सरकार ने आईटी हार्डवेयर उत्पादों के आयात के लिए जटिल लाइसेंसिंग मानदंडों को बदला

उन्होंने बोला कि आयात प्रतिबंधों के संबंध में हितधारकों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, नीति में कुछ परिवर्तन किए गए हैं और आयातकों के लिए एक ‘एंड-टू-एंड’ औनलाइन प्रणाली प्रारम्भ की गई है। सारंगी ने बोला कि यह प्रणाली आयातकों को कहीं भी जाए बिना संपर्क विवरण भरने की सुविधा प्रदान करेगी। यह घोषणा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि गवर्नमेंट ने 4 अगस्त को घोषणा की थी कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और चीन जैसे राष्ट्रों से आयात में कटौती करने के लिए आयातकों को 1 नवंबर से इन वस्तुओं को आयात करने के लिए लाइसेंस की जरूरत होगी।
एक नयी लाइसेंस प्रणाली
भारत की विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए, नयी लाइसेंसिंग प्रबंध लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर (टैबलेट कंप्यूटर सहित), माइक्रो कंप्यूटर, मेनफ्रेम या मेनफ्रेम कंप्यूटर और कुछ डेटा प्रोसेसिंग मशीनों पर लागू होती है। डीजीएफटी ने बोला कि आयातक अब आयात लाइसेंस प्राप्त करने के लिए सिस्टम पर आवेदन कर सकते हैं। मात्रा, मूल्य या किसी राष्ट्र पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
राजस्व विभाग भी नयी प्रणाली की तैयारी में लगा हुआ है और पूरी आवेदन प्रक्रिया में 10 मिनट से भी कम समय लगेगा और आसान लाइसेंस स्वचालित रूप से जारी किए जाएंगे। सारंगी ने बोला कि रिजेक्टेड यूनिट लिस्ट में शामिल कंपनियों को लाइसेंस नहीं मिलेगा। ऐसी सूची में ऐसी कंपनियां शामिल हैं जिन्होंने एडवांस ऑथराइजेशन एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (ईपीसीजी) जैसी योजनाओं का फायदा उठाते हुए निर्यात दायित्वों को पूरा नहीं किया है या चूक की है या उनके विरुद्ध डीआरआई (राजस्व खुफिया निदेशालय) के मुद्दे लंबित हैं।
ऐसी कंपनियां आवेदन नहीं कर सकतीं
सेकेंड-हैंड या रीफर्बिश्ड सामान आयात करने की इच्छुक कंपनियों को भी इस लाइसेंस के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं होगी क्योंकि उनके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अलग है। सारंगी ने बोला कि औनलाइन सिस्टम लागू होने के बावजूद ये आईटी हार्डवेयर उत्पाद अभी भी रोक श्रेणी में हैं और इनमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

