1300 करोड़ की लागत से बन रही इस मेगा लिफ्ट परियोजना को वर्ष 2024 तक पूरा
झारखंड की सबसे बड़ी मसलिया-रानेश्वर मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना का काम दुमका में काफी सुस्त गति से चल रहा है। रैयती जमीन का अधिग्रहण किए भू-अर्जन विभाग को वर्ष भर से अधिक समय हो गए हंै। बावजूद, अभी तक सिंचाई विभाग को जमीन हस्तांतरित नहीं की गई है। इससे यह योजना अधर पर लटक गई है। करीब 1300 करोड़ की लागत से बन रही इस मेगा लिफ्ट परियोजना को साल 2024 तक पूरा करना है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार बताते हैं कि तय समय सीमा पर योजना को पूरा करने के लिए विभाग संबंधित कार्यकारी एजेंसी एलएनटी के साथ मिलकर काम कर रहा है, लेकिन रैयती जमीन का अधिग्रहण कर भू-अर्जन विभाग द्वारा अभी तक हमें हैंड-ओवर नहीं किया गया है। इस कारण योजना को जमीन पर उतारने में मुश्किल हो रही है। मुआवजा नहीं मिलने के कारण 67 रैयत अपनी जमीन पर योजना का काम प्रारम्भ नहीं करने दे रहे हैं।
करीब 172.964 हेक्टेयर जमीन में मेगा लिफ्ट परियोजना का निर्माण होना है। इसके सरकारी और रैयती जमीन दोनों शामिल है। सरकारी जमीन तो विभाग को प्रारंभिक आवश्यकता के मुताबिक मिल गई है, लेकिन रैयती जमीन अभी तक सिंचाई विभाग को हस्तांतरित नहीं की गई है। जबकि भू- अर्जन विभाग को सिंचाई विभाग द्वारा मार्च महीने में ही 55 करोड़ रु मुआवजा भेज दिया गया है। सिंचाई विभाग को रैयती जमीन 67.91 हेक्टेयर क्षेत्र अधिग्रहण किया जाना है। रैयती जमीन सिंचाई विभाग को भू अर्जन विभाग द्वारा नहीं मिलने के कारण योजना को जमीन पर उतारने में मुश्किल उत्पन्न हो रही है।
झारखंड की सबसे बड़ी इस लिफ्ट परियोजना को साल 2024 तक पूरा करने का है लक्ष्य
करीब 172.964 हेक्टेयर जमीन में मेगा लिफ्ट परियोजना का निर्माण होना है। परियोजना के लिए सरकारी जमीन तो मिल गई है, लेकिन रैयतों की जमीन पर अभी भी कई तरह की अड़चन कायम है।
परियोजना पूरा होने पर 276 गांवों को सालभर पानी मिलेगा
इस महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना के पूरा होने पर मसलिया और रानेश्वर के 276 गांवों में वर्षों भर सिंचाई सुविधा मिलेगी। मुरगुनी गांव के पास सिद्धेश्वरी एवं नूनबिल नदी के दोनों तरफ बांध निर्माण कर बराज का निर्माण किया जा रहा है। बराज से पंप मोटर से पानी लिफ्ट कर पाइपलाइन के माध्यम से खेतों में पहुंचाया जाएगा। इस सिंचाई योजना से मसलिया के 204 और रानेश्वर के 72 गांवों की 22,383 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई की सुविधा मौजूद हो सकेगी। इस सिंचाई परियोजना से उन गांवों के लोगों को फायदा होगा, जहां के खेत टांड़ है और जहां सिंचाई के परंपरागत संसाधनों से पानी नहीं पहुंचाया जा सकता था। मसलिया में 60 फीसदी कृषि भूमि टांड़ है।
अभी 30% ही काम, पांच चेंबर का होना है निर्माण
अभी तक मेगा लिफ्ट परियोजना का करीब 30 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है। इसमें बराज निर्माण के अनुसार 15 पिलर का काम होना है। आठ पिलर का काम प्रगति पर है। इंटेक पंप हाउस तथा इंटरमीडिएट पंप हाउस की खुदाई प्रारम्भ हो चुकी है। 5 चेंबर का निर्माण किया जाना है। इन्हीं चैंबरों पर पानी स्टोर कर खेतों तक पाइप के द्वारा पहुंचाया जाना है।
रैयतों को मुआवजा जल्द मिलेगा
सिविल एसडीओ सह प्रभारी भू -अर्जन पदाधिकारी कौशल कुमार ने बोला कि भूमि अधिग्रहण करने की प्रक्रिया होती है। उसी के अनुसार कार्य चल रहा है। रैयतों को जल्द प्रकिया पूरी कर मुआवजा राशि का भुगतान किया जाएगा।

