17 सितंबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का लिया फैसला

केटीआर ने बोला कि तेलंगाना राज्य के गठन के बाद पिछले 10 सालों के दौरान बीआरएस गवर्नमेंट ने कई विकास और कल्याण कार्यक्रम चलाए। इसने तेलंगाना को पूरे राष्ट्र के लिए एक मॉडल राज्य बना दिया है। उन्होंने बोला कि कुछ सियासी दल जो इस विकास को पचा नहीं पा रहे हैं, वे हर मामले का राजनीतिकरण करने की प्रयास कर रहे हैं। बीआरएस नेता ने बोला कि दुर्भाग्य से कुछ पार्टियां राष्ट्रीय एकता दिवस का राजनीतिकरण करने की भी प्रयास कर रही हैं। उन्होंने लोगों से उन विभाजनकारी ताकतों से सावधान रहने का आग्रह किया जो हर मामले को धर्म से जोड़कर समाज में विभाजन पैदा करने की प्रयास कर रहे हैं।
केटीआर ने बोला कि 17 सितंबर, 1948 को तेलंगाना हिंदुस्तान का हिस्सा बन गया। इस दिन राजशाही की स्थान लोकतंत्र ने ले ली। पूरे तेलंगाना समाज ने निरंकुश प्रबंध से लोकतांत्रिक स्वतंत्रता में बदलाव सुनिश्चित करने के लिए सभी कोशिश किए। उन्होंने बोला कि 17 सितंबर राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। बीआरएस नेता ने बोला कि विभाजनकारी ताकतें अपने संकीर्ण स्वार्थी सियासी हितों के लिए इस अवसर को बिगाड़ने की प्रयास कर रही हैं।
राज्य कैबिनेट में मंत्री केटीआर ने बोला कि कुछ अवसरवादी जिनका उस समय के इतिहास या विकास से कोई लेना-देना नहीं है, वे तेलंगाना के उज्ज्वल इतिहास को खराब करने के लिए सस्ती राजनीति में लिप्त हैं। बीआरएस नेता ने बोला कि बौद्धिक और एक्टिव प्रतिक्रिया के लिए मशहूर तेलंगाना समाज को तेलंगाना की आत्मा को प्रदूषित करने वाली ताकतों को हराने के लिए समान जागरूकता दिखानी चाहिए। राज्य गवर्नमेंट ने पिछले वर्ष आधिकारिक तौर पर 17 सितंबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया था।
16 सितंबर से राज्य भर में तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। केंद्र गवर्नमेंट ने 17 सितंबर को तेलंगाना मुक्ति दिवस मनाने के लिए हैदराबाद में एक कार्यक्रम भी आयोजित किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक परेड का निरीक्षण किया था। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे और कर्नाटक के मंत्री बी श्रीरामुलु शामिल हुए थे। बीजेपी पहले ही घोषणा कर चुकी है कि अमित शाह 17 सितंबर को हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करेंगे।

