नोएडा में 4 बिल्डरों के ठिकानों से 2 करोड़ नकद और 50 करोड़ रुपए लेन देने के दस्तावेज किये गये जब्त
नोएडा.चार बिल्डरों के नोएडा और दिल्ली के भिन्न-भिन्न ठिकानों में करीब 40 जगहों पर आईटी की 400 से अधिक लोगों की टीम छापेमारी कर रही है. इन पर टैक्स चोरी का इल्जाम है. इनसे जरूरी डॉक्यूमेंट्स भी आईटी विभाग ने बरामद किए हैं.
कॉमर्शियल स्पेस बेचने के नाम पर नोएडा में चार बिल्डर (भूटानी इंफ्रा, ग्रुप 108, एडवंट, लाजिक्स) समेत दो ब्रोकर कंपनी की ओर से नकद लेनदेन के जरिये बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का खेल खेला जा रहा है. इसके विरुद्ध आयकर ने गुरुवार को नोएडा, दिल्ली, फरीदाबाद में 37 ठिकानों पर सर्च प्रारम्भ की गई है, जो शुक्रवार को बढ़कर 40 स्थानों पर पहुंच चुकी है.
अब तक की सर्च में बिल्डरों के ठिकानों से दो करोड़ नकद और 50 करोड़ रुपए नकद लेन देने के डॉक्यूमेंट्स बरामद किए जा चुके है. यह सर्च लंबी खिंचने का संभावना व्यक्त किया जा रहा है. दस्तावेजों के साफ होता जा रहा है कि लाजिक्स ग्रुप कॉमर्शियल स्पेस को बेचने का ठेका भूटानी ग्रुप की ओर से लिया गया है, इसमें सभी की हिस्सेदारी तय है.
सर्च में इनकम टैक्स विभाग के 400 से अधिक कर्मी और अधिकारी लगे है. नोएडा में 21 स्थानों, दिल्ली में 18 और फरीदाबाद में एक जगह पर सर्च जारी है. ये पूरा खेल लॉजिक्स ग्रुप के कॉमर्शियल प्लाट स्पेस को बेचने को लेकर किया गया. लॉजिक्स ने इसके लिए भूटानी ग्रुप से इंटरनल एग्रीमेंट किया.
इसके अनुसार भूटानी ने इस स्पेस को बेचना प्रारम्भ किया. यहां अधिकतर पैसा ब्लैक में खपाया गया. लगभग एक प्लाट को बेचने में 40 फीसदी तक की रकम कैश में ली गई. इसकी न कोई पक्के डॉक्यूमेंट्स होते हैं और न ही कोई लीगल डाक्यूमेंट. इसी कॉमर्शियल स्पेस में नामी गिरामी लोगों ने अपना काला धन भूटानी में खपाया. इसकी जानकारी आयकर विभाग को मिली.
सोर्स के अनुसार लॉजिक्स ग्रुप ने इण्डिया बुल्स से करीब 2000 करोड़ का लोन लिया. इस लोन के बाद उसने नोएडा में पांच से छह प्लाट लिए. ये प्लाट ऑफिस कॉमर्शियल स्पेस के लिए थे. यहां निर्माण प्रारम्भ किया गया, लेकिन आधा अधूरा निर्माण के बाद लॉजिक्स ने काम बंद कर दिया.
उधर, लगातार इण्डिया बुल्स की ओर से लोन जमा करने का प्रेशर बना. इसके चलते लॉजिक्स ने भूटानी ग्रुप के साथ एक एग्रीमेंट साइन किए. इसके अनुसार भूटानी ग्रुप इनका कॉमर्शियल स्पेस बनाएगा और बेचेगा. धीरे धीरे लोन के पैसे लॉजिक्स को देगा. हुआ भी ऐसा. लेकिन यहां अधिकांश खेल टैक्स चोरी कर किया गया .
डेढ़ वर्ष पहले फरवरी 2022 में आयकर विभाग को पहला इनपुट मिला. इसके बाद उन्होंने दस्तावेजों को खंगालना प्रारम्भ किया. इस दौरान उन्हें जानकारी मिली कि भूटानी ग्रुप दो भागों में बंट गया. पहली भूटानी इंफ्रा और दूसरा ग्रुप 108. ये दोनों एक मदर कंपनी के दो हिस्से है. इनका पैसा भी इस कॉमर्शियल स्पेस में लगा. इसी तरह एडवंट बिल्डर भी पहले भूटानी के साथ कोलेब्रेशन में काम करता था. उसका पैसा भी इसमें लगा है. ऐसे में इन चारों बिल्डरों पर एक साथ सर्च की गई.

