कृषि क्षेत्र में ड्रोन टेक्नोलॉजी लेकर आई है एक क्रांतिकारी बदलाव
रायपुर। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खेती अब टेक्नोलॉजी के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने वाली है। बदलते दौर में जहां राष्ट्र के कई राज्यों में खेती में ड्रोन का चलन बढ़ रहा है, वहीं अब छत्तीसगढ़ के किसान भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कृषि क्षेत्र में ड्रोन टेक्नोलॉजी एक क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आई है, जिससे खेती के कई मुश्किल कार्य अब चंद मिनटों में पूरे किए जा सकते हैं।
ड्रोन से होगा खेती का डिजिटलीकरण
फ्लाइंग अधिकारी (रिटायर्ड) नित्यानंद जायसवाल बताते हैं कि आरंभ में जब कोई नयी तकनीक आती है, तो किसानों के लिए उसे अपनाना आसान नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए बोला कि 30-40 वर्ष पहले जब ट्रैक्टर आया था, तब भी किसानों को उसे अपनाने में समय लगा था। उसी तरह आज ड्रोन तकनीक को लेकर भी आरंभ में झिझक है, लेकिन यह भविष्य की जरूरत है। उन्होंने कहा कि खेती में ड्रोन का इस्तेमाल खासकर पेस्टीसाइड छिड़काव और ग्रेन्यूल्स वितरण जैसे कार्यों में अत्यंत उपयोगी साबित हो रहा है। जहां एक एकड़ खेत में पेस्टीसाइड छिड़कने में लगभग तीन घंटे और बड़ी मात्रा में पानी खर्च होता है, वहीं ड्रोन के माध्यम से यही काम महज 6 मिनट में पूरा किया जा सकता है। इसके साथ ही पानी की खपत भी काफी कम होती है।
किसानों के लिए मौजूद है मारुट कंपनी की ड्रोन
हैदराबाद बेस्ड मारुट कंपनी की ड्रोन विगत फरवरी माह से छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए मौजूद है। यह ड्रोन मशीनें विशेष रूप से किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन की गई हैं। एक दिन में 20 से 30 एकड़ में छिड़काव करने की क्षमता रखने वाली ये मशीनें खेती को न सिर्फ़ आसान बना रही हैं, बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत कर रही हैं।
ड्रोन बन सकता है कमाई का जरिया
फ्लाइंग अधिकारी (रिटायर्ड) नित्यानंद जायसवाल ने आगे कहा कि ड्रोन तकनीक किसानों के लिए केवल सुविधा ही नहीं, बल्कि इंटरप्रेन्योरशिप का अवसर भी बन सकती है। कोई भी किसान या युवा इन्हें किराए पर लेकर दूसरे किसानों की सहायता कर सकता है और स्वयं का व्यवसाय प्रारम्भ कर सकता है।
गांव-गांव तक पहुंच सकती है यह तकनीक
सरकार यदि प्रशिक्षण और सब्सिडी के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित करे, तो यह तकनीक गांव-गांव तक पहुंच सकती है। छत्तीसगढ़ की खेती अब परिवर्तन की दहलीज पर खड़ी है। ड्रोन जैसी अत्याधुनिक तकनीक को अपनाकर किसान अपनी उत्पादकता बढ़ा सकते हैं, लागत घटा सकते हैं और खेती को फायदेमंद बना सकते हैं। ठीक मार्गदर्शन और पहल से यह तकनीक किसानों की किस्मत बदल सकती है।

