विकलांगता पेंशन की यह नई स्कीम रिटायर होने वाले जवानों पर होगी लागू

नए प्रावधानों के भीतर यह 5 फीसदी से बढ़कर 10 और इसकी अधिकतम सीमा 40 फीसदी तक जा सकती है। इस नीति के बारे में चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा, “नया नियम लाने की बड़ी वजह है, ताकि फोर्स को ठीक ढंग से ऑपरेशनल रूप से तैयार रखा जा सके। उन्हें मोटिवेटेड रखा जा सके। पुराने नियम के दुरुपयोग को रोका जा सके।”पेंशन के एंटाइटलमेंट और एमोलूमेंट्स में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। विकलांग होने के बाद भी यदि कोई सेना में रहता है, तो उसको इम्प्रेड रिलीफ मिलेगा। यह 21 सितंबर 2023 से लागू होगा। सेना ऑफिसरों का बोलना है कि ड्यूटी में रहते हुए यदि जवान विकलांगता का शिकार होता है तो ऐसी स्थिति में प्रभावित जवानों को पहले से अधिक विकलांगता पेंशन मिलेगी।
सेवा के मुताबिक, इस नए परिवर्तन से फैमिली पेंशन पर कोई असर नही पड़ेगा। साथी यह भी बोला जा रहा है कि यह नयी योजना जवानों और अधिकारी को फिट बने रहने के लिए प्रोत्साहित करेगी। चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को कहा कि नयी पेंशन नीति से किसी पूर्व सैनिक को हानि नहीं होगा। उनका बोलना है कि न ही इस पेंशन योजना से भविष्य में रिटायर होने वाले सैनिकों की पेंशन पर कोई दुष्प्रभाव पड़ेगा।
जनरल चौहान का बोलना है कि इस नयी योजना से सिर्फ़ दिव्यांगता पेंशन को रेशनालाइज किया गया है। रक्षा जानकारों का बोलना है कि विकलांगता पेंशन के लिए पहले दावेदारी 5 फीसदी के आसपास रहती थी। हालांकि इन दिनों इसमें काफी वृद्धि हुई है। पहले के मुकाबले कई गुना जवान और अधिकारी इसके लिए दावा पेश करते हैं। ऐसे में दुरुपयोग रोकने के लिए पेंशन की नयी नीति बनाई गई है। नयी दिव्यांगता पेंशन नीति को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। मौजूदा कार्यरत सेना ऑफिसरों और जवानों समय पूर्व एवं सेवानिवृत्त जवानों में इस नयी योजना को लेकर असमंजस है। इसे दूर करने के लिए तीनों सेनाओं ने 3 अक्टूबर को पूर्व सैनिक संगठन के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक कर उन्हें इस संबंध में जानकारी भी दी है।

