ये महिला ‘पॉकेट साड़ी वाली’ के नाम से हुई मशहूर
उसे साड़ी पहनना पसंद है, लेकिन पहनने का तरीका नहीं आता। किसी ने साड़ी पहना भी दी, तो दिनभर उसे पहने रखना कठिन हो जाता है। उसने अपने आसपास कई स्त्रियों को ‘साड़ी शेमिंग’ का शिकार होते देखा, साड़ी न पहनने पर घर के बड़े-बुजुर्ग के ताने और नाराजगी भी देखी।

उसने आज की ग्लोबल भारतीय वुमन की आवश्यकता को समझा जो कॉर्पोरेट इवेंट्स में मॉडर्न अंदाज में साड़ी तो पहनना चाहती है, लेकिन अपना कंफर्ट खोना नहीं चाहती। उसने रेडी टू वियर साड़ी डिजाइन की और उसमें पॉकेट भी लगा दिया ताकि मॉडर्न भारतीय वुमन अपनी आवश्यकता की चीजें साड़ी की जेब में रख सके। साड़ी पहनना उसके लिए सुविधाजनक हो और ग्लैमरस भी।
ये आइडिया स्त्रियों को इतना पसंद आया कि ये स्त्री ‘पॉकेट साड़ी वाली’ के नाम से प्रसिद्ध हो गई। ‘ये मैं हूं’ में जानिए साड़ी को मॉडर्न और कंफर्टेबल बनाकर प्रसिद्ध हुईं स्वाति सिंह की कहानी…
हेलो दोस्तों…
मैं स्वाति सिंह, कोई फैशन डिजाइनर नहीं हूं। साड़ी में पॉकेट लगाने का आइडिया फैशन के लिए नहीं आवश्यकता और सहूलियत के लिए आया। मैं हमेशा से समाज सेवा के कामों से जुड़ी रही हूं। मेरा बैकग्राउंड फैशन की दुनिया से दूर दूर तक नहीं जुड़ा है। मैं लोअर मिडिल क्लास फैमिली की लड़की हूं। मैंने बचपन से अपने आसपास की स्त्रियों को पैसों की तंगी झेलते देखा। कुछ पैसों के लिए ये महिलाएं अजीबोगरीब काम करती थीं। जब मैं बड़ी हुई तो मुझे लगने लगा कि इन स्त्रियों के लिए कुछ करना चाहिए।
पैसे के लिए जान तक जोखिम में डालतीं
एक दिन मैंने देखा, इन स्त्रियों की पीठ पर पट्टी लगी हैं। पूछने पर उन्होंने कहा कि वो केमिकल टेस्टिंग के लिए गई थीं, जिसमें कॉस्मेटिक्स या दवाइयां ह्यूमन बॉडी पर टेस्ट की जाती हैं। ये टेस्ट कराने वालों को इसके लिए 100-200 रुपए मिलते हैं। इस टेस्टिंग के दौरान कई बार सिर के बाल तक हटाने पड़ते हैं। पैसे कमाने के लिए इन स्त्रियों का अपनी स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना मुझे अच्छा नहीं लगा। मैंने तय किया कि मैं इनके लिए रोजगार का बंदोबस्त करूंगी। क्योंकि मैं जानती थीं कि ये महिलाएं पैसे मांगना नहीं चाहतीं, बल्कि स्वाभिमान से कमाना चाहती हैं।
शादी का प्रेशर
मेरे पापा प्रॉपर्टी कंसल्टेंट हैं और मां होममेकर। छोटे इंजीनियर भाई की विवाह हो चुकी है। इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पेरेंट्स को मेरी विवाह की चिंता कितनी अधिक होगी। लेकिन मैं खुशनसीब हूं कि मेरे माता-पिता ने मुझ पर कभी विवाह का प्रेशर नहीं बनाया। सम्बन्धी पूछते हैं, लेकिन पेरेंट्स बात को संभाल लेते हैं। घर से किसी तरह की रोकटोक नहीं है इसीलिए मैं इतना कुछ कर पा रही हूं।
