भारत का चांद पर सफल पदार्पण चीन के लिए लाया बुरी खबर
Chandrayaan 3 vs Luna 25: हिंदुस्तान का चंद्रयान 3 तो चांद की सतह पर पहुंच गया, लेकिन रेस में बताया जा रहा रूस का Luna 25 क्रैश हो गया। अब इसे चीन के लिए भी बड़ा झटका बताया जा रहा है। इसकी भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई वजह सामने आती हैं। साथ ही यह भी बोला जा रहा है कि हिंदुस्तान का चांद पर सफल पदार्पण भी चीन के लिए अच्छी समाचार नहीं लाया है।
रूस फेल हुआ तो चीन के लिए झटका कैसे?
खबर है कि वर्ष 2030 तक रूस और चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर स्टेशन तैयार करने की योजना बना रहे थे। इस संबंध में वर्ष 2021 में एक घोषणा भी की गई थी। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लूना 25 का फेल होना चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी परेशान करने वाली स्थिति है। दरअसल, चून और रूस, अमेरिका को चुनौती देने की प्रयास करते रहते हैं।
इसके अतिरिक्त लूना 25 की लॉन्चिंग में शामिल होने और आगे की चर्चा के लिए चीन के अधिकारी वू यांहुआ भी रूस पहुंचे थे। जानकार यह भी मानते हैं कि एक अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चीन के लिए रूस एक सीमित साझेदार की तरह मानता है।
हालांकि, इस बात की संभावनाएं बहुत कम ही जताई जा रही हैं कि लूना 25 के फेल होने का असर चीन-रूस के अंतरिक्ष रिश्तों पर पड़ेगा।
क्या हिंदुस्तान का चांद का पहुंचना भी चीन के लिए झटका है?
कहा जा रहा है कि हिंदुस्तान का चंद्रयान 3 के जरिए चांद पर पहुंचना चीन के लिए अच्छी समाचार नहीं लाया है। बीबीसी की एक रिपोर्ट में बोला गया है कि यदि लूना 25 सफल हो जाता, तो चीन के लिए स्थिति अधिक अच्छी होती। दरअसल, रूस का लूना 25 फेल होने के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड होने का सबसे बड़ा मौका हिंदुस्तान को ही मिला था और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पूरी तरह इसे भुनाया भी। इसके अतिरिक्त चंद्रयान 3 की सुरक्षित लैंडिंग को हिंदुस्तान के अंतरिक्ष भविष्य के लिए भी काफी निर्णायक बताया जा रहा है।
बड़े समझौते से दूर रहे चीन और रूस
अमेरिका की प्रतिनिधित्व में हुए आर्टमिस एकॉर्ड के अनुसार नियम तैयार किए गए थे। इनके अनुसार सूचनाओं को सार्वजनिक किए जाने जैसी बातें कही गई थीं, जिनपर हिंदुस्तान समेत करीब 30 राष्ट्रों ने हस्ताक्षर किए थे। अब खास बात है कि इस एकॉर्ड से चीन और रूस दोनों ही दूर रहे थे। इन दोनों राष्ट्रों की साझेदारी को इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन बोला जाता है।
चीन अपनी रफ्तार से बढ़ रहा
खास बात है कि जब कई बड़े राष्ट्र चांद पर उतरने में सफल हुए, तब चीन 2013 से लेकर 2020 के बीच तीन बार सफल हुआ। 2013 में चीन ने चांग ई 3 के जरिए कामयाबी हासिल की। 2019 में चांग ई 4 के जरिए फिर इसे दोहराया। 2020 में चीन ने चांग ई 5 के जरिए सैंपल रिटर्न मिशन को भी अंजाम दिया।

