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Bihar Chunav 2025: डिनर पार्टी के पल बदल सकते हैं चुनाव का समीकरण, जानें क्या है खास…

सोमवार को कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी हिंदुस्तान बंधन के लिए एक डिनर पार्टी का आयोजन किया. इस दौरान, बिहार में कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव (बिहार चुनाव 2025) की रणनीति बनाने के साफ संकेत मिले. संसद भवन से चुनाव आयोग तक विरोध मार्च के बाद, होटल ताज पैलेस में आयोजित इस डिनर में न सिर्फ़ कांग्रेस, बल्कि समाजवादी पार्टी, राजद, शिवसेना (उद्धव गुट), द्रमुक, आम आदमी पार्टी के नेता भी शामिल हुए. यह बैठक सिर्फ़ एक ‘राजनीतिक सामाजिक मेलजोल’ नहीं थी, बल्कि इसमें राहुल गांधी के मिशन… दलित वोट बैंक को साधने और बिहार जैसे जातिगत समीकरणों वाले राज्यों में विपक्षी एकता को मज़बूत करने में खड़गे की किरदार का एक साफ संदेश छिपा था.

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कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अब न सिर्फ़ एक संगठनात्मक मुखिया के रूप में, बल्कि राहुल गांधी के लिए एक ‘तुरुप का इक्का’ बनकर उभरे हैं. राहुल गांधी इंदिरा गांधी की सियासी शैली का अनुकरण करने की प्रयास कर रहे हैं, जिसने चुनावी फायदा हासिल करने के लिए दलितों और सवर्णों को एक साथ लाया था. बिहार जैसे राज्य में, जहाँ मतदान का पैटर्न पूरी तरह से जाति-आधारित है, खड़गे का दलित चेहरा कांग्रेस पार्टी और ‘भारत’ गठबंधन को अतिरिक्त बढ़त दिला सकता है.

खड़गे राहुल के तुरुप के पत्ते हैं

हाल ही में, राहुल गांधी ने कई बार ‘दलित कार्ड’ खेला है, खड़गे का बचाव करते हुए, सियासी हमलों से उनकी भाषाई भूलों का बचाव करते हुए और यह तर्क देते हुए कि दलित नेतृत्व पर प्रश्न उठाना वास्तव में सामाजिक अगुवाई पर प्रश्न उठाने जैसा है. यह संदेश कांग्रेस पार्टी की छवि को मज़बूत करने का एक कोशिश है, खासकर उत्तर हिंदुस्तान के ग्रामीण और दलित-बहुल इलाकों में.

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