युवाओं को अंग्रेजी पढ़ाई
एमकॉम करने में बाद मैंने एक कॉलेज में पढ़ाना प्रारम्भ किया। लेकिन रोज कॉलेज जाकर एक ही सिलेबस वर्षों तक पढ़ाना मुझे पसंद नहीं आया। मैं कुछ और करना चाहती थी, कोई ऐसा काम जो सोशल इम्पैक्ट से जुड़ा हो।
फिर मैंने युवाओं को अंग्रेजी पढ़ाना प्रारम्भ किया। मैं स्वयं हिंदी मीडियम से पढ़ी हूं, लेकिन मैंने कुछ वर्षों तक झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब युवाओं को इंग्लिश पढ़ाना प्रारम्भ किया। ये काम मेरे लिए कठिन था, लेकिन अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर मैं ये काम करना चाहती थी।
अब सिविल सर्विस की कमी नहीं अखरती
एमकॉम के बाद मैंने सिविल सर्विस की तैयारी की। इसके लिए मैंने दिनरात पढ़ाई की, लेकिन मेरा सिलेक्शन नहीं हो पाया। मैं ऐसा काम करना चाहती जिसका समाज पर पॉजिटिव असर पड़े। मैंने अपने आसपास की स्त्रियों को रोजगार देने का मन बनाया और ‘रेडी टू वियर पॉकेट साड़ी’ के माध्यम से मैं अपना सपना पूरा कर सकी। सेल्फ हेल्प ग्रुप के जरिए अब ये महिलाएं स्वयं भी के दूसरे की सहायता करने लगी हैं।
पापा ने समझाई एकता की ताकत
मेरी बेस्ट फ्रेंड के पापा पान बेचते थे। एक दिन घर लौटते समय वो ट्रेन के नीचे आ गए और उनकी जान चली गई। ये समाचार सुनकर मैं रातभर रोती रही। पापा ने मुझे पांच सौ रुपए दिए और कहा, “मैं इतनी ही सहायता कर सकता हूं, लेकिन तुम सब विद्यालय के बच्चे मिलकर पैसे जमा करो तो अपनी फ्रेंड की सहायता कर सकते हो।”
मुझे पापा का आइडिया अच्छा लगा। मैंने अपनी टीचर से बात की और पैसे जमा करके फ्रेंड की सहायता की। यहीं से मुझे एकता की ताकत का एहसास हुआ। ये भी पता चला कि ‘क्राउड फंडिंग’ से कई मुश्किलें सरल हो सकती हैं।
फिर विद्यालय टीचर की किडनी खराब होने पर भी मैंने क्राउड फंडिंग से पैसे जमा किए और उनकी सहायता की।
अब हम ‘असीम शक्ति’ नाम से क्राउड फंडिंग करते हैं। इस राशि से स्त्रियों के रोजगार, बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए काम किया जाता है। इसमें 500 महिलाएं सहयोग कर रही हैं।
महिलाओं को रोजगार देना जरूरी
जो महिलाएं पढ़ी-लिखी नहीं हैं वो अपना बिजनेस करने से डरती हैं। इन स्त्रियों को ऐसे रोजगार की आवश्यकता होती है जहां वो घर के काम निपटाकर काम करने जाएं और कुछ पैसे कमा सकें। मैंने पहले फैशन डिजाइनर को अपना ‘रेडी टू वियर पॉकेट साड़ी’ आइडिया बताया। जब साड़ी के सैंपल से हम संतुष्ट हो गए, फिर इन स्त्रियों को ‘रेडी टू वियर पॉकेट साड़ी’ बनाना सिखाया। हमारे साथ जुड़ी महिलाएं अब इस काम में माहिर हो गई हैं।
