सेंसेक्स और निफ्टी की जगह ETF में निवेश करता है EPFO
एम्प्लाइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) ने मौजूदा वित्त साल (2023-24) में अप्रैल से अक्टूबर तक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड यानी ETF में ₹27,105 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया है। ईपीएफ़ओ ने फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में ₹53,081 करोड़ का निवेश किया था।

वहीं वित्त साल 2021-22 में रिटायरमेंट फंड बॉडी, ईपीएफ़ओ ने ₹43,568 करोड़ का इन्वेस्टमेंट ETF में किया था। श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने आज (11 दिसंबर) लोकसभा में इस बात की जानकारी दी है। ईपीएफ़ओ ने ETF में अगस्त 2015 से इन्वेस्टमेंट करना प्रारम्भ किया था।
सेंसेक्स और निफ्टी की स्थान ETF में निवेश करता है EPFO
EPFO किसी भी कंपनी के शेयर में सीधे तौर पर इन्वेस्ट नहीं करता है। वह सेंसेक्स और निफ्टी को रेप्लिकेट करने वाले ETF के जरिए बाजार में पैसे लगाता है। 31 मार्च 2022 तक ईपीएफ़ओ भिन्न-भिन्न कॉर्प्स फंड में ₹18.30 लाख करोड़ रुपए मैनेज कर रहा था। इसमें 8.70% (₹1.6 लाख करोड़) ETF में इन्वेस्ट किया था। जबकि, 91.30% (₹16.7 लाख करोड़ ) अमाउंट डेट इन्वेस्टमेंट और पब्लिक एकाउंट ऑफ इण्डिया में इन्वेस्ट किया था।
क्या है ETF?
ETF म्यूचुअल फंड का एक टाइप है, जिसे स्टॉक एक्सचेंजों पर खरीदा और बेचा जाता है। ETF को ट्रेडिंग अवधि के दौरान कभी भी खरीदा और बेचा जा सकता है। जबकि म्यूचुअल फंड के ट्रेडिंग के दौरान बेचा और खरीदा नहीं जा सकता है। गोल्ड ETF, इंडेक्स ETF, बॉन्ड ETF, करेंसी ETF और सेक्टर ETF इसके टाइप हैं।
स्टॉक और ETF में अंतर
स्टॉक, किसी पब्लिक ट्रेडेड कंपनी में ओनरशिप के हिस्सा को दर्शाता है। यानी यदि आपने किसी कंपनी का शेयर खरीदा है, तो आप उस कंपनी में एक हिस्सेदार हो जाते हैं। जबकि एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, बॉन्ड और स्टॉक्स की तरह एसेट और सिक्योरिटी का एक बंडल होता है। एक सिंगल ETF में निवेश किए जा सकने वाले एक से अधिक कितने भी बॉन्ड या स्टॉक हो सकते हैं।

