लेटेस्ट न्यूज़

मंदिर पक्ष ने आयकर आयुक्त के समक्ष अपनी दलील पेश करते हुए कहा…

 आम आदमी हो या कोई उच्च अधिकारी, हर किसी को ईश्वर के सामने झुकना ही पड़ता है ऐसा ही एक मुद्दा मध्य प्रदेश में सामने आया है, जहां एक अधिकारी हनुमान जी से हार गए इनकम टैक्स आयुक्त ने मंदिर के पक्ष में आदेश पारित किया है आइए जानते हैं पूरी कहानी इंदौर के प्राचीन श्री रणजीत हनुमान मंदिर ने नोटबंदी के दौरान अपने चढ़ावे को गिना और बैंक में जमा कर दिया दान की धनराशि 2.5 करोड़ रुपये थी, जिस पर इनकम टैक्स विभाग की नजर पड़ी इनकम टैक्स विभाग ने मंदिर को नोटिस जारी कर पूछा कि इतना पैसा कहां से आया इसके उत्तर में मंदिर ने बोला कि यह भक्तों द्वारा ईश्वर को दिए गए दान और चढ़ावे की धनराशि हैNewsexpress24. Com download 2024 02 10t144725. 072
WhatsApp Group Join Now

आईटी विभाग ने साढ़े तीन करोड़ रुपये का टैक्स लगाया था

इस पर आईटी विभाग ने साढ़े तीन करोड़ रुपये का टैक्स लगाया उन्होंने बोला कि प्राचीन श्री रणजीत हनुमान मंदिर का न तो कोई पंजीकरण है और न ही यह कोई धर्मार्थ ट्रस्ट है पूरा मुद्दा आयकर कमिश्नर तक पहुंचा और उन्होंने मंदिर के पक्ष में निर्णय सुनाया और टैक्स माफ करने का आदेश दिया

आयकर आयुक्त ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं

मंदिर पक्ष ने इनकम टैक्स आयुक्त के समक्ष अपनी दलील पेश करते हुए बोला कि मंदिर सरकारी जमीन पर स्थित है, जिसका प्रबंधन गवर्नमेंट करती है ऐसे में मंदिर के लिए टैक्स देना महत्वपूर्ण है इस पर आईटी विभाग ने बोला कि जिस समय मंदिर ने बैंक में धनराशि जमा की थी, उस समय मंदिर धारा 88जी और 12ए के अनुसार दर्ज़ नहीं था

आयकर विभाग ने टैक्स माफ कर दिया है

आयकर आयुक्त ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मंदिर के पक्ष में निर्णय सुनाया इसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने साढ़े तीन करोड़ रुपये का टैक्स माफ कर दिया इसे लेकर मंदिर पक्ष का बोलना है कि इस निर्णय के बाद इंदौर में जो मंदिर और मठ रजिस्टर्ड नहीं हैं, उन्हें टैक्स नहीं देना होगा

Back to top button