हेमंत के CM रहते भ्रष्टाचार के उजागर हुए कई मामले
बिहार से अलग होकर साल 2000 में बने झारखंड राज्य के ताजा सियासी घटनाक्रमों ने राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है। इण्डिया ब्लाक में शामिल पार्टियां इससे उत्साहित हैं। विपक्ष में बैठी बीजेपी और आजसू पार्टी के लिए भी सत्ताधारी खेमे में हुए नेतृत्व बदलाव ने संजीवनी का काम किया है। संजीवनी इसलिए कि जमीन घोटाले में पांच महीने पहले अरैस्ट पूर्व सीएम हेमंत सोरेन ने बेल पर कारावास से रिहा होते ही चंपाई सोरेन को सीएम पद छोड़ने को विवश कर दिया। स्वयं मुख्यमंत्री बनने का हेमंत ने दावा भी पेश कर दिया है। विपक्षी एनडीए ने हेमंत सोरेन गवर्नमेंट के करप्शन को ही लोकसभा चुनाव में मामला बनाया था। चंपाई सोरेन के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद एनडीए का यह मामला कुंद पड़ता जा रहा था। हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने पर विपक्ष फिर उनकी गवर्नमेंट पर आक्रामक होगा। चार-पांच महीने बाद ही झारखंड में विधानसभा चुनाव होना है।

वर्ष 2019 में जेएमएम, कांग्रेस पार्टी और आरजेडी ने बिहार की तर्ज पर महागठबंधन बना कर चुनाव लड़ा था। तब महागठबंधन ने बीजेपी को सूबे की सत्ता से बेदखल कर दिया था। महागठबंधन में सर्वाधिक सीटें जीतने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गवर्नमेंट बनी। तीन वर्ष बाद ही हेमंत सोरेन गवर्नमेंट के करप्शन के मुद्दे खुलासा होने लगे। बीजेपी की गवर्नमेंट में हुए मनरेगा घोटाले की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम जब झारखंड आई तो आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों से छापे में 19 करोड़ कैश बरामद हुए। पूजा फिलवक्त कारावास में हैं। जांच आगे बढ़ी तो खनन घोटाले के मुद्दे खुलासा हुए। प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि हजार करोड़ रुपए से अधिक का खनन भ्रष्टाचार हुआ। झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में गैरकानूनी ढंग से पहाड़ों को काट कर बेच दिया गया। जांच आगे बढ़ी तो सेना की जमीन बेच दिए जाने का मुद्दा सामने आया। एक और आईएएस छवि रंजन को प्रवर्तन निदेशालय ने इस मुद्दे में अरैस्ट किया। इसकी जांच के क्रम में ही जमीन घोटाले के तार तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े पाए गए। आठ एकड़ से अधिक जमीन पर गैरकानूनी कब्जे का इल्जाम लगा कर प्रवर्तन निदेशालय ने हेमंत सोरेन को अरैस्ट कर लिया। जांच के दौरान ही प्रवर्तन निदेशालय को ठेकों के टेंडर में बड़े पैमाने पर घोटाले का पता चला। सबसे पहले ग्रामीण विकास विभाग और पीएचईडी के चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के ठिकानों से प्रवर्तन निदेशालय को नकद समेत सौ करोड़ से अधिक संपत्ति का पता चला। वीरेंद्र राम भी अरैस्ट हुए। टेंडर घोटाले में ही प्रवर्तन निदेशालय ने ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री आलमगीर आलम के पीएस संजीव लाल के कारिंदे के घर से 30 करोड़ से अधिक कैश की बरामदगी की. झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजीव लाल और उनके नौकरों की निशानदेही पर मंत्री आलमगीर आलम भी अरेस्ट हो गए। खनन, टेंडर और जमीन घोटालों में हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा और प्रेस सलाहकार अभिषेक पिंटू समेत दर्जन भर बिचौलिए और घोटालेबाजों के नाम सामने आए। इनमें कई अभी कारावास में हैं।
हाईकोर्ट से बेल मिलते ही फिर एक्टिव हो गए हेमंत
