भारत को अपनी संप्रभुता बनाए रखनी चाहिए : अमिताभ कांत
नयी दिल्ली. नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) अमिताभ कांत ने शुक्रवार को बोला कि हिंदुस्तान को अपनी संप्रभुता बनाए रखनी चाहिए और पश्चिम का प्रौद्योगिकी उपनिवेश नहीं बनना चाहिए. उन्होंने तीव्र और किफायती ढंग से नवोन्मेष को गति देने की आवश्यकता बताई.

स्टार्टअप महाकुंभ कार्यक्रम में कांत ने पश्चिमी मॉडल अपनाने के विरुद्ध आगाह किया जिससे हिंदुस्तान की संस्कृति, पहचान और सभ्यता की ताकत को हानि हो सकता है. उन्होंने बोला कि राष्ट्र को अपने स्वयं के डेटा सेट के आधार पर मॉडल तैयार करना चाहिए और पश्चिम के अंतर्निहित पूर्वाग्रहों से मुक्त होना चाहिए.
जी-20 शेरपा ने बोला कि हिंदुस्तान के लिए प्रौद्योगिकी की उन्नति में अपनी संप्रभुता बनाए रखना और आगे बढ़कर नेतृत्व करना बहुत जरूरी है. हमें न तो पश्चिम का और न ही दुनिया के किसी अन्य राष्ट्र का प्रौद्योगिकी उपनिवेश बनना चाहिए. हमें बहुत ही कम ऊर्जा खपत वाले, लागत कारगर ढंग से नवोन्मेष को गति देने की आवश्यकता है.
कांत ने हिंदुस्तान की 22 भाषाओं और अनेक बोलियों के साथ बहुभाषी विविधता का जिक्र करते हुए ग्रामीण जनसंख्या की कारगर ढंग से जरूरतों को पूरा करने के लिए एआई मॉडल के बहुभाषी और बहुविध होने की जरूरत बतायी.
उन्होंने बोला कि एआई प्रभुत्व की दौड़ बहुत खुली है, उन्होंने भारतीय स्टार्टअप से सीमित हार्डवेयर कंप्यूटिंग शक्ति का इस्तेमाल करके ऊर्जा-कुशल एआई समाधानों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया.
कांत ने डीपसीक के ओपन-सोर्स इनोवेशन जैसे उदाहरणों का हवाला देते हुए बोला कि कैसे चुस्त दृष्टिकोण कम लागत पर जरूरी सफलताएं हासिल कर सकते हैं. उन्होंने इसके अतिरिक्त स्टार्टअप से डीप टेक, कृत्रिम मेधा, परिवहन, बैटरी भंडारण और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में परिवर्तन लाने और उनका दोहन करने का आग्रह किया.