स्टैंडअप इण्डिया से लोन लिया
मैं काम प्रारम्भ करना चाहती थी, लेकिन मेरे पास पैसे नहीं थे। फिर मैंने स्टैंडअप इण्डिया से 15 लाख रुपए का लोन लिया और ‘रेडी टू वियर पॉकेट साड़ी’ का बिजनेस प्रारम्भ किया। बहुत कम समय में हमारा बिजनेस पॉपुलर हो गया और हमारे पास साड़ी बनाने के ऑर्डर आने लगे। हम स्वयं साड़ियां तैयार करते ही हैं, साथ ही स्त्रियों से उनकी साड़ी मंगाकर उसे भी ‘रेडी टू वियर पॉकेट साड़ी’ में बदलकर उन्हें देते हैं।
साड़ी ड्रेपिंग का वीडियो वायरल हुआ
हमारा साड़ी ड्रेपिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद हमें ‘रेडी टू वियर पॉकेट साड़ी’ के इतने ऑर्डर आने लगे कि हमारे लिए काम संभालना कठिन हो गया। फिर हमने और अधिक स्त्रियों को अपने साथ जोड़ा। अब तो ‘पॉकेट साड़ी वाली’ ही मेरी स्वयं की पहचान बन गई है।
अभिनेत्री राजेश्वरी सचदेव ने हमारी साड़ी पहनकर अपना वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। उनका वीडियो देखकर हमें ‘रेडी टू वियर पॉकेट साड़ी’ के ढेरों ऑर्डर मिले।
साड़ी शेमिंग से बचा रही हूं
हमारी साड़ी पहनकर कई महिलाएं कहती हैं कि आपने हमें साड़ी शेमिंग से बचा लिया। विवाह जैसे मौकों पर जिन स्त्रियों को साड़ी पहनना नहीं आता उन्हें बड़े-बुजुर्गों की बातें सुननी पड़ती हैं। हमारी बनाई ‘रेडी टू वियर पॉकेट साड़ी’ पहनने और उसे संभालने में परेशानी नहीं होती। महिलाएं अब अपने कलेक्शन की साड़ियां हमें देती हैं ताकि हम उनके लिए ‘रेडी टू वियर पॉकेट साड़ी’ तैयार कर सकें।
पॉकेट ग्लोबल भारतीय वुमन की पहचान है
भारतीय महिलाएं अब अपनी ग्लोबल पहचान बना चुकी हैं। ऑफिस, इवेंट या कॉन्फ्रेंस में उन्हें अपना पारंपरिक परिधान साड़ी पहनने में कोई कठिनाई न हो इसलिए हमने रेडी टू वियर साड़ी तैयार की। साड़ी में पॉकेट इसलिए लगाया ताकि महिलाएं अपना मोबाइल और आवश्यकता की अन्य चीजें साड़ी के पॉकेट में रखकर बेफिक्र होकर ट्रैवल कर सकें। ‘रेडी टू वियर पॉकेट साड़ी’ पहनकर स्त्रियों को स्टाइल, एलिगेंस और कंफर्ट मिलता है। अब साड़ी स्त्रियों के लिए सहूलियत वाला पहनावा बन गया है।
महिलाओं के लिए स्त्रियों का प्रयास
आज की मॉडर्न स्त्रियों के लिए ‘रेडी टू वियर पॉकेट साड़ी’ बनाने का काम महिलाएं ही कर रही हैं। ये स्त्रियों द्वारा स्त्रियों को सशक्त बनाने और सहूलियत देने का कोशिश है। मैं 10 हजार स्त्रियों को रोजगार देना चाहती हूं। मुझे लगता है स्त्रियों के लिए साड़ी से खूबसूरत पहनावा और कोई हो ही नहीं सकता। यदि युवा लड़कियां साड़ी पहनना प्रारम्भ करेंगी तो मुझे मेरी मेहनत सार्थक लगेगी।