31 जनवरी 2024 को अरैस्ट हेमंत सोरेन को पांच महीने बाद झारखंड उच्च न्यायालय से 28 जून 2024 को जमानत दे दी। उसके बाद से ही हेमंत सोरेन की सक्रियता बढ़ने लगी और अब चंपाई सोरेन को हटा कर वे स्वयं मुख्यमंत्री बन रहे हैं। चंपाई के इस्तीफे के साथ ही हेमंत सोरेन ने गवर्नमेंट बनाने का दावा पेश कर दिया है।
हेमंत की गैरमौजूदगी में इण्डिया ब्लाक की सीटें बढ़ाईं
हेमंत सोरेन के कारावास में रहते ही लोकसभा के चुनाव हुए। उनकी स्थान मुख्यमंत्री बने चंपाई सोरेन की साफ छवि और सिंहभूम क्षेत्र में उनके असर का रिज़ल्ट सुखद रहा। दो चुनावों में दो सीटों तक सिमटे रहने वाले इण्डिया ब्लाक को इस बार लोकसभा में पांच सीटें मिलीं. इनमें तीन जेएमएम ने जीतीं तो दो पर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार जीते। यहां तक कि विधानसभा उपचुनाव में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन की जीत भी चंपाई सोरेन के नेतृत्व में लड़े गए चुनाव में ही हुई। कल्पना सोरेन को हेमंत बिहार में लालू यादव की तर्ज पर कारावास जाने पर मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। हालांकि पार्टी में इसे लेकर थोड़ी अनबन थी। इसलिए कल्पना मुख्यमंत्री नहीं बन पाईं। कारावास से बाहर आते ही हेमंत सोरेन को कांग्रेस पार्टी नेता सोनिया गांधी ने राय दी कि यदि वे मुख्यमंत्री नहीं बनते हैं तो विधानसभा चुनाव में दो चेहरों को लेकर मतदाताओं में दुविधा हो सकती है। इसका फायदा एनडीए उठा सकता है। इसलिए चंपाई सोरेन को हटा कर वे स्वयं मुख्यमंत्री बनें। उसके बाद ही हेमंत ने शीघ्र इण्डिया ब्लाक के विधायकों की बैठक बुधवार को अपने आवास पर बुलाई और नेतृत्व बदलाव पर सबकी रजामंदी ले ली।
हेमंत गवर्नमेंट के कामकाज को चंपाई ने आगे बढ़ाया
सीएम पद की शपथ लेने के बाद से अब तक चंपाई सोरेन लगातार हेमंत सोरेन के एजेंडे को ही आगे बढ़ा रहे थे। चुनावी वर्ष में जिस तरह की लुभावनी घोषणाएं होती हैं, वैसी घोषणाएं चंपाई लगातार कर रहे थे। 15 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा, 30 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां, 200 यूनिट तक फ्री बिजली, 25 वर्ष से अधिक उम्र की स्त्रियों को हर महीने हजार रुपए की पेंशन समेत कई घोषणाएं हाल में चंपाई सोरेन ने की थी। इससे उनकी लोकप्रियता भी बढ़ने लगी थी। चंपाई सोरेन की बेदाग छवि से भी उनकी स्वीकार्यता बढ़ने लगी थी। पर, वे खड़ाऊं मुख्यमंत्री ही बन कर रह गए। कारावास से लौटते ही उन्होंने खड़ाऊं हेमंत सोरेन के दबाव में सौंपने में कोई आनाकानी नहीं की।
चंपाई सोरेन के इस्तीफे से हेमंत की राह में मुश्किलें
चंपाई सोरेन के इस्तीफे और हेमंत सोरेन की दोबारा ताजपोशी से बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी आजसू की अब आक्रामकता बढ़ेगी। हेमंत सोरेन की पूर्ववर्ती गवर्नमेंट के कार्यकाल में हुए करप्शन को दोनों पार्टियां जोर-शोर से खुलासा करेंगी। वे यह भी बताएंगी कि शिबू सोरेन परिवार से बाहर का आदिवासी सिर्फ़ काम चलाऊ मुख्यमंत्री हो सकता है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ऐसा कहने भी लगे हैं। उनका बोलना है कि चंपाई सोरेन को हेमंत सोरेन ने पद से हटा कर अपमानित किया है। हेमंत ने यह एहसास करा दिया है कि सत्ता पर केवल शिबू सोरेन परिवार का ही एकाधिकार है। जेएमएम के नेताओं के लिए यह बड़ा सबक है कि पार्टी में रहना है तो शिबू सोरेन परिवार की पालकी ही ढोनी पड़ेगी। झारखंड का मुख्यमंत्री रहते चंपाई सोरेन की इण्डिया ब्लाक की बैठकों में उपेक्षा की जाती रही। उन्हें किनारे की कुर्सी दी जाती थी। इसी बहाने एनडीए नेता यह प्रचारित करेंगे कि परिवारवादी पार्टी के मुखिया हेमंत सोरेन को आदिवासी समाज के उत्थान से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें केवल अपना स्वार्थ दिखता है।

