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कश्मीर जीतने की चाह में पाक ने खाई मुंह की

india pakistan war 1965: 1965 की जंग के सहारे पाक सोच रहा था कि वह कश्मीर को हिंदुस्तान से छीन लेगा लेकिन उसकी ख्वाहिश पूरी तो नहीं हुई, विपरीत लाहौर तक इंडियन आर्मी पहुंच गई थी पाक को लग रहा था कि 1962 की जंग के बाद हिंदुस्तान कमजोर हो चुका है चीन ने उसे गहरा सदमा दिया है ऊपर से अमेरिकी मदद अब क्यों न कश्मीर को हासिल कर लिया जाएNewsexpress24. Com download 2023 09 23t111446. 206

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ऐसे में बिना सोचे समझे अगस्त 1965 में हिंदुस्तान पर धावा कर दिया लेकिन सितंबर की आरंभ में उसको पता लग गया था कि कितनी बड़ी गलती की है पाक ने हिंदुस्तान को उत्तर देने के लिए 3 फेज की रणनीति बनाई थी लेकिन इंडियन आर्मी ने उसकी फौज को करारी मात दी लगने लगा था कि जल्द लाहौर पर हिंदुस्तान का कब्जा होगा

पाकिस्तान ने जंग को ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम नाम दिया था उसने सोचा था कि वह अखनूर ब्रिज पर छांब क्षेत्र में कब्जा करके इंडियन आर्मी को रोक लेगा जिसके बाद इंडियन आर्मी जम्मू नहीं पहुंच पाएगी कश्मीर हिंदुस्तान के हाथ से निकल जाएगा सुबह पौने चार बजे खतरनाक धावा हिंदुस्तान पर कर दिया

 

वहां, उपस्थित इंडियन आर्मी की 191 ब्रिगेड तीन तरफ के हमले को झेल नहीं सकी जिसके कारण स्थिति नाजुक हो गई जिसके बाद हिंदुस्तान ने प्लान किया कि क्यों न राजस्थान की तरफ से लाहौर पर अटैक किया जाए जिसने पाक की पूरी योजना की हवा निकाल दी

पीओके के 8 किलोमीटर भीतर घुस गया था भारत

इसके बाद हिंदुस्तान की तीन डिविजन ने पठानकोट से लेकर सूरतगढ़ में मोर्चा खोल दिया था इंडियन आर्मी की एक्सवन कोर 6 सितंबर तक पाक के कई इलाकों को कब्जे के लिए आगे बढ़ी जिसके बाद जंग तेज हो चुकी थी सेना सियालकोट और लाहौर के काफी करीब थी साफ था कि लाहौर हिंदुस्तान के कब्जे में होगा लेकिन आज यानी 23 सितंबर के दिन संयुक्त देश के हस्तक्षेप से पाक और हिंदुस्तान में ताशकंद समझौता हुआ

जिसके कारण जंग थमी लेकिन पाक की हेकड़ी नहीं निकली पाक ने दावा किया कि उरी और पुंछ उसके कब्जे में है जबकि हिंदुस्तान पीओके के 8 किलोमीटर भीतर हाजी पीर पास तक जा चुका था पाक ने हार के बाद भी सबक नहीं लिया उस समय गुजरात में कच्छ के रण की सीमा को लेकर टकराव था जो 3 वर्ष बाद ब्रिटिश पीएम हैरॉल्ड विल्सन के हस्तक्षेप से सुलझ पाया था

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