Rohtas वर्ग कक्ष के साथ एसेंबली और पोशाक में भी दिखेगा बदलाव
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप स्कूली शिक्षा के लिए नए पाठ्यक्रम के मसौदा को जारी की। इसका असर केवल बोर्ड परीक्षाओं पर ही नहीं बल्कि पूरी स्कूली शक्षिा पर पड़ने वाला है।
इसके अनुसार कक्षा एक से 12 वीं तक बच्चे कैसे पढ़ेंगे, क्या सीखेंगे, कैसे सीखेंगे, असेंबली कैसे होंगी, बैग-किताबें कैसी होंगी, विद्यार्थियों की प्रतिभा का मूल्यांकन कैसे होगा आदि प्रस्तावित हैं। अब नए सत्र से एसेंबली से लेकर विद्यार्थियों के पोशाक में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। स्कूली शक्षिा में विद्यार्थियों को कई विषयों की पढ़ाई के अलावे एक वर्ष में दो बार बोर्ड की परीक्षा और 12वीं में सेमेस्टर प्रणाली लागू करना अहम परिवर्तन शामिल है। जिले में 418 निबंधित निजी विद्यालयों के साथ 1275 प्राथमिक, 746 मध्य, 285 उच्च और 221 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में लगभग 678923 विद्यार्थी नामांकित हैं। यानी नयी शिक्षा नीति लागू होने के बाद नामांकित विद्यार्थियों पर नए सत्र से कई बड़े परिवर्तन के साथ स्कूली शिक्षा मिलने लगेगी। बता दें कि 2024 के बाद होने वाली बोर्ड परीक्षाएं वर्ष में दो बार आयोजित होंगी। इसे ले सभी विद्यालयों को तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। बाल विकास विद्यालय की प्राचार्या आशा तिवारी ने कहा कि कोविड के दौरान भी दो बार परीक्षाएं ली गई थी। इस
बार प्रारूप में थोड़ा परिवर्तन होगा। आगे पाठ्यक्रम से संबंधित गाइड लाइन मिलते ही इसकी तैयारी प्रारम्भ कर दी जाएगी।
इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एबीआर फाउंडेशन के प्रबंधक डाक्टर पृथ्वीपाल सिंह ने कहा कि वर्ष में दो बार बोर्ड परीक्षाओं से संबंधित सीबीएसई का निर्देश है। पाठ्यक्रम को किस आधार पर बांटना है और अंकों का क्या प्रावधान होगा, यह निर्देश मिलते ही नए पैटर्न के आधार पर पढ़ाई प्रारम्भ करायी जाएगी।
छात्रों के बैठने की प्रबंध में भी होगा बड़ा सुधार नयी शिक्षा नीति के अनुसार नए सत्र से वर्ग कक्ष में बैठने में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। अब वर्ग कक्ष में विद्यार्थी गोलाकार और अर्ध गोलाकार आकार में बैठाने को बोला गया है। यही नहीं विद्यालयों में होने वाली एसेंबली को तकनीक की स्थान सार्थक बनाने का कोशिश किया जाएगा। स्कूली ड्रेस की बात करें तो विद्यालयों में क्षेत्रीय मौसम के हिसाब से पारंपरिक विद्यार्थी और छात्राओं को ध्यान में रखते हुए स्कूली ड्रेस पहनने से संबंधित निर्देश जारी किए जाएंगे। जिले में चल रहे 90 प्रतिशत से अधिक सीबीएसई विद्यालय गाइडलाइंस के अनुरूप नहीं चल रहे हैं

