. यूनुस गवर्नमेंट पर प्रश्न खड़ा करते हुए अल्पसंख्यकों पर हमलों और उत्पीड़न पर चिंता जताने के साथ अपनी अहमियत भी बताई है. बांग्लादेश में यूनुस गवर्नमेंट को अपने आखिरी दिन दिखाई पड़ने लगे हैं. जिस अमेरिका के दम पर उन्होंने शेख हसीना का तख्तापलट किया. अब वो यूनुस नहीं बल्कि हिंदुस्तान के साथ है. दूसरी तरफ यूनुस गवर्नमेंट अब शेख हसीना को मृत्यु की सजा देने की प्लानिंग कर रही है. शेख हसीना पर दो मुकदमा दर्ज हैं. जिसमें एक में उन्हें या जीवन भर जेल की सजा सुनाई जा सकती हैं. वहीं शेख हसीना भी हिंदुस्तान में बैठकर अपने कार्यकर्ताओं में जोश भर रही हैं और वापसी की आशा जता रही हैं. अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस की डॉयरेक्टर ने कह दिया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले ट्रंप के लिए चिंता का अहम विषय हैं.

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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर तुलसी की टिप्पणी

तुलसी गबार्ड ने एक भारतीय टेलीविजन चैनल पर बोला था कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध अत्याचार इस्लामवादी खिलाफत के साथ शासन करने की विचारधारा और उद्देश्य में निहित है. उन्होंने यह भी बोला कि इस्लामी आतंकवाद का मुद्दा चिंता का मुख्य विषय बना हुआ है. तुलसी गैबार्ड ने यह भी बोला कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और बांग्लादेश की अंतरिम गवर्नमेंट के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के बीच वार्ता प्रारम्भ हो रही है, लेकिन इस्लामिक आतंकवाद का मामला अब भी अमेरिका के लिए प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है.

गीता पर हाथ रखकर ली थी शपथ

43 वर्षीय गबार्ड का जन्म अमेरिकी क्षेत्र अमेरिकी समोआ में हुआ था, उनका पालन-पोषण हवाई में हुआ और उन्होंने अपने बचपन का एक वर्ष फिलीपींस में बिताया. बाद में वह हवाई का अगुवाई करते हुए कांग्रेस पार्टी के लिए चुनी गईं. सदन की पहली हिंदू सदस्य के रूप में गबार्ड ने हिंदू भक्ति कृति भगवद गीता पर हाथ रखकर पद की शपथ ली. वह कांग्रेस पार्टी के लिए चुनी गई पहली अमेरिकी सामोन भी थीं. अपने चार सदन कार्यकाल के दौरान वह अपनी पार्टी के नेतृत्व के विरुद्ध बोलने के लिए जानी गईं. उन्होंने मध्य पूर्व में जिहादी समूहों को अमेरिकी गवर्नमेंट द्वारा वित्तपोषित किए जाने के खिलाफ़ बार-बार आवाज़ उठाई है और 2016 में स्टॉप आर्मिंग टेररिस्ट एक्ट पेश किया है. विकीलीक्स के दस्तावेज़ों का हवाला देते हुएउन्होंने सीरिया में अपनी गवर्नमेंट की शासन-परिवर्तन नीति की आलोचना की. बांग्लादेश पर गैबार्ड की हालिया टिप्पणियों ने राष्ट्र में आक्रोश पैदा कर दिया है और इसे अत्यधिक भड़काऊ बताया जा रहा है. यह देखते हुए कि वह आमतौर पर जिन विषयों पर चर्चा करती हैं, उनके बारे में कुछ हद तक अच्छी जानकारी रखती हैं.

अमेरिका को देनी पड़ गई सफाई

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध अत्याचार को लेकर अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गैबार्ड के बयान से उठे टकराव के बीच व्हाइट हाउस ने बोला कि अमेरिका बांग्लादेश की अंतरिम गवर्नमेंट द्वारा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का स्वागत करता है. अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने बोला कि अमेरिका अल्पसंख्यकों के विरुद्ध किसी भी अत्याचार या असहिष्णुता की निंदा करता है. उन्होंने बोला कि हम सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश की अंतरिम गवर्नमेंट द्वारा उठाए गए कदमों का स्वागत करते हैं. हम यही देख रहे हैं, यही हमारी अपेक्षा है और यह जारी रहेगा. उन्होंने बोला कि हम अल्पसंख्यक समुदायों के विरुद्ध किसी भी तरह की अत्याचार या असहिष्णुता की निंदा करते हैं और बांग्लादेश की अंतरिम गवर्नमेंट द्वारा सभी के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों का स्वागत करते हैं. यही हमारी आशा है और यही हमारी अहमियत बनी रहेगी.

