अकार में ऐसे होता है साइबर अटैक

ऑटो निर्माता कंपनियों को आने वाले दिनों में यात्री कारों (एम श्रेणी) और वाणिज्यिक चार पहिया वाहनों (एन श्रेणी) में यह सुरक्षा लागू करनी होगी। गवर्नमेंट ने गाइडलाइंस का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसका नोटिफिकेशन अगले महीने जारी हो सकता है। संयुक्त देश आर्थिक आयोग के साइबर सुरक्षा गाड़ी विनियमन WP.29 को ध्यान में रखते हुए गवर्नमेंट ने कारों की साइबर सुरक्षा से संबंधित एक मसौदा तैयार किया है।इसके लागू होने के बाद ऑटो निर्माताओं को साइबर सिक्योरिटी मैनेजमेंट सिस्टम (सीएसएमएस) का अनुपालन प्रमाणपत्र लेना होगा। सार्वजनिक मंच पर राय मिलने के बाद इसे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय लागू करेगा।
कार में ऐसे होता है साइबर अटैक!
सॉफ़्टवेयर कोड की संख्या बढ़ने से आधुनिक वाहनों में साइबर हमलों का ख़तरा बढ़ जाता है। ये जटिल कोड धीरे-धीरे जमा होते रहते हैं और जैसे-जैसे ये कोड बढ़ते हैं, साइबर अपराधियों के लिए धावा करना सरल हो जाता है। यह समझना जरूरी है कि साइबर हमले न सिर्फ़ गाड़ी के सिस्टम को हैक कर सकते हैं बल्कि बैकएंड या थर्ड-पार्टी सर्वर तक भी पहुंच सकते हैं।आप अपनी कार से कनेक्टेड रखे गए गैजेट्स में सेंध लगाकर सारी जानकारी चुरा सकते हैं। गवर्नमेंट ने यह कदम उन रिपोर्टों और शिकायतों के बाद उठाया है, जिनमें बोला गया था कि लोकप्रिय कार ब्रांड वाहनों में पैक किए गए सभी आधुनिक गैजेट और उपकरणों से डेटा गोपनीयता के लिए खतरा पैदा करते हैं।
सरकार के ड्राफ्ट में क्या होगा?
केंद्रीय मंत्रालय की ओर से जारी ड्राफ्ट में बोला गया है कि कुछ श्रेणियों की कारों और वाणिज्यिक वाहनों के कार्यों को साइबर खतरों से बचाने के लिए एक समान साइबर सुरक्षा और प्रबंधन प्रणाली (सीएसएमएस) बनाने का प्रस्ताव किया गया है।मसौदा रिपोर्ट में बोला गया है कि 14 जुलाई, 2023 को आयोजित ऑटोमोटिव उद्योग मानक समिति (एआईएससी) की 66वीं बैठक में चर्चा के आधार पर, समिति साइबर सुरक्षा से लैस वाहनों की स्वीकृति के लिए एक ऑटोमोटिव उद्योग मानक (एआईएस) की सिफारिश करेगी। प्रबंधन प्रणाली (सीएसएमएस)। ) तैयार करने के लिए सहमत हुए।
सीएसएमएस क्या करेगा?
मसौदे के अनुसार, साइबर सुरक्षा प्रणाली गाड़ी मालिकों को साइबर सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ डेटा गोपनीयता की भी रक्षा करेगी। कनेक्टेड कारें, जो हिंदुस्तान में अधिक लोकप्रियता हासिल कर रही हैं, प्रौद्योगिकी से भरपूर हैं। इनके जरिए न केवल ड्राइविंग डेटा निकाला जाता है, बल्कि वाहन में उपस्थित मनोरंजन और सैटेलाइट रेडियो या मैप जैसे थर्ड पार्टी फंक्शन को भी ट्रैक किया जाता है। ऐसे में ऑटो निर्माताओं के लिए सीएसएमएस लागू करना जरूरी होगा।

