नवरात्रि में इस पात्र में लगायें माता रानी का भोग, देवी होंगी प्रसन्न
चैत्र नवरात्रि की आरंभ 9 अप्रैल से होने जा रही है। इस दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्रि की खरीदारी के लिए बाजारों में भी भीड़ उमड़ रही है। पूजन सामग्री, श्रृंगार का सामान, चुनरी आदि खूब खरीदी जा रही हैं। वहीं, चैत्र नवरात्रि में माता दुर्गा की पूजा का जितना महत्व है, उतना ही महत्व भोग का भी है। भोग लगाने के लिए बर्तनों की जानकारी भी होना महत्वपूर्ण है। कई बार हम अंजाने में ये गलती कर बैठते हैं।

भोग के बर्तनों का रखें ध्यान
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के मशहूर ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने कहा कि नवरात्रि में माता के पूजन के साथ उन्हें प्रसाद भी चढ़ाया जाता है, जिसे भोग कहते हैं। सभी बर्तनों में माता को भोग नहीं लगाया जा सकता है। माता दुर्गा को भोग लगाने के लिए विशेष धातु या पात्र होना जरूरी है। इससे माता दुर्गा प्रसन्न होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इस धातु के बर्तन का करें इस्तेमाल
ज्योतिषाचार्य ने कहा कि नवरात्रि के दिनों में माता दुर्गा को सोने, चांदी, तांबा, स्टील आदि धातु के पात्र में भोग एकदम भी नहीं लगाना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। पीतल या मिट्टी के पात्र में ही माता दुर्गा को भोग लगाना चाहिए, जो बहुत शुभ माना जाता है। वहीं, पूजा की समापन के बाद भोग को तुरंत ग्रहण कर लेना चाहिए। लोगों में बांटना भी चाहिए। देवी-देवताओं के पास अधिक देर भोग रखने से नकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होने लगता है।
भोग के नए बर्तन लाना चाहिए या पुराने?
ज्योतिषाचार्य ने कहा कि भोग लगाने के लिए पीतल या मिट्टी के पात्र होना जरूरी हैं। पुराने पीतल के बर्तन में भी भोग लगाया जा सकता है, लेकिन वह गंदा और टूटा ना हो। यदि पीतल का बर्तन टूट गया है तो बाजार से नया खरीद कर ही माता को भोग लगाएं। इससे अच्छा नए मिट्टी के बर्तन में माता को भोग लगाएं। मिट्टी के बर्तन सभी पात्रों में सबसे शुभ माने जाते हैं।

