छत्तीसगढ़ में भाजपा ने सीएम के रूप में आदिवासी नेता विष्णुदेव साय का नाम किया तय
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पंच से मुख्यमंत्री तक के यात्रा की पूरी कहानी उन लोगों के लिए मिसाल है जो सीएम बनने का सपना देख रहे हैं। अपने दादा-ताऊ की सियासी विरासत को कायम रखते हुए विष्णुदेव साय 1989 में पंच चुने गए, 1990 में सरपंच और उसी वर्ष 26 वर्ष की उम्र में पहली बार विधायक बने। उनके मुख्यमंत्री बनने की पूरी स्क्रिप्ट केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तैयार की है। वे पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के भी करीबी रहे हैं।तीन दिसंबर को चुनाव रिज़ल्ट आने के बाद से ही छत्तीसगढ़ में नए मुख्यमंत्री का प्रतीक्षा हो रहा था। सात दिनों में बीजेपी ने सीएम पद के लिए आदिवासी नेता विष्णुदेव साय का नाम तय किया है। विधायक दल की रविवार को हुई बैठक के बाद उनके नाम का घोषणा किया गया।
विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद गवर्नमेंट बनाने का दावा पेश करने के लिए विष्णुदेव साय शाम को ही राजभवन पहुंच गए। विष्णुदेव साय अब तक चार बार के सांसद, तीन बार के विधायक और छत्तीसगढ़ में बीजेपी के अध्यक्ष की कमान संभालने वाले विष्णुदेव साय केंद्र गवर्नमेंट में राज्य मंत्री भी रह चुके हैं।
नए मुख्यमंत्री विष्णुदेव 26 वर्ष की उम्र में ही पहली बार विधायक बन गए थे, उनके दादा और दो ताऊ भी, विधायक-सांसद रह चुके हैं। विष्णुदेव साय ने इस बार चुनाव कुनकुरी विधानसभा सीट से लड़ा था, जिसमें उन्होंने 25 हजार 541 वोट से जीत मिली थी।
एक दिन पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा-“मेरी विनम्रता को कमज़ोरी नहीं मानना चाहिए। मैं तो इसे अपनी ताक़त मानता हूं और मेरी प्रयास रहेगी कि जीवन भर विनम्र बना रहूं।
उनके चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की थी कि आप इन्हें विधायक बनाइए, इन्हें बड़ा आदमी मैं बनाऊंगा।
अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान बोला था, “विष्णुदेव जी हमारे अनुभवी कार्यकर्ता हैं। नेता हैं, सांसद रहे, विधायक रहे, प्रदेश अध्यक्ष रहे। एक अनुभवी नेता को बीजेपी आपके सामने लाई है। आप इनको विधायक बना दो। उनको बड़ा आदमी बनाने का काम हम करेंगे।”
छत्तीसगढ़ के जिस सरगुजा संभाग से विष्णुदेव साय जीते हैं, उस संभाग की सभी 14 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की है। उसके बाद से ही विष्णुदेव साय को सीएम बनाए जाने की चर्चा प्रारम्भ हो गई थी।
पिछड़ा वर्ग से आने वाले भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह, आईएएस से विधायक बने ओपी चौधरी और राज्य के पूर्व गृह मंत्री रामविचार नेताम के नाम की भी चर्चा थी। लेकिन अंततः पार्टी ने विष्णुदेव साय के नाम पर मुहर लगाई।
कौन हैं विष्णुदेव साय21 फरवरी 1964 को एक आदिवासी परिवार में जन्में विष्णुदेव साय ने अपनी 10वीं तक की पढ़ाई कुनकुरी के लोयला हायर सेकेंडरी विद्यालय से की थी। उनके दिवंगत दादा बुधनाथ साय 1947 से 1952 तक विधायक और उनके दिवंगत ताऊ नरहरि प्रसाद साय भी दो बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं। एक और ताऊ केदारनाथ साय भी विधायक रह चुके हैं। सियासी माहौल में पले-बढ़े विष्णुदेव साय 1989 में जशपुर ज़िले के बगिया गांव में पहली बार पंच चुने गये। इसके बाद अगले ही वर्ष उनकी पंचायत का सरपंच चुना गया था। उसी वर्ष बीजेपी ने उन्हें तपकरा विधानसभा से अपना प्रत्याशी बनाया और अविभाजित मध्यप्रदेश में 1990 में वे पहली बार विधानसभा पहुंचे।

