सुरंग हादसे में 8 मजदूर फंसे, 80 साल की बूढ़ी मां की तरसी आँखें

80 वर्ष की मां की आंखों में अब भी आस जिंदा है
गुमला के जगता खेस की 80 वर्ष की मां, मंगरी देवी, अपने बेटे के प्रतीक्षा में हर पल मृत्यु से लड़ रही हैं। आंखों के आंसू सूख चुके हैं, लेकिन दिल का विश्वास जिंदा है—मेरा बेटा जरूर आएगा!
खाना-पीना लगभग छोड़ दिया है, लेकिन आशा नहीं छोड़ी। कभी-कभी थोड़ा बहुत खा लेती हैं, बस इस आस में कि जब बेटा लौटे, तो उसे देख सकें। उनका मन बार-बार बस यही प्रश्न कर रहा है—”मेरा लाल कब आएगा?”
“डर भी है, कहीं कुछ हो न गया हो, लेकिन भगवान पर भरोसा है… मेरा बेटा जिंदा लौटेगा!”
घर में पसरा सन्नाटा, परिवार के दिलों में खौफ
जगता खेस के बड़े भाई सीताराम उरांव बताते हैं कि हम छह भाई-बहनों में से जगता सबसे छोटा है। पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, भाई-बहनों की विवाह हो चुकी है, बस जगता की विवाह बाकी थी। दो स्थान रिश्ता भी देखा था, लेकिन विवाह नहीं हो पाई।
रोजगार की तलाश ने धकेल दिया मृत्यु के मुंह में!
गुमला में रोजगार की मार ने जगता को विवश किया कि वह जून में तेलंगाना चला जाए। पहले भी हिमाचल और हैदराबाद में काम कर चुका था। घर बनाने के लिए जीजा जी के साथ मिलकर जमीन भी खरीदी थी, लेकिन अब… 1 सप्ताह से सुरंग में फंसा है, न कोई खबर, न कोई राहत!
पूरा परिवार भगवान से प्रार्थना कर रहा है, एक ही दुआ— बस जगता सही-सलामत लौट आए! लेकिन डर, बेचैनी, अनजान खौफ— ये सब हर पल बढ़ता जा रहा है। रातों की नींद उड़ गई है, भूख-प्यास गायब है, घर में सन्नाटा पसरा हुआ है।

