छत्तीसगढ़ में अगले तीन दिनों तक रहेगी हल्की बारिस
छत्तीसगढ़ से अगले दो से तीन दिनों में मानसून की वापसी प्रारम्भ हो सकती है. मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरी छत्तीसगढ़ से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं. हालांकि, मध्य और दक्षिणी छत्तीसगढ़ में अगले तीन दिनों तक मामूली से मध
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पिछले 24 घंटों की बात करें तो प्रदेश के कुछ स्थानों पर मामूली से मध्यम बारिश दर्ज की गई है. सबसे अधिक वर्षा दुर्ग जिले के भिलाई में 58.6 मिमी हुई है. वहीं, अधिकतम तापमान 32.02 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में और न्यूनतम तापमान 19.6 डिग्री पेंड्रारोड में रिकॉर्ड किया गया है.
अक्टूबर में अब-तक 109% अधिक बरसा पानी
इस बार अक्टूबर माह में अब तक सामान्य से 109% अधिक बारिश दर्ज की गई है. आमतौर पर 8 अक्टूबर तक राज्य में औसतन 28.3 मिमी वर्षा होती है और मानसून लौट चुका होता है, लेकिन इस बार अब तक 59.1 मिमी से अधिक बारिश हो चुकी है.
10 दिन देरी से लौटेगा मानसून
मौसम विभाग के मुताबिक, 30 सितंबर तक हुई बारिश को मानसून की बारिश माना जाता है, जबकि इसके बाद की बारिश को ‘पोस्ट मानसून’ यानी मानसून के बाद की बारिश माना जाता है.
फिलहाल राष्ट्र के कई हिस्सों से मानसून की वापसी प्रारम्भ हो चुकी है. छत्तीसगढ़ में आमतौर पर 5 अक्टूबर के आसपास सरगुजा की तरफ से मानसून लौटना प्रारम्भ होता है, लेकिन इस बार वापसी में देरी हो रही है.
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार प्रदेश में मानसून करीब 15 अक्टूबर के बाद लौटेगा, यानी सामान्य से करीब 10 दिन देरी से.
बलरामपुर में सामान्य से 52% अधिक बरसा पानी
प्रदेश में अब तक 1167.4 मिमी औसत बारिश हुई है. बेमेतरा जिले में अब तक 524.5 मिमी पानी बरसा है, जो सामान्य से 50% कम है. अन्य जिलों जैसे बस्तर, राजनांदगांव, रायगढ़ में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है. जबकि बलरामपुर में 1520.9 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 52% अधिक है. ये आंकड़े 30 सितंबर तक के हैं.
जानिए क्यों गिरती है बिजली
बादलों में उपस्थित पानी की बूंदें और बर्फ के कण हवा से रगड़ खाते हैं, जिससे उनमें बिजली जैसा चार्ज पैदा होता है. कुछ बादलों में पॉजिटिव और कुछ में नेगेटिव चार्ज जमा हो जाता है. जब ये उल्टा चार्ज वाले बादल आपस में टकराते हैं तो बिजली बनती है.
आमतौर पर यह बिजली बादलों के भीतर ही रहती है, लेकिन कभी-कभी यह इतनी तेज होती है कि धरती तक पहुंच जाती है. बिजली को धरती तक पहुंचने के लिए कंडक्टर की आवश्यकता होती है. पेड़, पानी, बिजली के खंभे और धातु के सामान ऐसे कंडक्टर बनते हैं. यदि कोई आदमी इनके पास या संपर्क में होता है तो वह बिजली की चपेट में आ सकता है.

