कांग्रेस का देवभूमि के हित से कभी वास्ता नहीं रहा: पीएम मोदी

युवाओं के लिए बढ़ाए अवसर
जवाब : मैंने अध्यात्म के एक जिज्ञासु के रूप में और बाद में बीजेपी कार्यकर्ता के रूप में काफी समय उत्तराखंड में बिताया है. यहां के लोगों के साथ पहाड़ की समस्याओं को जिया है. इसलिए, उत्तराखंड को लेकर मेरा दृष्टिकोण बहुत संवेदनशील है. जहां तक पहाड़ की परेशानियों का प्रश्न है, ये एक दिन में पैदा हुईं समस्याएं नहीं हैं. दशकों तक पहाड़ों की उपेक्षा हुई है. कांग्रेस पार्टी सरकारों के लिए उत्तराखंड केवल फोटो खिंचवाने की स्थान रह गई थी, इसलिए यहां के लोगों को अलग राज्य की मांग करनी पड़ी थी. अटलजी के समय बीजेपी गवर्नमेंट ने इस सोच के साथ अलग उत्तराखंड राज्य बनाया था कि यहां विकास पर फोकस होगा. लेकिन, उसके बाद केंद्र में काफी समय कांग्रेस पार्टी की गवर्नमेंट रही, राज्य में भी कांग्रेस पार्टी बीच-बीच में आती रही. कांग्रेस पार्टी के पास यहां के लोगों के विकास का विजन ही नहीं है. हमारी गवर्नमेंट देवभूमि के विकास के एक बड़े विजन को लेकर आगे चल रही है. पहाड़, प्रकृति, पर्यावरण, पानी, पर्यटन हम हर विषय के लिए बहुत गंभीर रहे हैं. हम यहां पर कनेक्टिविटी बढ़ाने, निवेश और उच्च शिक्षा के संस्थान बढ़ाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं. दिसंबर, 2023 में उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट कराए जाने के पीछे भी यही उद्देश्य था.
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से युवाओं के पलायन का मुख्य कारण अवसरों की कमी थी. हम यहां नए-नए अवसर बना रहे हैं. नए शिक्षा संस्थान स्थापित कर रहे हैं, ताकि उन्हें दूर न जाना पड़े. ऊधम सिंह नगर में एम्स का सैटेलाइट सेंटर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, हरिद्वार के मेडिकल कॉलेज, देवप्रयाग का संस्कृत महाविद्यालय, विभिन्न जिलों में पीएमश्री स्कूल… सभी संस्थान पहाड़ में ही शिक्षा के अवसर मौजूद कराएंगे. मानसखंड मंदिरमाला मिशन से पर्यटन के साथ रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे. इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट और होम स्टे भी रोजगार पैदा कर रहे हैं.
10 सालों में हमारी गवर्नमेंट के प्रयासों से उत्तराखंड ही नहीं, देशभर में कनेक्टिविटी का विस्तार हुआ है. अब तो मानस खंड के तीर्थ स्थानों जैसे आदि कैलाश, ओम पर्वत दर्शन के लिए भी गवर्नमेंट ने हेलिकॉप्टर सेवाएं प्रारम्भ कर दी हैं. पिथौरागढ़ के लिए हवाई सेवाएं प्रारम्भ हो चुकी हैं. बेहतर कनेक्टिविटी और डिजिटल सुविधाओं की वजह से लोगों का पर्यटन के साथ तीर्थाटन में भी रुझान बढ़ा है. यह बात भी ठीक है कि उत्तराखंड के लिए विकास कार्यों को भारी प्राकृतिक चुनौतियों से जूझना पड़ता है. इसलिए, बीजेपी गवर्नमेंट उत्तराखंड के विकास को सिर्फ़ सड़क और हाईवे बनाने के सीमित नजरिये से नहीं देख रही है. हम विकास के साथ ट्रांसपोर्ट के वैकल्पिक माध्यमों पर भी काम कर रहे हैं. हम हेली सुविधाओं के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में रोपवे जैसे वैकल्पिक माध्यमों का विकास भी कर रहे हैं. यमुनोत्री, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में रोप-वे बनने से बहुत सुविधा हो जाएगी. कर्णप्रयाग-ऋषिकेश सेक्शन पर रेलवे लाइन का काम पूरा होने के बाद बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम तक पहुंचना और सरल हो जाएगा. 700 करोड़ की लागत से देहरादून में झाझड़ा-आशारोड़ी लिंक रोड का निर्माण किया जा रहा है. ऐसा नहीं है कि पहले राष्ट्र के पास संसाधनों की कमी थी, ऐसा नहीं है कि पहले राष्ट्र के पास सामर्थ्य नहीं था. कमी थी तो सत्ता में बैठे लोगों के विजन में, इच्छाशक्ति में.
