लेटेस्ट न्यूज़

जानें, कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में किस उद्देश्य के साथ पहुंची ED की टीम…

छत्तीसगढ़ कांग्रेस पार्टी के प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारी कुछ नेताओं को समन देने पहुंची. जानकारी के अनुसार मुद्दा पूर्व मंत्री कवासी लखमा और शराब घोटाले से जुड़ा हुआ है. सुकमा में बने कांग्रेस पार्टी कार्यालय के मुद्दे में जांच के

Ed office 3 202206237966

WhatsApp Group Join Now

ED की टीम PCC महामंत्री मलकीत सिंह गैदू को समन जारी किया है. प्रवर्तन निदेशालय के 4 अधिकारी सुरक्षा बलों के साथ पहुंचे थे. उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट के कार्यकाल में हुए शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय की टीम कर रही है.

गैदू ने बोला कि उन्होंने समन रिसीव कर लिया है. सुकमा-कोंटा में भवन के संबंध में 4 तथ्यों में उत्तर मांगा गया है. 27 फरवरी को उत्तर पेश करना है. हमारे वरिष्ठ नेताओं और अधिवक्ताओं से वार्ता कर इसका उत्तर देंगे.

ED ने लखमा को 15 जनवरी को अरैस्ट किया था. प्रवर्तन निदेशालय ने रिमांड पर उनसे 7 दिन पूछताछ की. इसके बाद 21 जनवरी से 4 फरवरी तक न्यायिक रिमांड पर कारावास भेजा गया. प्रवर्तन निदेशालय की विशेष न्यायालय 2 बार उनकी रिमांड बढ़ा चुकी है. लखमा 4 मार्च तक न्यायिक रिमांड पर कारावास में हैं.

ED का आरोप- लखमा सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे

ED का इल्जाम है कि, पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे. लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था. इनसे शराब सिंडिकेट को सहायता मिलती थी. वहीं, शराब नीति बदलने में जरूरी किरदार निभाई, जिससे छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की आरंभ हुई.

ED का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया.

कमीशन के पैसे से बेटे का घर बना, कांग्रेस पार्टी भवन निर्माण भी

ED के वकील सौरभ पांडेय ने कहा कि, 3 वर्ष शराब घोटाला चला. लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे. इस दौरान 36 महीने में लखमा को 72 करोड़ रुपए मिले. ये राशि उनके बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और कांग्रेस पार्टी भवन सुकमा के निर्माण में लगे.

ED ने बोला था कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी हानि हुआ है. शराब सिंडिकेट के लोगों की जेबों में 2,100 करोड़ रुपए से अधिक की गैरकानूनी कमाई भरी गई.

घोटाले की धनराशि 2161 करोड़

निदेशालय की ओर से लखमा के विरुद्ध एक्शन को लेकर बोला गया कि, प्रवर्तन निदेशालय की जांच में पहले पता चला था कि अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अन्य लोगों का शराब सिंडिकेट छत्तीसगढ़ राज्य में काम कर रहा था. इस घोटाले की धनराशि 2161 करोड़ रुपए है. जांच में पता चला है कि कवासी लखमा को शराब घोटाले से पीओसी से हर महीने कमिशन मिला है .

2019 से 2022 के बीच चले शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार ऐसे होती थी गैरकानूनी कमाई.

  • पार्ट-A कमीशन: सीएसएमसीएल यानी शराब की खरीद और बिक्री के लिए राज्य निकाय द्वारा उनसे खरीदी गई शराब के प्रति ‘केस’ के लिए डिस्टिलर्स से घूस ली जाती थी.
  • पार्ट-B कच्ची शराब की बिक्री: बेहिसाब “कच्ची ऑफ-द-बुक” देशी शराब की बिक्री हुई. इस मुद्दे में सरकारी खजाने में एक भी रुपया नहीं पहुंचा और बिक्री की सारी धनराशि सिंडिकेट ने हड़प ली. गैरकानूनी शराब सरकारी दुकानों से ही बेची जाती थी.
  • पार्ट-C कमीशन: शराब बनाने वालों से कार्टेल बनाने और बाजार में निश्चित हिस्सेदारी दिलाने के लिए घूस ली जाती थी. एफएल-10ए लाइसेंस धारकों से कमीशन ली गई जिन्हें विदेशी शराब के क्षेत्र में कमाई के लिए लाया गया था.

Back to top button