मनोरोग के कुछ लक्षण सकारात्मक भी होते हैं: एक्सपर्ट बोले…
मनोरोगी शब्द सुनते ही प्राय: हर किसी की आंखों के सामने हिंसक या आपराधिक चेहरे की तस्वीर उभरने लगती है। लेकिन कुछ मनोवैज्ञानिकों का तर्क है कि हर मनोरोग को हिकारत से देखना या उससे डरना ठीक नहीं है। कुछ लक्षण सकारात्मक भी होते हैं। ऐसे लक्षणों पर ध्यान दिया जाए तो उनसे फायदा भी उठाया जा सकता है।

डर्बी यूनिवर्सिटी इंग्लैंड के फोरेंसिक मनोविज्ञान के लेकचर्र लुईस वालेस का बोलना है, मनोरोग के लक्षण कुछ हद तक हर किसी में उपस्थित होते हैं। लेकिन उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर बताना या कलंकित करना ठीक नहीं है। केवल हिंसक या आपराधिक लक्षणों पर ध्यान देने से मनोरोगी के उन लक्षणों पर अध्ययन की गुंजाइश समाप्त होने लगती है, जो सकारात्मक असर डाल सकते हैं।
मनोरोगियों की अच्छाई पर फोकस किया जाना चाहिए
द मास्क ऑफ सैनिटी पुस्तक के लेखक प्रख्यात अमेरिकी मनोचिकित्सक हर्वे क्लेक्ले एक मनोरोगी पर किए शोध का हवाला देते हैं। क्लेक्ले कहते हैं, एक मनोरोगी दाम्पत्य जीवन में बेवफा, निर्दयी, नशे का आदी था लेकिन उसका सकारात्मक लक्षण यह था कि वह कड़ी मेहनत करता था। यदि उसकी अन्य आदतों पर ध्यान न दिया जाए तो उसकी कड़ी मेहनत की प्रवत्ति का संबंधित क्षेत्र में फायदा उठाया जा सकता था।
अब तक ज्यादातर अध्ययन जेलों में, सामान्य जनसंख्या में नहीं
मनोवैज्ञानिकों का बोलना है, ज्यादातर शोधार्थी मनोरोग का शोध अक्सर जेलों में किया। इसीलिए किताबों-फिल्मों में उन्हें घातक और हिंसक क्रिमिनल कहा गया। पर मनोरोग को अलग नजरिए से देखने से अब शोधकर्ताओं के लिए नए दरवाजे खुले हैं।
नीदरलैंड में एवांस यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के नैदानिक मनोविज्ञान शोधकर्ता डेसिरे पालमेन कहते हैं, अधिकतर मनोरोगी आदमी हमारे आसपास ही रहते हैं, जेलों में नहीं। इसीलिए अध्ययन सामान्य जनसंख्या के बीच होने चाहिए।