- अब दिल्ली दूर नहीं
कनेक्टिविटी का विस्तार होने से अब न कुमाऊं के लिए दिल्ली दूर है, न गढ़वाल के लिए. पर्यटन और सुविधा के लिए केदारनाथ, हेमकुंड साहिब समेत कई तीर्थ स्थानों के लिए हेलिकॉप्टर सेवा भी बेहतर हुई है. आवागमन के वैकल्पिक माध्यमों पर भी काम हो रहा है. चारधाम परियोजना के अनुसार केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को 900 किमी लंबे हाईवे से जोड़ा जा रहा है. वंदे हिंदुस्तान ट्रेन की सुविधा प्रारम्भ होने से देहरादून से दिल्ली का यात्रा पांच घंटे से कम समय में पूरा हो रहा है.
आपदा प्रबंधन में अभूतपूर्व क्षमता बढ़ी…तंत्र और मजबूत
उत्तराखंड को लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेलनी पड़ती है. उत्तराखंड खासकर पहाड़ी राज्यों के लिए कोई दीर्घकालिक योजना, जो सुरक्षा प्रदान करे.
भारत ने पिछली सरकारों की तुलना में आपदा प्रबंधन में अपनी क्षमताओं का अभूतपूर्व विस्तार किया है. हमारी ट्रेनिंग, तैयारी, ढंग अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हैं. हम प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले हानि को कम से कम करने की दिशा में लगातार कोशिश कर रहे हैं. इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में हाईवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स हों या पीएम आवास योजना के अनुसार बन रहे घर हों, दोनों में ही आपदा प्रतिरोध का, आपदा लचीलापन का ध्यान रखा जा रहा है.
गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए मुझे कई प्राकृतिक आपदाओं से निपटने का अनुभव है. मैं जानता हूं कि यदि बचाव और पुनर्वास के काम में सियासी दखलअंदाजी न हो, तो काम बहुत तेज गति से होता है. 2013 में केदारनाथ में आपदा आई थी, तब पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचने में देरी हो रही थी. इसकी वजह यह थी कि कांग्रेस पार्टी के शाही परिवार के लोग राहत सामग्री के साथ अपना नाम, अपनी तस्वीर चाहते थे. कुछ महीने पहले उत्तराखंड में कुछ मजदूर भाई टनल में फंस गए थे. तब केंद्र, राज्य और क्षेत्रीय प्रशासन ने एक यूनिट की तरह काम किया. मुख्यमंत्री पुष्कर धामी स्वयं टनल में मजदूरों का हौसला बढ़ा रहे थे. इसी सामंजस्य से चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा.
सैलानियों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए लगातार कर रहे काम
आपको उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर देखा जाता है. पर्यटकों की सुविधाओं के लिए भविष्य की क्या कार्ययोजना है.
उत्तराखंड के ब्रांड एंबेसडर तो यहां के लोग ही हैं. मैं केवल इस देवभूमि का सेवक हूं. यह दशक उत्तराखंड का दशक है. मेरे इस विश्वास के पीछे ठोस आधार है. यहां की प्राकृतिक सुंदरता, प्राचीन संस्कृति, यहां के लोगों की मेहनत उत्तराखंड को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाएगी. मेरी प्रयास है कि देश-विदेश के पर्यटकों के लिए उत्तराखंड पहुंचना सरल बनाया जाए और यहां से वे अच्छे अनुभव लेकर लौटें. नयी रेल लाइन, हाईवे, पावर प्लांट, पेयजल योजना, शहरी विकास, वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़ी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. 2017 तक केदारनाथ में एक वर्ष में पांच लाख श्रद्धालु पहुंचने का रिकॉर्ड था. सुविधाएं बढ़ने के बाद पिछले साल करीब 20 लाख श्रद्धालु आए.
उत्तराखंड की स्त्रियों से मिलती है सरेंडर की प्रेरणा
उत्तराखंड की पहचान नारी शक्ति के तौर पर भी है. राज्य की आर्थिकी और स्त्रियों की मजबूती के लिए और क्या किया जाना है, ताकि पहाड़ आबाद हों.
मैं उत्तराखंड की स्त्रियों को मां नंदा के रूप में देखता हूं. उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाएं परिवार की रीढ़ हैं. इनसे मुझे सरेंडर रेट से अपने काम में लगे रहने की प्रेरणा मिलती है. 10 सालों में हमने ये सुनिश्चित किया है कि महिलाएं भी हिंदुस्तान की विकास गाथा का हिस्सा बनें. हमारी योजनाओं ने स्त्रियों के जीवन में सुविधाओं को बढ़ाया है. हमारी गवर्नमेंट ने 12 करोड़ शौचालय बनाए हैं. उत्तराखंड में भी पांच लाख से अधिक परिवारों में स्त्रियों के लिए इज्जत घर बनाए गए हैं. उज्ज्वला योजना के अनुसार उत्तराखंड में भी करीब साढ़े पांच लाख माताओं-बहनों को धुआंमुक्त रसोई की सुविधा मिली है. जल जीवन मिशन की वजह से 13 लाख से अधिक परिवारों को सरलता से पीने का साफ पानी मिलने लगा है. उत्तराखंड के लोगों की आवाज उठाने के लिए, यहां की आकांक्षाओं को संसद में रखने के लिए मजबूत उम्मीदवार उतारे हैं. ये अनुभवी और जमीन से जुड़े नेता हैं. बीजेपी के विजन को आगे बढ़ाएंगे और उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने के लिए समर्पित रहेंगे.

