बिहार जाति गणना: ये रहा पूरा जातीय आंकड़ा
पटना। बिहार गवर्नमेंट ने जातीय गणना की रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया है। वैसे गवर्नमेंट ने आर्थिक और सामाजिक आंकड़े जारी नहीं किये गये हैं। गवर्नमेंट की ओर से जारी जातीय गणना के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में हिंदू जनसंख्या लगभग 82 प्रतिशत है, जबकि मुसलमान जनसंख्या का फीसदी महज 18 प्रतिशत के आसपास है। जाति गणना के मुताबिक बिहार के हिंदूओं में सबसे बड़ी जाति अहिरों की है, यादवों की संख्या करीब 14.24 है, जबकि दूसरे नंबर पर दुसाध और तीसरे पर कुशवाहा है। सवर्णों को लेकर जो आंकड़े सामने आये हैं, वो भी चौंकानेवाले हैं। बिहार में राजपूतों से अधिक ब्राहमणों की संख्या है। बिहार में ब्राह्मण करीब 3.65 फीसदी हैं, जबकि राजपूतों की जनसंख्या उससे कम करीब 3.45 फीसदी है। बाभन अर्थात भूमिहार ब्राहमणों की संख्या में 2.86 प्रतिशम है, जबकि कायस्तों की संख्या महज 0.60 फीसदी ही दर्ज की गयी है।

बिहार में सवर्णों की तादाद 15.52 फीसदी
सर्वे के बाद जारी आंकड़ों के मुताबिक बिहार की कुल जनसंख्या 13 करोड़ 7 लाख 25 हजार 310 है। इनमें हिंदू समुदाय की जनसंख्या 81.9%, मुसलमान की जनसंख्या 17.7%, ईसाई 0.05%, सिख- 0.01%, बौद्ध 0.08%, जैन 0.0096% और अन्य धर्म के लोगों की जनसंख्या 0.12% है। 13 करोड़ से अधिक की जनसंख्या में 10.07 करोड़ हिंदू और मुसलमान की जनसंख्या 2.31 करोड़ है। यदि हिंदूओं की बात करें तो इसमें अत्यंत पिछड़ा- 36 फीसदी, पिछड़ा वर्ग- 27 फीसदी, अनुसूचित जाति- 19 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 1.68 प्रतिशत है। बिहार गवर्नमेंट की तरफ से जारी जातीय गणना के अनुसार बिहार में सवर्णों की तादाद 15.52 प्रतिशत है, जिसमें भूमिहार की जनसंख्या 2.86 फीसदी, ब्रह्मणों की जनसंख्या 3.66 फीसदी, कुर्मी की जनसंख्या 2.87 फीसदी, मुसहर की जनसंख्या 3 फीसदी, यादवों को जनसंख्या 14 फीसदी, राजपूत को जनसंख्या 3.45 फीसदी, कायस्थ 0.60 प्रतिशत है।
ये रहा पूरा जातीय आंकड़ा
जातीय गणना के मुताबिक, बिहार में कुल 215 जातियां हैं। उसमें कायस्थ- 0.60 फीसदी, कुर्मी- 2.87 फीसदी, कुशवाहा- 4.21 फीसदी, चंद्रवंशी- 1.64 फीसदी, धानुक- 2.13 फीसदी, धोबी- 0.83 फीसदी, नाई- 1.59 फीसदी, नोनिया- 1.91, कुम्हार- 1.40, पासी- 0.98, बढ़ई- 1.45, ब्राह्मण- 3.65, भूमिहार- 2.86, मल्लाह- 2.60, माली- 0.26, मुसहर- 3.08, राजपूत- 3.45, लोहार- 0.15, सोनार- 0.68, हलवाई- 0.60 प्रतिशत हैं। अघोरी- 0.069, अदरखी- 0.02, अबदल- 0.0087, अमात- 0.21, असुर- 0.059, अवध बनिया- 0.03, मुसलमान दर्जी- 0.25 प्रतिशत है।
काफी टकराव के बाद पूरा हुआ सर्वे
बिहार में सभी दलों की सहमति से जातीय गणना कराने पर सहमति बनी थी। सभी दलों की सहमति के बाद विधानमंडल के दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित हुआ। केंद्र गवर्नमेंट के इनकार करने के बाद बिहार गवर्नमेंट ने अपने बूते पर जातीय गणना का काम प्रारम्भ किया, लेकिन जाति आधारित गणना को लेकर बिहार में खूब हंगामा मचा था और मुद्दा उच्च न्यायालय से लेकर उच्चतम न्यायालय तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में उच्चतम न्यायालय से हरी झंडी मिलने के बाद दो चरणों में जातीय गणना का काम पूरा हुआ। जातीय गणना का काम पूरा होने के बाद विपक्षी दल लगातार गवर्नमेंट से जातीय गणना की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे थे। इसको लेकर राजनीति भी खूब हो रही थी, लेकिन आखिरकार नीतीश गवर्नमेंट ने 2 अक्टूबर गांधी जयंती के मौके पर जातीय गणना के आंकड़ों को सार्वजनिक कर दिया।

