जी20 समिट में पुतिन और शी जिनपिंग के शामिल न होने पर एस. जयशंकर ने कहा…
G20 Summit 2023: जी20 समिट में रूस (Russia) के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) और चीन (China) के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के शामिल नहीं होने पर विदेश मंत्री डाक्टर एस। जयशंकर (S. Jaishankar) ने बोला कि मुझे लगता है कि G20 में भिन्न-भिन्न समय पर कुछ ऐसे राष्ट्रपति या पीएम रहे हैं जिन्होंने किसी कारण से नहीं आने का निर्णय किया है। लेकिन उस मौके पर जो भी उस राष्ट्र का प्रतिनिधि होता है, वह अपने राष्ट्र और उसकी स्थिति को सामने रखता है। मेरा मानना है कि हर कोई बहुत गंभीरता के साथ जी20 में आ रहा है।
G20 समिट में क्या होगी चर्चा?
एस। जयशंकर ने बोला कि सब कुछ तैयार हो रहा है। वार्ताकार वार्ता कर रहे हैं, और जो लोग व्यवस्थाएं ठीक कराने का कोशिश कर रहे हैं। वे इस पर काम कर रहे हैं। यह वास्तव में हमारे लिए बहुत ही केंद्रित समय है। मुझे लगता है कि यह जरूरी है कि लोगों को यह पता चले कि क्या हो रहा है और अभी जी20 के बारे में मेरा मानना है कि इसमें बहुत सारे मामले हैं। कुछ दीर्घकालिक संरचनात्मक मामले हैं, और कुछ अधिक उभरने वाले हैं। ऐसे कई मामले हैं जिन पर दुनिया गौर कर रही है और इसका बोझ ग्लोबल साउथ और विकासशील राष्ट्रों पर है। हमारे लिए एक बहुत जरूरी संदेश ग्लोबल साउथ पर ध्यान केंद्रित करना है। लेकिन इसका एक बड़ा संदर्भ भी है। संदर्भ बहुत अशांत अंतरराष्ट्रीय वातावरण, कोविड का प्रभाव, यूक्रेन संघर्ष का प्रभाव, कर्ज जैसे मामले जो कुछ समय से चल रहे हैं और जलवायु व्यवधान जो आज अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रहे हैं, उसका है।
विपक्ष को जयशंकर का जवाब
वहीं, G20 समिट के लिए गवर्नमेंट की तरफ से किए गए व्यवस्था की विपक्ष की ओर से निंदा पर एस। जयशंकर ने बोला कि यदि किसी को लगता है कि वे लुटियंस दिल्ली या विज्ञान भवन में अधिक सुविधाजनक महसूस कर रहे थे तो यह उनका विशेषाधिकार था। वही उनकी दुनिया थी और तब शिखर सम्मेलन की बैठकें ऐसे समय हुईं जहां राष्ट्र का असर संभवतः विज्ञान भवन में या उसके 2 किलोमीटर (लुटियंस दिल्ली) तक में रहा हो। यह एक अलग युग है, यह अलग गवर्नमेंट है और यह एक अलग विचार प्रक्रिया है। पीएम ने महसूस किया और हमने उस दिशा में काम किया है, जिसमें G-20 ऐसी चीज है जिसे एक राष्ट्रीय कोशिश के रूप में माना जाना चाहिए। जिन लोगों को लगता है कि हमें अभी भी 1983 में फंसे रहना चाहिए उनका 1983 में फंसे रहने का स्वागत है।
यूक्रेन संकट पर जयशंकर की दो टूक
जब जयशंकर से पूछा गया कि रूस के विदेश मंत्री ने बोला है कि वे चाहते हैं कि यूक्रेन संकट पर उनके विचार को G20 के भाषण में शामिल किया जाए और क्या शिखर सम्मेलन से पहले शक्ति प्रदर्शन प्रारम्भ हो गया है? इसपर जयशंकर ने बोला कि प्रतीक्षा करना चाहिए और देखना चाहिए कि वार्ता में वास्तव में क्या होता है और इसे पहले से ही इस आधार पर नहीं आंकना चाहिए कि एक अवसर पर क्या बोला जा सकता है और एक अवसर पर जो बोला गया था उसकी मीडिया व्याख्या क्या हो सकती है।

