झारखण्ड

सुरंग हादसे में 8 मजदूर फंसे, 80 साल की बूढ़ी मां की तरसी आँखें

 तेलंगाना सुरंग दुर्घटना अपडेट: तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले में 22 फरवरी, शनिवार को हुए भयावह हादसे ने कई परिवारों की सांसें रोक दी हैं! निर्माणाधीन सुरंग (श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल टनल प्रोजेक्ट) का एक हिस्सा ढह गया, और 8 मजदूर जीवन और मृत्यु की जंग लड़ रहे हैं कीचड़, पानी और मलबे के बीच फंसे इन श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जोरों पर है, लेकिन हर बीतते पल के साथ घरवालों की बेचैनी बढ़ती जा रही हैझारखंड के गुमला जिले के चार मजदूर भी इसी सुरंग में फंसे हैं— संतोष साहू, अनुज साहू, संदीप साहू और जगता खेस इन्हें निकालने के लिए अत्याधुनिक मशीनों और हाई-टेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है एनडीआरएफ, सेना, एसडीआरएफ, नौसेना, रैट माइनर, मैरीन कमांडो (मारकोस) और इसरो तक इस ऑपरेशन में लगे हुए हैं इसरो को 8 पॉइंट्स का पता चल चुका है, जहां श्रमिकों के होने की आसार है लेकिन अब तक कोई कन्फर्म समाचार नहीं!

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80 वर्ष की मां की आंखों में अब भी आस जिंदा है
गुमला के जगता खेस की 80 वर्ष की मां, मंगरी देवी, अपने बेटे के प्रतीक्षा में हर पल मृत्यु से लड़ रही हैं आंखों के आंसू सूख चुके हैं, लेकिन दिल का विश्वास जिंदा है—मेरा बेटा जरूर आएगा!

खाना-पीना लगभग छोड़ दिया है, लेकिन आशा नहीं छोड़ी कभी-कभी थोड़ा बहुत खा लेती हैं, बस इस आस में कि जब बेटा लौटे, तो उसे देख सकें उनका मन बार-बार बस यही प्रश्न कर रहा है—”मेरा लाल कब आएगा?”

“डर भी है, कहीं कुछ हो न गया हो, लेकिन भगवान पर भरोसा है… मेरा बेटा जिंदा लौटेगा!”

घर में पसरा सन्नाटा, परिवार के दिलों में खौफ
जगता खेस के बड़े भाई सीताराम उरांव बताते हैं कि हम छह भाई-बहनों में से जगता सबसे छोटा है पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, भाई-बहनों की विवाह हो चुकी है, बस जगता की विवाह बाकी थी दो स्थान रिश्ता भी देखा था, लेकिन विवाह नहीं हो पाई

रोजगार की तलाश ने धकेल दिया मृत्यु के मुंह में!
गुमला में रोजगार की मार ने जगता को विवश किया कि वह जून में तेलंगाना चला जाए पहले भी हिमाचल और हैदराबाद में काम कर चुका था घर बनाने के लिए जीजा जी के साथ मिलकर जमीन भी खरीदी थी, लेकिन अब… 1 सप्ताह से सुरंग में फंसा है, न कोई खबर, न कोई राहत!

पूरा परिवार भगवान से प्रार्थना कर रहा है, एक ही दुआ— बस जगता सही-सलामत लौट आए! लेकिन डर, बेचैनी, अनजान खौफ— ये सब हर पल बढ़ता जा रहा है रातों की नींद उड़ गई है, भूख-प्यास गायब है, घर में सन्नाटा पसरा हुआ है

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