पार्टनर से दूर रहने के पीछे हो सकता है AC का हाथ, रिश्ते का खून कर सकती है ज्यादा ठंडक

हर किसी की बॉडी है अलग
समाज में भले ही हस्बैंड और वाइफ को एक माना जाता हो लेकिन दोनों की बॉडी अलग होती है। किसी को अधिक गर्मी और दूसरे को अधिक ठंड लग सकती है। ऐसे में जब एक पार्टनर एसी के टेंपरेचर को अपने हिसाब से एडजस्ट करता है तो दूसरा परेशान हो सकता है क्योंकि उसकी बॉडी कम या अधिक तापमान को नहीं झेल सकती। अधिक कूलिंग में हाथ-पैर ठंडे होने लगते हैं। नींद भी प्रभावित हो सकती है।
बॉडी नहीं रहती एक्टिव
एसी का तापमान शरीर के तापमान को प्रभावित करता है जिसका असर कपल की इंटिमेसी पर पड़ता है। एसी में बॉडी का टेंपरेचर कम हो जाता है जिसे नसों पर दबाव पड़ता है और शरीर में अकड़न आने लगती है क्योंकि ब्लड सर्कुलेशन कम होता है। वहीं ठंडी हवा के कारण कमरे में नमी कम होने लगती है जिससे सांस फूल सकती है। ऐसे में कपल्स जब करीब आते हैं तो उन्हें अच्छा नहीं लगता और इसका असर उनके संबंधों पर पड़ता है।
कपल्स को करना चाहिए सम्मान
रिलेशनशिप एक्सपर्ट गीतांजलि शर्मा कहती हैं कि एसी का तापमान कपल्स के बीच लड़ाई का कारण ना बनें, इसके लिए दोनों को एक-दूसरे का सम्मान करना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि उनकी इंटिमेसी पर कोई असर ना पड़े। इंटिमेसी संबंध को मजबूत बनाती है और कपल्स को हमेशा एक-दूसरे के करीब रखती है। यदि एसी मनमुटाव का कारण है तो दोनों को खुलकर इस पर बात करनी चाहिए और एक-दूसरे के हिसाब से टेंपरेचर को एडजस्ट करना चाहिए। कपल्स को एक दिन अपने और दूसरे दिन पार्टनर के मनमुताबिक टेंपरेचर लगाकर सो सकते हैं। वैसे इंटिमेसी के लिए नॉर्मल रूम टेंपरेचर होना चाहिए। आप 20 से 24 डिग्री का टेंपरेचर सेट कर सकते हैं।
एसी का तापमान बढ़ा सकता है टेंशन
एसी का टेंपरेचर इंटिमेसी को सीधे तौर पर प्रभावित नहीं करता लेकिन आदमी को मानसिक रूप से जरूर परेशान कर सकता है और इंटिमेसी दिमाग से ही प्रारम्भ होती है। एसी का ठंडा तापमान नींद को प्रभावित करता है। जब आदमी नींद पूरी नहीं कर पाता तो वह तनाव में रहने लगता है और पार्टनर के प्रति चिड़चिड़ा होने लगता है जिससे उनके संबंधों पर असर पड़ सकता है।