उनका यह इल्जाम कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न, मर्डर और दुर्व्यवहार लंबे समय से चले आ रहे मामले हैं और राष्ट्र में “इस्लामिक आतंकियों का खतरा” एक इस्लामी खिलाफत स्थापित करने की “विचारधारा और उद्देश्य” में निहित है, पूरी तरह से निराधार है. इसके अलावा, उन्होंने अपने दावे का समर्थन करने के लिए कोई सबूत या तथ्य नहीं दिए – उनके लिए यह एक असामान्य दृष्टिकोण है. बांग्लादेश से परिचित कोई भी आदमी यह दावा नहीं करेगा कि राष्ट्र में सांप्रदायिकता नहीं है. हालांकि, बांग्लादेश सबसे कम सांप्रदायिकता वाले राष्ट्रों में से एक है, क्योंकि यहां अंग्रेजों ने सांप्रदायिक तनाव को भड़काने के लिए अपनी फूट डालो और राज करो की रणनीति को अपनाया था. इसके बावजूद, 5 अगस्त, 2024 को अवामी लीग (एएल) गवर्नमेंट के पतन के बाद से, भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया के कुछ हिस्सों ने दावा किया है कि अल्पसंख्यकों – विशेष रूप से हिंदुओं – को बांग्लादेश में “व्यवस्थित रूप से” निशाना बनाया गया है. इनमें से कई रिपोर्टें भ्रामक, विकृत या पूरी तरह से झूठी थीं.

बांग्लादेश ने किया पलटवार

बांग्लादेश गवर्नमेंट ने टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की और उन्हें राष्ट्र की प्रतिष्ठा के लिए भ्रामक और नुकसानदायक बताया. मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यालय ने एक बयान में बोला कि गबार्ड की टिप्पणियों ने पूरे राष्ट्र को गलत ढंग से चित्रित किया है. बयान में बोला गया यह बयान भ्रामक है और बांग्लादेश की छवि को हानि पहुंचाता है. हमारे राष्ट्र में समावेशी और शांतिपूर्ण इस्लाम का लंबा इतिहास रहा है और इसने चरमपंथ और आतंकवाद से लड़ने में जरूरी प्रगति की है. बयान में आगे बोला गया है कि बांग्लादेश को चरमपंथ से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसने इस मामले को हल करने के लिए कानून प्रवर्तन, सामाजिक सुधारों और आतंकवाद विरोधी प्रयासों का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका सहित तरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम किया है.

बाइडेन जा चुके अब यूनुस भी जाएंगे?

पहले तो मोहम्मद युनूस ने सेना के सहारे तख्तापलट किया और राष्ट्र को चरमपंथियों और कट्टरपंथियों के हाथों सौंप दिया. जिसमें राष्ट्र में तानाशाही और बवाल के साथ ही आईएसआई के इशारे पर दूसरा पाक बनने की ओर बढ़ने लगा. अब यूनुस गवर्नमेंट शेख हसीना को मृत्यु की सजा देने की तैयारी कर रही है. शेख हसीना पर जुलाई और अगस्त में नरसंहार को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया. इन्सानियत के विरुद्ध क्राइम और मर्डर जैसे गंभीर मामलों की जांच जारी हैं. जिसमें मृत्युदंड, आजीवान जेल या सख्त सजा का प्रावधान है. भले ही युनूस गवर्नमेंट शेख हसीना को गुनेहगार भी साबित कर दे. लेकिन सजा देना इतना आसान नहीं है. हो सकता है शेख हसीना का गुनेहगार साबित होना यूनुस के लिए राष्ट्र में माहौल बनाने के काम आ सकता है. लेकिन तख्तापलट के बाद यूनुस गवर्नमेंट जिन कट्टरपंथियों के सहारे माहौल बना रही थी. बांग्लादेश को इस्लामिक राज्य बनाने का सपना देख रही थी. अब उस पर पानी फिरने वाला है. यूनुस ने बाइडेन प्रशासन के योगदान से गवर्नमेंट बनाई थी. लेकिन अब बाइडेन जा चुके हैं. ट्रंप आ चुके हैं. चुनाव के दौरान राष्ट्र में अल्पसंख्यकों का मामला उठाने वाले ट्रंप अब राष्ट्रपति हैं. बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है उसे मोदी के भरोसे छोड़ दिया है.

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