मंदिर पक्ष ने आयकर आयुक्त के समक्ष अपनी दलील पेश करते हुए कहा…

आईटी विभाग ने साढ़े तीन करोड़ रुपये का टैक्स लगाया था
इस पर आईटी विभाग ने साढ़े तीन करोड़ रुपये का टैक्स लगाया। उन्होंने बोला कि प्राचीन श्री रणजीत हनुमान मंदिर का न तो कोई पंजीकरण है और न ही यह कोई धर्मार्थ ट्रस्ट है। पूरा मुद्दा आयकर कमिश्नर तक पहुंचा और उन्होंने मंदिर के पक्ष में निर्णय सुनाया और टैक्स माफ करने का आदेश दिया।
आयकर आयुक्त ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं
मंदिर पक्ष ने इनकम टैक्स आयुक्त के समक्ष अपनी दलील पेश करते हुए बोला कि मंदिर सरकारी जमीन पर स्थित है, जिसका प्रबंधन गवर्नमेंट करती है। ऐसे में मंदिर के लिए टैक्स देना महत्वपूर्ण है। इस पर आईटी विभाग ने बोला कि जिस समय मंदिर ने बैंक में धनराशि जमा की थी, उस समय मंदिर धारा 88जी और 12ए के अनुसार दर्ज़ नहीं था।
आयकर विभाग ने टैक्स माफ कर दिया है
आयकर आयुक्त ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मंदिर के पक्ष में निर्णय सुनाया। इसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने साढ़े तीन करोड़ रुपये का टैक्स माफ कर दिया। इसे लेकर मंदिर पक्ष का बोलना है कि इस निर्णय के बाद इंदौर में जो मंदिर और मठ रजिस्टर्ड नहीं हैं, उन्हें टैक्स नहीं देना होगा।

