महुआ मोइत्रा अपने निष्कासन फैसले को बतायी अनुचित, अन्यायपूर्ण और मनमाना
नई दिल्ली . तृणमूल कांग्रेस पार्टी नेता महुआ मोइत्रा ने लोकसभा से अपने निष्कासन को चुनौती देते हुए सोमवार को उच्चतम न्यायालय का रुख किया.
संविधान के अनुच्छेद 32 के अनुसार शीर्ष न्यायालय के समक्ष दाखिल अपनी याचिका में मोइत्रा ने अपने निष्कासन के निर्णय को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और मनमाना” बताया.
पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर संसदीय क्षेत्र से सांसद मोइत्रा को 8 दिसंबर को संसद के निचले सदन से निष्कासित कर दिया गया था.
उनके विरुद्ध कार्रवाई ‘संसदीय प्रश्नों के लिए नकद’ इल्जाम पर आचार समिति की जांच के बाद की गई थी.
“संसदीय प्रश्नों के लिए नकद” के कथित इल्जाम में मोइत्रा के निष्कासन की घोषणा करते हुए, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा: “यह सदन समिति के निष्कर्षों को स्वीकार करता है कि सांसद महुआ मोइत्रा का आचरण एक सांसद के रूप में अनैतिक और अशोभनीय था, उनका सांसद बने रहना मुनासिब नहीं है.”
शुक्रवार को सदन में नैतिकता पैनल की रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद उन्हें लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया.
लोकसभा की आचार समिति ने दुबई स्थित व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी के साथ अपने संसदीय लॉगिन साझा करने का गुनेहगार पाए जाने के बाद मोइत्रा को निष्कासित करने की सिफारिश की थी.
अपने निष्कासन के तुरंत बाद, मोइत्रा ने बोला था कि नैतिकता पैनल के पास उन्हें निष्कासित करने की शक्ति नहीं है.
उन्होंने यह भी बोला कि व्यवसायी से नकदी स्वीकार करने का “कोई सबूत नहीं” है, जो कि बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और उनके पूर्व साथी जय अनंत देहाद्राई द्वारा लगाया गया मुख्य इल्जाम था.
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें हीरानंदानी और देहाद्राई से जिरह करने की अनुमति नहीं दी गई .

