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देह व्यापार रैकेट में पुलिस ने एक महिला और तीन पुरुषों को किया गिरफ्तार

रानाघाट (नदिया). शहर की सड़कों से महज़ कुछ ही दूरी पर, भीड़भाड़ वाले थाना पाड़ा क्षेत्र में चल रहा मधुचक्र (देह व्यापार रैकेट) आखिरकार पुलिस की नजर में आ गया. रानाघाट थाना पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एक स्त्री और तीन मर्दों को अरैस्ट किया है, जिनमें से एक आदमी उसी मकान का मालिक कहा जा रहा है जहाँ यह धंधा चल रहा था.<!–

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पुलिस सूत्रों के मुताबिक़, उन्हें सूचना मिली थी कि घनी बस्ती में बने एक निजी मकान में शरीर व्यापार का गोरखधंधा चलाया जा रहा है. सूचना मिलते ही रानाघाट पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर छापा मारा और आपत्तिजनक गतिविधियों में शामिल एक स्त्री और तीन मर्दों को अरैस्ट किया. इस दौरान वहाँ से दो युवतियों को भी बरामद किया गया, जिनके बारे में बताया जा रहा है कि उन्हें उत्पीड़न का शिकार बनाया जा रहा था.
पुलिस के प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, अरैस्ट स्त्री इस पूरे नेटवर्क की मुख्य संचालिका है, जो बाहरी जिलों या राज्यों से लड़कियों को लाकर इस गैरकानूनी धंधे में शामिल करती थी. वहीं जिन तीन मर्दों को अरैस्ट किया गया, उनमें एक उस घर का मालिक भी शामिल है, हालाँकि उसने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है और स्वयं को बेगुनाह कहा है.
पुलिस ने दोनों युवतियों को तुरन्त सुरक्षा में लिया और उन्हें न्यायालय में न्यायाधीश के सामने पेश किया, जहाँ उनका सीक्रेट बयान (164 CrPC के तहत) दर्ज किया गया. इससे यह संभावना व्यक्त किया जा रहा है कि पुलिस इस मुद्दे में मानव तस्करी, यौन उत्पीड़न और स्त्री सुरक्षा कानूनों के अनुसार और गंभीर धाराएँ भी जोड़ सकती है.
गिरफ्तार चारों आरोपियों को रानाघाट न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. पुलिस ने मुद्दे की गहन जांच प्रारम्भ कर दी है और यह पता लगाने की प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क के तार कहीं और से भी जुड़े हैं या नहीं.
मामले के सामने आने के बाद क्षेत्रीय निवासियों में गहरा आक्रोश देखने को मिला. लोगों का बोलना है कि बस्ती के बीचोंबीच ऐसा गैरकानूनी कारोबार चलना न सिर्फ़ सामाजिक माहौल को प्रदूषित करता है, बल्कि बच्चों और स्त्रियों की सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है. कई लोगों ने यह भी इल्जाम लगाया कि पुलिस को पहले से इस गतिविधि की भनक थी, परंतु कार्रवाई में देर की गई.
इस मुद्दे में पुलिस भारतीय दंड संहिता (IPC) के अनुसार मानव तस्करी, जबरन शरीर व्यापार, और स्त्रियों के उत्पीड़न से जुड़ी धाराओं में मुद्दा दर्ज कर सकती है. साथ ही Immoral Traffic (Prevention) Act, 1956 के अनुसार भी क्राइम सिद्ध होने पर दोषियों को कड़ी सजा हो सकती है.

 

 

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