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100 साल पुरानी दुर्गा पूजा, चैत्र नवरात्रि पर यहां डाक चढ़ाने की परंपरा

चैत्र नवरात्रि के दौरान देवी मंदिरों में रोजाना विशेष पूजा का आयोजन किया जा रहा है इन सबके बीच कोडरमा के गुमो में स्थित बसंती दुर्गा पूजा समिति का इतिहास काफी पुराना और प्रभावशाली है यहां करीब 100 सालों से माता दुर्गा की पूजा की जा रही है और यहां डाक चढ़ाने की खास परंपरा है समिति के कोषाध्यक्ष सीताराम प्रसाद ने कहा कि 100 साल पहले गुमो राजा के समय में दुर्गा पूजा प्रारम्भ हुई थी

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उस समय गांव में हैजा का प्रकोप था, जिससे बचाव को लेकर ग्रामीणों ने लकड़ी का मंदिर तैयार कर माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा प्रारम्भ की थी इसके बाद पूरा गांव इस गंभीर रोग से मुक्त हुआ था तभी से यहां लोगों की माता के प्रति अपार श्रद्धा है कहा कि नवमी को सबसे पहले पूजा राजा के गढ़ पर होती है इसके बाद इस मंदिर में पूजा होती है मन्नत पूरी होने पर लोग नवमी के दिन यहां 400 से अधिक भुआ की बलि देते हैं

अब डाक चढ़ाने के लिए 15 सालों तक करनी होगी प्रतीक्षा
सीताराम ने कहा कि नवरात्रि के दौरान मंदिर में मन्नत पूरी होने पर डाक चढ़ाने की परंपरा प्रारम्भ से रही है पहले केवल एक आदमी को वर्ष में एक बार डाक चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त होता था, लेकिन डाक की संख्या अधिक होने से कई लोग अपने जीवन में डाक नहीं चढ़ा पाते थे इस पर मंदिर के पुजारी द्वारा अब प्रत्येक साल पांच लोगों को सामूहिक रूप से डाक चढ़ाने की अनुमति दी गई है इसमें मन्नत पूरी होने पर लोग यहां डाक के माध्यम से नवरात्रि के दौरान स्थापित होने वाले माता दुर्गा की प्रतिमा के लिए श्रृंगार की सभी वस्तुएं चढ़ाते हैं डाक चढ़ाने के लिए अगले 15 सालों तक की बुकिंग हो चुकी है 75 से अधिक लोग डाक चढ़ाने की प्रतीक्षा में हैं

विसर्जन में गाड़ी का प्रयोग वर्जित
उन्होंने कहा कि नवमी के दिन मंदिर परिसर में महावीरी झंडा खड़ा होने के बाद दोपहर में यहां से झांकी निकाली जाती है, जो पूरे गांव का भ्रमण करती है इस झांकी के माध्यम से लोगों को समाज में एकजुटता बनाए रखने एवं आपसी सौहार्द्र का संदेश दिया जाता है नवरात्रि के समाप्ति के उपरांत माता की विदाई यहां अलग ढंग से की जाती है, जिसमें लोग माता को अपने कंधे पर जलाशय तक विसर्जन के लिए लेकर जाते हैं विसर्जन में किसी प्रकार के गाड़ी का प्रयोग नहीं होता है

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