इन मंदिरों में भाई दूज के मौके पर दर्शन करने का मिलेगा विशेष लाभ
Bhai Dooj 2024: दीपोत्सव की आरंभ धनतेरस और समाप्ति भाई दूज पर होता है. पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व का समाप्ति होने जा रहा है. इस वर्ष भाई दूज 3 नवंबर को मनाया जा रहा है. नाम से ही साफ है कि ये पर्व भाई बहन के संबंध को मजबूत बनाने का त्योहार है.
साल में दो बार भाई दूज मनाई जाती है. एक होली के बाद और दूसरी दिवाली के बाद. ये पर्व रक्षाबंधन के जैसा ही होता है. हालांकि इसे मनाने का तरीका कुछ अलग होता है. इसमें रक्षाबंधन की तरह भाई की कलाई पर राखी नहीं बांधी जाती, बल्कि मस्तक पर तिलक लगाकर आरती उतारी जाती है. इस मौके पर बहनें चौक बनाकर पूजा करती हैं. हालांकि राष्ट्र में कई ऐसे मंदिर हैं जहां बहन और भाई साथ में पूजा करने जा सकते हैं. भाई दूज के मौके पर इन मंदिरों में दर्शन करने का विशेष फायदा मिल सकता है. रक्षाबंधन और भाई दूज के मौके पर यहां काफी भीड़ भी होती है.
इस लेख में उन पवित्र मंदिरों के बारे में कहा जा रहा है, जहां हर भाई बहन को दर्शन और पूजा करने जाना चाहिए.
मथुरा का यमुना धर्मराज मंदिर
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक मंदिर स्थित है जो कि भाई-बहन को समर्पित है. इस मंदिर में मौत के देवता यमराज जी और उनकी बहन यमुना माता विराजमान हैं. मथुरा स्थित घाट पर बने इस मंदिर में यमराज जी और यमुना जी की खास पूजा होती है. कहते हैं कि भाई और बहन को यहां यमुना नदी में एकसाथ डुबकी लगाकर स्नान करना चाहिए और मंदिर में साथ दर्शन करने चाहिए. इससे दोनों के संबंध की डोर मजबूत होती है और इच्छा पूर्ण होती है.
भैया बहिनी गांव, बिहार
बिहार राज्य के सिवान जिले में भाई-बहन का खास मंदिर है. मंदिर महाराजगंज अनुमंडल मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूर भीखा बांध के पास स्थित है. यहां तक कि इस जगह का नाम भी भैया बहिनी गांव है. मंदिर का इतिहास 500 वर्ष से अधिक पुराना कहा जाता है, जहां सदियों से भाई-बहन की पूजा की जाती है. कथा प्रचलित हैं कि एक भाई-बहन ने इसी गांव में जिस जगह पर समाधि ली थी, वहां दो वटवृक्ष निकल आएं हैं, जिनकी जड़ों का पता किसी को नहीं है. मान्यता है कि भाई-बहन यहां वटवृक्ष की परिक्रमा करने आते हैं.
बिजनौर में भाई-बहन का मंदिर
बिजनौर में चूड़ियाखेड़ा के जंगल में भाई-बहन का एक प्राचीन मंदिर है. मान्यता है कि सतयुग में एक भाई अपनी बहन को ससुराल से पैदल लेकर लौट रहा था, इस दौरान डाकुओं ने दोनों को रोककर स्त्री संग बदसलूकी और अमर्यादित व्यवहार किया. भाई-बहन ने भगवान से रक्षा की प्रार्थना की. भाई बहन पत्थर की प्रतिमा में परिवर्तित हो गए. आज भी उनकी प्रतिमा देवी देवताओं के रूप में विराजमान है.
उत्तराखंड का बंसी नारायण मंदिर
उत्तराखंड में स्थित बंसी नारायण के कपाट वर्ष में एक ही बार खुलते हैं. हालांकि यदि आप घूमने जा रहे हैं तो इस मंदिर को घूम आएं. वंशीनारायण का यह चमत्कारी और अनोखा मंदिर चमोली जिले में स्थित है. मान्यता है कि भगवान विष्णु वामन अवतार से मुक्त होने के बाद सबसे पहले यहां प्रकट हुए थे. इस मंदिर में बहन अपने भाई के माथे पर तिलक कर सकती है.

