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बिहार की नीतीश सरकार राज्य में हुए जाति जनगणना के आंकड़े जारी

OBC Card in Lok Sabha Poll 2024:  एक तरफ जहां बिहार की नीतीश गवर्नमेंट राज्य में हुए जाति जनगणना के आंकड़े जारी करने के करीब है, तो दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन INDIA के कई घटक दल आनें वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए जाति जनगणना की मांग मोदी गवर्नमेंट से कर रहे हैं जाति जनगणना का दांव ओबीसी वोट बैंक को साधने के लिए राजनीतिक दल आजमा रहे हैं ऐसे में मोदी गवर्नमेंट ने भी उसी ओबीसी वोट बैंक में सेंधमारी के लिए जाति जनगणना की काट तैयार कर ली है, जिसे वह ट्रम्प कार्ड के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैNewsexpress24. Com obc download 2023 09 07t161945. 440

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माना जा रहा है कि मोदी गवर्नमेंट 18 से 22 सितंबर तक बुलाए गए संसद के विशेष सत्र में जाति जनगणना की काट के लिए ओबीसी  सब कैटगराइजेशन के लिए बनाई गई जस्टिस रोहिणी कमेटी की रिपोर्ट पेश कर सकती है राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि पांच दिनों के विशेष सत्र में मोदी गवर्नमेंट वन नेशन, वन इलेक्शन, स्त्री आरक्षण, समान नागरिक संहिता बिल समेत  जस्टिस रोहिणी कमेटी की रिपोर्ट भी संसद में पेश कर सकती है कमेटी ने जुलाई में ही अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी है

अगर रोहिणी कमेटी की रिपोर्ट संसद में पेश हुई और उस पर चर्चा हुई तो ओबीसी और एससी-एसटी वोट की राजनीति करने वाले दलों की बोलती बंद हो सकती है भाजपा की यही प्रयास है कि उन्हें जाति गणना की मांग पर चुप कराया जाय और ओबीसी के अंदर वैसी जातियों के साथ हमदर्दी हासिल की जाए जो उस कैटगरी का फायदा पाने में अभी तक पिछड़े हुए हैं

जस्टिस रोहिणी आयोग के गठन के उद्देश्य
दरअसल, जस्टिस रोहिणी कमेटी का गठन तीन बड़े उद्देश्यों के लिए किया गया था पहला- OBC के अंदर भिन्न-भिन्न जातियों और समुदायों को आरक्षण का फायदा कितने असमान ढंग से मिल रहा है इसकी जांच करना दूसरा- ओबीसी के अंदर 27 प्रतिशत आरक्षण बंटवारे का तरीका, आधार और मानदंड तय करना और तीसरा- ओबीसी की जातियों का उपवर्गों में बांटने के लिए पहचान करना केंद्र गवर्नमेंट ने इसी सोच के साथ अक्टूबर 2017 में जस्टिस रोहिणी की प्रतिनिधित्व में एक आयोग का गठन किया था

क्या है आरक्षण बंटबारे की धारणा
लंबे समय से यह धारणा रही है कि ओबीसी कैटगरी का 27 प्रतिशत आरक्षण का फायदा कुछ गिनी-चुनी जातियों के लोग ही उठा लेते हैं, जबकि उसी समुदाय की अपेक्षाकृत अधिक पिछड़ी जातियों के लोग उस फायदा से वंचित रह जाते हैं इसी कम्पलेन या कमी को दूर करने के लिए कोटा के अंदर कोटा यानी ओबीसी कैटगरी के अंदर अन्य जातियों के बीच क्षैतिज आरक्षण की सीमा तय करने का जिम्मा आयोग को सौंपा गया था

आयोग की रिपोर्ट में क्या?
जस्टिस रोहिणी कमीशन ने राष्ट्रपति को 1100 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है इस रिपोर्ट में सिफारिशें दो भागों में बंटी हुई हैं रिपोर्ट के पहले भाग में ओबीसी आरक्षण के ओबीसी जातियों के बीच क्षैतिज बंटवारे से संबंधित है, जबकि दूसरे भाग में 2633 पिछड़ी जातियों की पहचान जनसंख्या में उनके आनुपातिक अगुवाई और आरक्षण का फायदा पाने में उनके आनुपातिक अगुवाई से जुड़ा है इसमें सरकारी योजनाओं खासकर आरक्षण से फायदा पाने वालों का डेटा संकलित है

रिपोर्ट के सियासी अर्थ क्या?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रोहिणी कमीशन का गठन केंद्र की मोदी गवर्नमेंट ने समाज के पिछड़े वर्गों खासकर अति पिछड़ों को लुभाने के लिए किया था ऐसी धारणा है कि ओबीसी के अनुसार आने वाले यादव समुदाय के लोग भाजपा के वोट बैंक नहीं हैं लेकिन यूपी-बिहार जैसे बड़े राज्यों में वह ओबीसी आरक्षण की मलाई खाने में सबसे आगे हैं, जबकि नोनिया, कहार, बढ़ई, कुम्हार, धानुक, चौरसिया, राजभर, कश्यप, बिंद केवट, निषाद आदि जातियों के लोग आर7ण का आनुपातिक फायदा नहीं उठा पा रहे हैं संयोग से ये जातियां भाजपा की वोट बैंक हैं

ओबीसी जनसंख्या कितनी?
आगामी लोकसभा चुनावों में INDIA गठबंधन के घटक दल सभी ओबीसी जातियों को लुभाने की प्रयास कर रहे हैं और मोदी गवर्नमेंट और भाजपा को ओबीसी विरोधी बताने की प्रयास कर रहे हैं ऐसे में केंद्र की मोदी गवर्नमेंट के लिए जस्टिस रोहिणी आयोग की रिपोर्ट न सिर्फ़ उनकी जाति जनगणना की मांग के लिए एक बड़ी काट हो सकती है बल्कि ओबीसी वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की प्रयास भी साकार हो सकती है बता दें कि NSSO के एक सर्वे के मुताबिक, राष्ट्र में करीब 41 प्रतिशत ओबीसी जनसंख्या है लेकिन मंडल कमीशन की रिपोर्टके अनुसार यह जनसंख्या 52 प्रतिशत है

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