झारखण्ड

Jharkhand: हेमंत सोरेन मामले में ईडी के फैसले पर सामने आई BJP की प्रतिक्रिया

झारखंड उच्च न्यायालय ने भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मुद्दे में सीएम और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) प्रमुख हेमंत सोरेन को जमानत दे दी. उच्च न्यायालय के इस निर्णय को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है. प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उच्च न्यायालय के निर्णय को चुनौती देने पर बीजेपी नेता प्रतुल शाह देव ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने बोला कि यदि किसी आरोपी को जमानत दी जाती है तो एजेंसी को हाई कोर्ट में जाने का अधिकार है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ने किस आधार पर यह कदम उठाया, इसकी पुष्टि नहीं हुई है.

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झारखंड में बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा, “अगर किसी आरोपी को जमानत दी जाती है तो एजेंसी को हाई कोर्ट में जाने का पूरा अधिकार है. प्रवर्तन निदेशालय किस आधार पर यह कदम उठाया, इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है. हालांकि, कोई भी न्यायालय में अपील करने जा सकता है. प्रथम दृष्टया प्रवर्तन निदेशालय को ऐसा लगता है कि झारखंड उच्च न्यायालय के जजों ने इस मुद्दे के कुछ हिस्सों को नजरअंदाज कर दिया है. दिल्ली के आवास से बरामत किए गए 36 लाख रुपये नकद को लेकर हेमंत सोरेन द्वारा दिए गए सफाई निराधार हैं. जहां तक अदालतों का प्रश्न है, यह एक तकनीकी और कानूनी मुद्दा है, लेकिन जनता की न्यायालय में हेमंत सोरेन को पहले ही जमीन हड़पने के मुद्दे में गुनेहगार ठहराया गया है.

बता दें कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष सोरेन ने इस मुद्दे में 31 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी से कुछ समय पहले ही सीएम पद से त्याग-पत्र दे दिया था. उच्च न्यायालय ने 28 जून को सोरेन को जमानत दी थी. उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद सोरेन ने 4 जुलाई को फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय के वकील ने दलील दी थी कि यदि सोरेन को जमानत पर रिहा किया गया तो वह इसी तरह का क्राइम कर सकते हैं और उन्होंने एससी/एसटी पुलिस पुलिस स्टेशन में प्रवर्तन निदेशालय ऑफिसरों के विरुद्ध दर्ज मामलों का हवाला दिया था.

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